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वर्तमान में, तीन स्पीसीज Cnaphalocrocis medinalis, Marasmia patnalis तथा M.exigua भारत में प्रबल है जबकि C. medinalis को खेतों में मौजूद एकल लीफ फोल्डर कीट के रूप में स्वीकार कर लिया गया है।

वर्ग         :   इंसेक्टा Insecta

क्रम         :   लेपिडोपटेरा Lepidoptera 

फैमिली    :   पईरालीडे Pyralidae

जीनस      :   नेफलोक्रोसिस Cnaphalocrocis 

स्पीसीज    :   मेडीनालिस medinalis  

 

•कार्बारिल carbaryl 50 WP  @  1500 ग्राम/हे. अथवा  

•मोनोक्रोटोफास Monocrotophos 36 WSC @ 1500 मिली/हेक्टेयर अथवा  

•बी.पि.एम्.सी BPMC 50 EC @ 1000  मिली/हेक्टेयर अथवा

•एसीफेट Acephate 50 WP @ 1200  ग्राम/हे. अथवा  

•फिप्रोनिल Fipronil 5 SC  @ 1000  मिली/हेक्टेयर अथवा

•इमिडाक्लोप्रिड Imidacloprid 200 SL @ 125  मिली/हेक्टेयर अथवा

•इतोफेनप्रोक्स Ethofenprox 10 EC @ 750  मिली/हेक्टेयर अथवा

•थयामिथोक्साम Thiamethoxam 25 WG @ 100  ग्राम/हे. अथवा  

•क्लोतियानीडीन् Clothianidin 50 WDG 30  ग्राम/हे. अथवा   

•धूल कार्बारिल  Dust Carbaryl 25 से 30 किग्रा का फॉर्मुलेशन प्रति हेक्टेयर छिड़काव करें।  

•उपचार के एक हफ्ते बाद भी यदि होपर मौजूद रहे तो इस उपचार को दुहराएं।  

•यदि 2-3 अनुप्रयोगों की आवश्यक्ता हुई तो, वैकल्पिक अनुशंसित कीटनाशी का प्रयोग करें।  

एक ही कीटनाशी का बार-बार प्रयोग न करें। 

 

 

परभक्षी:   सिरटोरैनस लिविडीपेन्निस Cyrtorhinus lividipennis, कोक्क्सिनेल्ला अर्क्युएटा Coccinella arcuata, मैक्रस्पिस स्पिशिस Micraspis sp., हारमोनिय ओक्टोमेक्युलेटा Harmonia ctomaculata, सी.रिपेंडा C.rependa, मेनोकैलस सेक्स्माक्युलेटस Menochilus sexmaculatus, ब्रूमोईडिस् सुतुरालीस Brumoides suturalis, मयिक्रोविलिया डौग्लासी अट्रोलिनियेटा Microvelia douglasi atrolineata, सुडोगोनाटोपस स्पिशिस Pseudogonatopus sp., ओफियोनिया नैग्रोफसियेटा Ophionea nigrofasciata, लाईकोसा सुडोअन्न्युलेटा Lycosa pseudoannulata, टेट्राग्नाता मक्सिल्लोसा Tetragnatha maxillosa, अर्जियोप स्पिशिस Argiope sp, अरेनियास स्पिशिस Araneus sp, ओक्सियोप्स स्पिशिस Oxyopes sp., एतैपेना फोर्मोसाना Atypena formosana., कोनोसेफालास लोंगिपेन्निस Conocephalus longipennis, अग्रियोक्नेमिस पिग्मेया Agriocnemis pygmaea.   रोगजनक: एन्टोमोफथोरा स्पिशिस Entomophthora spp, फ्युसेरियम स्पिशिस Fus

1.एग पैरासिटॉइड : 

अनाग्रस स्पिशिस Anagrus sp, 

गोनाटोसिरस स्पिशिस Gonatocerus sp., 

ओलिगोसीटा स्पिशिस Oligosita spp., 

2.नवजात/वयस्क पैरासिटॉइड्स : 

हप्लोगोनाटोपस स्पिशिस Haplogonatopus sp., 

एक्थ्रोडेलफाक्स फेयिर्चिळडी Ecthrodelphax fairchildii., 

एलेंकास स्पिशिस Elenchus sp (Sterpsiptera), 

हेक्समार्मिस स्पिशिस Hexamermis sp (Mermithid). 

