Best Viewed in Mozilla Firefox, Google Chrome

जीनोटाइप

PrintPrintSend to friendSend to friend

जीनोटाइप

1. जीनोटाइप का विभेद राइजोस्फेयर के अम्लीकरण के लिए तथा निम्न P परिवेश में एसिड फॉस्फेट के जरिए P के निष्कर्षण में मौजूद रहता है।

2. उच्च उपज वाली किस्में (HYV) सामान्यतः पोषण अनुप्रयोग के प्रति अधिक प्रतिक्रियाशील रहती हैं। ये भी मृदा तथा पोषण के उर्वरक स्रोत, खासकर नाइट्रोजन के आपेक्षिक प्रयोग में अंतर प्रदर्शित करती हैं।

3. कम अवधि वाली प्रजातियां नाइट्रोजन जैसे तुरंत मुक्त करने काले पोषण स्रोत से अधिक पोषण का उपयोग करती हैं, जबकि देर से पकने वाली किस्में मृदा में मौजूद नाइट्रोजन का अधिक उपयोग करती हैं इसलिए उन्हें अतिरिक्त उर्वरक की आवश्यकता नहीं होती।

4. प्रतिक्रियाशीलता किस्मों में ग्रहण करने की क्षमता का उच्च होती है, जबकि दक्ष किस्मों में उच्च उपयोग दक्षता होती है तथा निम्न क्रांतिक अल्पता सामग्री होती है। जीनोटाइप विरले ही दक्षता तथा प्रतिक्रियाशीलता दोनों एक समय पर प्रदर्शित करती है।

5. रणनीति–II वाली फ़सल होने के कारण चावल फाइटोसाइडेरोफोर्स (म्युजिनीक अम्ल) का निर्माण करता है, जो उच्च भूमि में Fe+3 तथा अभाव वाली मिट्टी में Zn, Mn तथा Cu सूक्ष्म तत्त्वों को संघटित करता है।

File Courtesy: 
DRR टेक्नीक बुलेटिन नं. 11, 2004-2005, एम.नारायण रेड्डी, आर. महेन्द्र कुमार एंड बी. मिश्रा, साइट स्पेसिफिक इंटीग्रेटेड न्युट्रिएंट मैनेजमेंट फॉर सस्टेनैबल राइस बेस्ड क्रॉपिंग सिस्टम
Copy rights | Disclaimer | RKMP Policies