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फसल के अवशेष

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फसल के अवशेष

1.HYVs में बचे हुए दाने और पुआल का अनुपात 2:3 होता है, भारत में लगभग 300 मिट्रिक टन पुआल का उत्पादन होता है।

2. इसमें से आधा मवेशियों को खिलाने के चारे के रूप में किया जाता है। बाकी बचे आधे भाग को मिट्टी और पौधे के लिए उपयोगी होने के कारण रिसाइकिल किया जा सकता है।

3. अनाज के पुआल/अपशिष्ट पदार्थ में औसतन 40% C, 0.5% N, 0.1% P, 1.5% K और 5% Si पाए जाते हैं। इसप्रकार एक टन पुआल में 400 kg C, 5 kg N, 1kg P, 15 kg K और 50 kg Si होते हैं जिसकारण यह जल में घुलनशील K और Si का बेहतरीन श्रोत है।

4. चावल की मशीनी खेती में पुआल को काटकर खेत में फैला दिया जाता है फिर इसे जोतकर मिट्टी में मिला देते हैं ताकि प्रतिकूल कम तापमान के कारण टर्न अराउंड पीरियड में देर न हो।

5. पुआल को जलाने का यह नुकसान है कि इससे ऊर्जा और पोषक तत्त्वों (C, N ,S, 25% P और K) की बरबादी होती है और प्रदूषण फैलता है।

6. खेत में पुआल डालने से मिट्टी के सूक्ष्मजीवियों को ऊर्जा प्राप्त होती है और वे मिट्टी में पोषक तत्त्वों को बनाए रखने में मदद करते हैं और मिट्टी की संरचना को सही रखते हैं, साथ ही इससे मिट्टी में जैव पदार्थों की मात्रा सुधरती है और बड़ी मात्रा में K और Si की पूर्ति होती है।

File Courtesy: 
DRR टेक्नीक बुलेटिन नं. 11, 2004-2005, एम.नारायण रेड्डी, आर. महेन्द्र कुमार एंड बी. मिश्रा, साइट स्पेसिफिक इंटीग्रेटेड न्युट्रिएंट मैनेजमेंट फॉर सस्टेनैबल राइस बेस्ड क्रॉपिंग सिस्टम
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