Best Viewed in Mozilla Firefox, Google Chrome

22
Sep

गॉल मिज का कल्चरल नियंत्रण

1. पिछले फसल की जुताई से पर्याक्रमण कम हो जाता है।

2. आसपास के क्षेत्रों से घास-फूस और जंगली पौधों के नियंत्रण से गॉल मिज में कमी आती है।

3. देर से रोपण (क्षेत्र में 3 सप्ताह के अन्दर पूर्ण रोपण कर लें) न करें ताकि पर्याक्रमण से बचा जा सके।

गॉल मिज का प्रबन्धन:

1. चावल के गॉल मिज के प्रबन्धन में शामिल हैं कल्चरल, होस्ट प्लांट रेसिस्टेंट और रसायनिक विधि।

यहां गॉल मिज के प्रति प्रतिरोधी चावल के प्रकारों की सूची दी गई है.                              

·         स्नेहा,·         पोथाना,·          ककतिया·         एरामल्लेलू,·         काव्या,·         राजेन्द्र धान  202,·          कर्ना,·         रुचि,·         समृद्धि,·         उषा,·         आशा,·         MDU 3,·         भुबन,·         समेली (Samalei),·         ओरुगल्लु (Orugallu),·         अभय,·         शक्ति, &m

1. गॉल मिज की प्रमुख अवस्था जिससे क्षति होती है वह मेगट है। मेग़ट बढ़ते शीर्ष को खाता है और पत्ते के मूल विभेदन को रोकता है।

2. इसमें शामिल है पत्ते के मूल के आंतरिक भाग से रेडियल रिज का विकास और साथ ही पत्ते लम्बे होते जाते हैं। 

3. एक खाली प्रकोष्ठ जिसे ‘गॉल’ कहते हैं, लार्वा के चारों ओर बनता है। चूंकि लार्वा गॉल को खाता है, आधार भाग पर चौड़ा होता है और प्याज के पत्ते की तरह लम्बे दिखाई देते हैं। 

4. लार्वा के तीन चरण होते हैं। प्राय: एक टिलर में एक मेगट पाए जाते हैं। 

5. पौधे के बढ़ते भाग पर पहुंचने के एक हफ्ते बाद पत्ते पर खरोंच के निशान दिखाई पड़ते हैं। यद्यपि, गॉल मिज के हमले का बाहरी लक्षण है ‘चांदी रंग की कली’ (सिल्वर शूट) अथवा ‘निशान/खरोंच’ जो प्याज के पत्ते की तरह होता है। 

6. कुछ मामलों में, निशान/खरोंच विकसित नहीं होते किंतु पौधे के बढ़ते हि

22
Sep

गॉल मिज का प्रसार क्षेत्र

1. चावल, ओरिजा ( Oryza) के वन्य प्रजाति और (Phospaladium geminatum,Phaspalum scrobiculatum, Panicum spp., Ischaeum ciliare, Cyanodan dactylon, Eleucine indica जैसे घास।

2. यह निम्न भूमि के चावलों का एक कीट है और यह चावल के पौधे के टिलरिंग स्टेज में सिंचित अथवा वर्षा पोषित गीले मौसम में पाया जाता है। यह ऊंची भूमि और अत्यधिक जल वाले चावल की फसलों में भी देखा गया है।

22
Sep

गॉल मिज का जीवनचक्र

1.मादा वयस्क चावल के पत्ते के आधार के निकट पौधे की अंत:

सतह पर अथवा कभी-कभी पत्ते की सतह पर अकेले अथवा समूह में अंडे देती हैं। एक मादा लगभग 100-200 अंडे देती है। अंडे लम्बे, नलिकाकार और चमक लिए हुए सफेद, कभी-कभी गुलाबी, लाल अथवा पीले होते हैं। अंडे फूटने से पहले पीले रंग के हो जाते हैं। अंडे फूटने के लिए उच्च आर्द्रता की आवश्यकता होती है और सेने की अवधि 3-4 दिनों की होती है। अन्डे से तुरंत निकला गॉल मिज धूसर-सफेद और अन्दर का सिरा नुकीला होने के साथ-साथ मजबूत होता है। नवजात लार्वा अपने भोजन के लिए आखिरकार पौधों के अग्र बढ़ते भाग अथवा बगल के कोंपलों पर पाया जाता है। इसके खाने से हुए नुकसान के कारण टिलर के आधार भाग पर नलिकाकार गॉल (रगड़ के निशान) का निर्माण होता है और पत्तों और पुष्प-गुच्छों की वृद्धि रुक जाती है। कीटों द्वारा लगातार खाने के परिणामस्वरूप रगड़ का निशान टिलर के

