Best Viewed in Mozilla Firefox, Google Chrome

फसल प्रणाली/फसल चक्रण

PrintPrintSend to friendSend to friend

फसल प्रणाली/फसल चक्रण

1. पोषक तत्त्वों के कुशल प्रयोग की दृष्टि से फसल प्रणाली/फसल चक्रण महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं क्योंकि अलग-अलग फसलों के लिए पोषण की जरूरत अलग-अलग होती है और साथ ही फसलों की मिट्टी से पोषक तत्वों के अवशोषण की क्षमता भी समान नहीं होती।

2. चावल-चावल प्रणाली(अवायुजीवी-अवायुजीवी) को फिनॉल से भरपूर कठिनाई से अपघटित होने वाले कार्बनिक पदार्थ के निर्माण के लिए जाना जाता है और इस प्रक्रिया में ढेरों नाइट्रोजन बन्द रहता है।

3. चावल-गेहूं ( अवायुजीवी-वायुजीवी) प्रणाली, जिसमें आंशिक रूप से वायुजीवी चरण शामिल रहता है, SOM की हानि के लिए जिम्मेदार होती है।

4. चावल-दलहन प्रणाली पोषण की अभिवृद्धि खासकर N की अभिवृद्धि के लिहाज से अधिक आदर्श होता है।

5. वेरिसोल और बलुई मिट्टी को छोड़कर कुछ संरचनात्मक वर्गों में एक निश्चित गहराई तक बार-बार जुताई होते रहने के कारण उप-मृदा पटल के निर्माण के कारण जड़ों के मिट्टी में गहराई तक जाने और उनके द्वार पोषण के पूर्ण अवशोषण में रुकावट आती है।

6. किसी एक फसल की बजाए संपूर्ण फसल प्रणाली के अनुसार पोषण आवश्यकता की योजना बनाने से N और P जैसे उर्वरकों की अनावश्यक मात्रा के इस्तेमाल से बचा जा सकता है।

File Courtesy: 
DRR टेक्नीक बुलेटिन नं. 11, 2004-2005, एम.नारायण रेड्डी, आर. महेन्द्र कुमार एंड बी. मिश्रा, साइट स्पेसिफिक इंटीग्रेटेड न्युट्रिएंट मैनेजमेंट फॉर सस्टेनैबल राइस बेस्ड क्रॉपिंग सिस्टम
Copy rights | Disclaimer | RKMP Policies