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17
Sep

चावल का आर्मीवर्म

चावल का आर्मीवर्म

1.आर्मी वर्म (स्पोडोप्टेरा मौरिटिआ) चावल का कभी-कभी अचानक होने वाला कीट है और यह मेघालय के जोवाई ज़िले की उमराइअंग घाटी, मणिपुर और त्रिपुरा की घाटी की भूमि में अत्यधिक होता है।

2. कैटरपिलर पत्तों पर भोजन करते हैं और गम्भीर प्रकोप में समूचे सीडबेड व खेत नष्ट हो जाते हैं और खेत ऐसे दिखाई देते हैं मानो जानवरों/पशुओं द्वारा चर लिये गये हों।

3. लार्वा रात में भुक्खड की तरह खाते हैं और दिन के दौरान मिट्टी की दरारों में छुप जाते हैं।

17
Sep

चावल का केसवर्म

चावल का केसवर्म

1.केस वर्म (निम्फुला डिपंक्टालिस) पूर्वोत्तर क्षेत्र के कई हिस्सों में गंभीर कीट है।

2. केस वर्म के वयस्क 6 मिमी लम्बे होते हैं और पंख का फैलाव 15 मिमी होता है। पतले हरे रंग के कैटरपिलर पत्तियों की धार को लगभग 1.25 सेमी लम्बाई में काट देते हैं जिनसे वे नलीदार खोल बनाते हैं और जिनमें वे एक पौधे से दूसरे को जाते हुए भोजन करते व तैरते हैं। गम्भीर नुकसान के समय पत्तियां ढांचेदार हो जाती हैं और रंग में सफेद दिखाई देती हैं।

17
Sep

चावल लीफ रोलर

चावल लीफ रोलर

1. लीफरोलर या लीफ फोल्डर (नेफालोक्रोसिस मेडिनालिसि) ऊंची तथा निचली भूमि के चावल का एक आम कीट है।

2. लार्वा किनारों के पत्ती की धार को लपेटकर मेसोफिल या हरे पदार्थ को खुरचकर भोजन लेता है।

3. भोजन पत्ती के उत्पादक हिस्से को कम कर देता है जो पौधे के विकास को प्रभावित करता है। उच्च प्रकोप अक्सर सफेद धब्बों के साथ खेत को एक बीमार रूप देता है।

4. यदि प्रकोप बूट पत्ता चरण तक जारी रहता है, तो यह उपज के भारी नुकसान में परिणीत होता है। पतंगे भूरे नारंगी होते हैं और सामने तथा पीछे के पंखों पर दो व एक अलग से दिखाई देने वाली लहरदार रेखाएं होती हैं।

5. पत्तों की निचली सतह पर एक अंडा दिया जाता है।

6. कुल जीवन चक्र 25-40 दिनों तक होता है। ऑफ सीजन के दौरान वैकल्पिक घास मेजबान की उपलब्धता कीट को अच्छी तरह से इस क्षेत्र में फलने-फूलने में मदद करती है।

17
Sep

चावल स्टेम बोरर (तना छेदक)

चावल स्टेम बोरर (तना छेदक)

1.स्टेम बोरर (स्कर्पोफागा इंसर्ट्यूलस) चावल का एक प्रमुख कीट है और क्षेत्र भर में फैला हुआ है। मादा कीट के पीलापन लिए भूरे चमकीले अगले पंख होते हैं उअर प्रत्येक पर एक काला धब्बा होता है तथा गुदा क्षेत्र में पीले बालों का एक गुच्छा होता है।

2. नरों के सामने के पंखों पर काले धब्बे नहीं होते हैं। अंडे बादामी रंग के बाल से ढकी पत्तियों की नोक के पास दिये जाते हैं। प्रत्येक अंडे के समूह में 20-25 अंडे होते हैं और एक मादा 3-4 ऐसे अंडों का समूह देती है।

3. ऊष्मायन अवधि 6-8 दिनों तक रहती है और नए उभरे लार्वा पत्ते की परत में घुसते हैं। वहां से वे छेद कर पौधे के नोडल क्षेत्र में घुसते हैं। लार्वा 30-40 दिनों में पूर्ण विकास तक पहुँच जाते हैं और अंतिम इंस्टार लार्वा 2 सेमी लंबाई का होता है।

4. प्यूपा (कोषस्थ कीट) काले भूरे रंग का होता है और कोषावधि 6 से 10 दिनों

मेघालय व मणिपुर के महत्वपूर्ण कीट

इस क्षेत्र में चावल की फसल को काफी नुकसान पहुंचाने वाले आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण कीड़े हैं

1. स्टेम बोरर

2. लीफ़रोलर

3. केसवर्म

4. आर्मीवर्म

5. थ्रिप्स

6. गॉल मिज

7. राइस हिस्पा

8. राइस इअर कटिंग कैटरपिलर

9. राइस ग्रीन सेमिलूपर

10. गुन्धीबग

11. रूट अफिड्स

12. हॉर्ंड कैटरपिलर

13. स्किपर

14. स्लग कैटरपिलर

मेघालय व मणिपुर के चावल में कीट

1. सभी प्रकार के पशुओं की ज्ञात प्रजातियों में से कीट दो तिहाई से अधिक होते हैं। वे लगभग सभी प्रकार के पर्यावरण में पाए जाते हैं। अगर जलवायु परिस्थितियां अनुकूल हों तो उनकी संख्या में तेजी से वृद्धि की विशाल संभावना होती है।

2. भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में कीड़े विविधता और परिमाण दोनों में अन्य सभी जानवरों से अधिक होते हैं। पूर्वोत्तर भारत की विभिन्न फसलों से 6000 से अधिक कीट नमूनों को एकत्र किया गया है और लगभग 1000 प्रजातियों की पहचान की गई (शाइलेशा व अन्य, 2006)। एक दर्जन से अधिक महत्वपूर्ण कीटों को चावल के नुकसान के कारण के रूप में दर्ज किया गया है। स्टेम बोरर, गुन्धी बग, पत्ती और पौधे के टिड्डे तथा हिस्पा सभी पूर्वोत्तर राज्यों में चावल के प्रमुख कीट के रूप में पाये गये हैं।

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