22
Sep

गॉल मिज का कीट-व्यवहार

1.वयस्क गॉल मिज मच्छर के जैसा होता है। मादाओं के चमकते लाल उदर से लैंगिक भिन्नता स्पष्ट देखी जा सकती है। निकलने के साथ ही मिलन की प्रक्रिया शुरू हो जाती हैं और इसके कुछ घंटे बाद ही ये अंडे देने आरम्भ कर देते हैं। वयस्क कीट प्रकाश संवेदी होते हैं और निशाचर होते हैं। बाहर निकलने के बाद नर गॉल मिज 12 – 18 घंटे तक ही जीवित रहते हैं।

1. जुलाई और अगस्त में जब दिन के समय वर्षा अधिक होती है तब कीटों की घटना अधिक होती है, जो पौधों के अधिकतम टिलरिंग स्टेज में भी होती है। 

2. पौधों की निकट दूरी और उच्च नाइट्रोजन की मात्रा से कीटों का पर्याक्रमण बढ़ जाता है।  

3. मुख्य रूप से बादल के दिनों में या बरसात के मौसम में, उच्च टिलरिंग वाले प्रकार की खेती में, गहन प्रबन्धन उपायों और निम्न कीटनाशन द्वारा इसका जनसंख्या घनत्व की वृद्धि के अनुकूल होता है। 

4. भारत में गॉल मिज पर हमले के लिए लगभग 19 पैरासिटॉइड्स और 7 परभक्षियों का पता लगाया जा चुका है। इनमें से, Platygaster oryzae (Platygasteriidae: Hymenoptera) प्रमुख पैरासिटॉइड है जो कीटों के अंडे और लार्वा के स्टेजों पर हमले करता है। 

5.Neanastatus grallarius, प्यूपा के पैरासाइट भी महत्वपूर्ण हैं। 

 

 

 

1. कार्बनफ्यूरन (Carbofuran) 3G @ 25 किग्रा/हेक्टेयर का प्रयोग करें (अथवा)

• फोरेट (Phorate) 10 G @ 10 किग्रा/हेक्टेयर अथवा

• कार्टेप (Cartap) 4 G @ 25 किग्रा/हेक्टेयर अथवा

• फिप्रोनिल (Fipronil) 0.3 G @ 25 किग्रा/हेक्टेयर अथवा

• Chlorpyriphos 10G @ 10 किग्रा/हेक्टेयर

2. स्प्रे क्विनेल्फस (Quinalphos) 25 EC @ 1600 मिली/हे. अथवा

• मोनोक्रोटोफॉस (Monocrotophos) 36 WSC @ 1100 मिली/हे. अथवा • Chlorpyriphos 20 EC @ 2000 मिली/हे. अथवा

• इंडोसल्फान (Endosulfan) 35 EC @ 1100 मिली/हे. अथवा

• कार्टेप (Cartap) 50 WP @ 800 ग्राम/हे. अथवा

• फिप्रिनिल (Fipronil) 5 SC @ 800 मिली/हे. अथवा

• एसीफेट (Acephate) 50 WP @ 950 ग्राम/हे.

• 7 से 10 दिनों पर इसे दुहराएं अथवा कार्बनफ्यूरन (Carbofuran) 3G @ 25 किग्रा/हे. का प्रयोग करें अथवा

• फिप्रोनिल (Fipronil) 0.3 G @ 25 किग्रा/हे. अथवा

• फोरेट (Phorate) 10 G @ 10 किग्रा/हे. अथवा

• कार्टेप (Cartap) 4 G @ 25 किग्रा/हे. अथवा Chlorpyriphos 10G @ 10 किग्रा/हे. का प्रयोग करें।

1. अंडे के पैरासिटॉइड की अधिक संख्या होने पर ट्राइकोग्रामा जैपोनिकम ( Trichogramma japonicum) रोपण के 15 दिन बाद तक पांच से छ: बार 1,00,000 की दर से एडल्ट/हेक्टेयर शुरू करें।

2. कीटों की निगरानी के लिए 5 मिग्रा ल्यूर @ 8 ट्रैप प्रति हे. की दर से लगाएं अथवा बड़े पैमाने पर ट्रैपिंग द्वारा सीधे नियंत्रण के लिए 20 ट्रैप्स/हे. लगाएं।

• अत्यधिक मात्रा में नाइट्रोजनी ऊर्वरक के प्रयोग से बचें, जोकि इसकी आबादी बढ़ती है।

• अत्यधिक मात्रा में पानी डालकर और जुताई कर पुआल को अथवा खर-पतवार को भूमि के नीचे दबाने से लार्वा और प्यूपा नष्ट हो जाते हैं।

• रोपण के समय बिचड़े की पत्ती के शीर्ष की कटाई से स्टेम बोरर के अंडे नष्ट हो जाते हैं।

• बचे-खुचे नर्सरी को हटा दें और मिट्टी में मिला दें।

• पुआलों की जुताई कर नष्ट कर दें।

Copy rights | Disclaimer | RKMP Policies