 

1. नाइट्रोजनी ऊर्वरक की ऊंची खुराक, निकट-निकट पौधे, और उच्च सापेक्षिक आर्द्रता से प्लांट होपर की जनसंख्या में वृद्धि होती है।  

2. चावल की खेतों से जल को बहाने से प्रारंभिक स्तर पर पर्याक्रमण को प्रभावी रूप से कम किया जा सकता है। जब भारी पर्याक्रमण हो तो खेत से 3 - 4 दिनों तक जल निकास करें।    

3. मुख्य खेत में संकरा रास्ता बनाएं। मुख्य खेत में संकरे रास्ते के प्रावधान के लिए प्रत्येक 2 मीटर के रोपण के बाद 30 सेमी का अंतराल रखें। 

 

प्लांट होपर का प्रबन्धन

राइस प्लांट होपर के प्रबन्धन में शामिल है कल्चरल, होस्ट प्लांट रेसिस्टेंट, जैविक तथा रासायनिक विधियां।

ग्रीन लीफ होपर के प्रति प्रतिरोधी चावल की किस्मों की सूची दी जा रही है:

चैतन्य कृष्णवेणी वज्रम (Vajram) प्रतिंभा मेकोम (Mekom) पविझम (Pavizham) मानसरोवर CO42 चन्दन (Chandana) नागार्जुन सोनासली (Sonasali) रश्मी (Rasmi) ज्योति भद्रा (Bhadra) नीला-अनंगा (Neela Annanga) दया अरुणा (Aruna) कनक (Kanaka) रेम्या भारतीदसन (Bharatidasan) कार्तिक (Karthika) विजेता कॉटन डोरा सनेमू (Cotton Dora Sannalu)  

1. वे चावल की फसल के सभी चरणों में हानि पहुंचाते हैं। वयस्क और नवजात दोनों टिलर के आधार भाग से रस चूसते हैं जिसके परिणामस्वरूप पौधे पीले पड़ जाते हैं और सूख जाते हैं।  

2. फ्लोएम फीडर होने के कारण पौधे के रस से ट्रांसलोकेटिंग पोषण नष्ट हो जाता है जिसके परिणामस्वरूप पौधों में संपोषण और भंडरण के लिए उपलब्ध कुल प्रकाशसंश्लेषण की क्षमता क्षीण हो जाती है। 

3. शुरुआती अवस्था में, गोल चित्ती दिखाई पड़ती है जो जल्द ही पौधे के सूख जाने के कारण भूरे रंग का हो जाता है।  

4. लक्षण पता चलते हैं क्योंकि पर्याक्रमण के लक्षण खेत के अन्दर से बाहर की ओर फैलते हैं। इस स्थिति को ‘होपर बर्न’ कहते हैं।  

5 .होपर्स द्वारा पौधे के आधार भाग पर मलत्याग किया गया मधुरस स्टूडी मोल्ड के लिए पसंदीदा सब्स्ट्रेट होता है। सीधी क्षति के अलावा, BPH घास-फूस द्वारा फैलने वाले वाइरस का कारक

22
Sep

प्लांट होपर का जीवनचक्र

मादा कीट 300-350 अंडे देती है और मैक्रोप्टेरस मादा कम अंडे देती है।

कीटों द्वारा अंडे प्राय: सीधी रेखा में पत्ती के कोष के बीचो-बीच बाहर निकाले जाते हैं, जबकि कभी-कभी मादा कीट पत्ती के नस पर अंडे देती है। अंडे गुम्बद की आकृति के एग प्ल्ग द्वारा ढका रहता है जो मादा कीट द्वारा उत्सर्जित होता है। पौधे की सतह से केवल अंडे का शीर्ष भाग ही उब हरा रहता है। अंडे देने की जगह भूरी धारी की तरह दिखाई देता है। अंडे लगभग 6-9 दिनों में फूटते हैं। अंडे से निकला नवजात कपास की तरह सफेद होता है और एक घंटे के अन्दर बैंगनी-भूरे रंग का हो जाता है। यह पौधे का रस चूसता है और वयस्क होने के लिए यह पांच सुप्त अवस्थाओं से गुजरता है। भोजन की उपलब्धता, वढ़ने के दौरान घनत्व और अन्य पर्यावरणीय कारकों के आधार पर वयस्क होने में इन्हें 10-18 दिन लग जाते हैं। फसल की लंबाई के आधार पर जेनरेशन की संख्या परिवर्तित

•वयस्क ब्राउन प्लांट होपर दोनों रूप में होते हैं, जिसके पूर्ण डैने वाले मैक्रोप्टेरस तथा कटे हुए डैने वाले ब्रेकिपेरस रूप में होते हैं। 

•मैक्रोप्टेरस संभावित प्रवासी होते हैं और नए खेतों में घर बनाने के लिए जिम्मेदार होते हैं। चावल के पौधों पर प्रवास कर लेने के बाद, वे अपने अगली पीढ़ी को जन्म देते हैं जहां लगभग सभी मादा पंख रहित होती है और नरों के पंख होते हैं।  

•वयस्क कीट उद्भव के दिन ही संभोग करते हैं और मादा कीट संभोग के दिन से ही अंडे देना आरंभ कर देती है। 

 

 

 

 

 

 

 

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