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नील-हरित शैवाल - Blue Green Algae

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नील-हरित शैवाल

1. नील-हरित शैवाल(BGA)/साइनोबैक्टीरिया मुक्त रूप से जीने वाले, प्रकाशसंश्लेषी, N-स्थिरीकारक प्रोकैरियोटिक शैवाल होते हैं जो धान के खेतों में सर्वत्र पाए जाते हैं।

2. नील-हरित शैवाल की N-स्थिरीकारी क्षमता उदासीन और क्षारीय मिट्टियों में बेहतर होती है। उन्हें पर्याप्त प्रकाश, जल (5-10 सेमी उपयुक्त रहता है) और P द्वारा कुछ हद तक क्षारीय मिट्टी को रिक्लेम भी किया जा सकता है।

3. चावल के पौधों के लिए नील-हरित शैवाल का नाइट्रोजन इसके विघटन के बाद उपलब्ध होता है। विघटन के 3-4 सप्ताह बाद नील-हरित शैवाल का 20-50% मुक्त नाइट्रोजन चावल के पौधों द्वारा रिकवर किया जाता है।

4. एपिफाइटिक BGA नाइट्रोजन का एक अच्छा श्रोत है- खासकर गहरे जल में अधिक दिनों तक रहने वाले धान के पौधों के लिए।

5. खरीफ के बादल वाले मौसम की तुलना में रबी का मौसम शैवाल की वृद्धि और उनकी N-स्थिरीकरण क्षमता के लिए उपयुक्त होता है।

6. N @ 30kg N ha-1/ in के अलावा शैवालीय संचारण (10 kg ha-1) से चावल की उपज में 10 – 15% की वृद्धि होती है।

File Courtesy: 
DRR टेक्नीक बुलेटिन नं. 11, 2004-2005, एम.नारायण रेड्डी, आर. महेन्द्र कुमार एंड बी. मिश्रा, साइट स्पेसिफिक इंटीग्रेटेड न्युट्रिएंट मैनेजमेंट फॉर सस्टेनैबल राइस बेस्ड क्रॉपिंग सिस्टम
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