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सिंचाई जल का प्रबंधन

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सिंचाई जल का प्रबंधन

1. चूंकि सिंचाई जल के स्रोत चावल के किसानों के लिए काफी तेजी से सिकुड़ते जा रहे हैं, ऐसे में कम पानी की आवश्यकता वाली चावल किस्मों के विकास के लिए अनुसंधान कार्यक्रमों को चलाने की आवश्यकता है।

2. ऐरोबिक रास कल्चर, जो कि एक जल की कमी वाली चावल उत्पादन प्रणाली है, कुछ देशों में उपयोग में लाई जा रही है।

3. जल का अपर्याप्त प्रबंधन न केवल कई तरह से पोषक तत्त्वों की कमी उत्पन्न करता है,बल्कि मृदा लवणता/सॉडिसिटी भी उत्पन्न करता है, जो चावल की फसल को प्रभावित करने वाले आयन टॉक्सिसाइट्स (Na +, HCO3 -, Cl – तथा B इत्यादि) में परिणत हो जाते हैं।

4. ठहरे जल में टॉप ड्रेसिंग के साथ खेत से खेत में सींचाई से पानी के बहाव से नाइट्रोजन की हानि होती है।

5. कैचमेंट की प्रकृति के आधार पर सींचाई प्रायः अवशिष्ट के जरिए पोषक तत्त्वों की अच्छी स्रोत साबित होती है, यद्यपि यह ऑन साइट मृदा निम्नीकरण उत्पन्न करती है।

6. वर्षा के मौसम में गोदावरी के सींचाई-जल, जहां काफी उच्च मात्रा में गाद भरी होती है, N तथा K का अच्छा स्रोत होता है।

File Courtesy: 
DRR टेक्निकल बुलेटिन नं. 11, 2004-2005, एम. नारायण रेड्डी, आर. महेन्दर कुमार तथा बी. मिश्रा, चावल आधारित फ़सल प्रणाली हेतु स्थल-विशिष्ट समेकित पोषण प्रबंधन
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