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मिट्टी की सुधार और औद्योगिक कचड़े

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मिट्टी की सुधार और औद्योगिक कचड़े

1. उच्च pH मान वाले सोडिक मिट्टी के लिए 10-12 टन/हे. जिप्सम के प्रयोग और 1-2 टन/हे. अम्लीय सल्फ़ेट मिट्टी के लिए प्रयोग करने से P, Zn, Ca और K जैसे अनेक पोषक तत्त्वों असर अधिक कारगर होता है।

2. स्टील उद्योग में उपलब्ध पाइराइट (FeS ) और प्राकृतिक रूप से मिलने वाले खनिजों का चूनायुक्त मिट्टी में प्रयोग करने से उसका वही असर होता है जो जिप्सम के इस्तेमाल से होता है।

3. चावल के लिए जिप्सम/पाइराइट S के भी अच्छे श्रोत होते हैं।

4. क्षारीय स्लैग का इस्तेमाल Si के श्रोत के रूप में किया जा सकता है खासकर लैटेराइट वाली उच्च भूमि और कार्बनिक मिट्टियां जिनमें Si की अपर्याप्त मात्रा होती है।

5. कोयला पर चलने वाले बिजली घरों से निकल्ने वाले फ्लाई ऐश का इस्तेमाल Si के श्रोत के रूप में किया जा सकता है लेकिन इसमें फ्लुओरीन (F), सेलेनियम (Se) और B पाए जाने के कारण समस्याएं आ सकती हैं।

6. चावल की भूसी और भूसी की राख Si के बढ़िया श्रोत हैं।

7. प्रेसमड जैसे औद्योगिक अपशिष्ट, सीवेज स्लज कैसे शहरी अपशिष्ट, गांव में मछलियों के अपशिष्ट पदार्थ, फसल के अवशेष और नारियल के छिलके फसलों के लिए खाद के रूप में पोषण के अच्छे श्रोत हैं।

File Courtesy: 
DRR टेक्निकल बुलेटिन नं. 11, 2004-2005, एम. नारायण रेड्डी, आर. महेन्दर कुमार तथा बी. मिश्रा, चावल आधारित फ़सल प्रणाली हेतु स्थल-विशिष्ट समेकित पोषण प्रबंधन
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