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हरित खाद

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हरित खाद

1. हरित खाद(GM) का प्रयोग 6 m/ हे. किया जाता है जबकि आवश्यकता 25 m/ हे. की होती है।

2. हरे पत्तों की खाद आर्थिक रूप से व्यवहार्य नहीं है क्योंकि पत्तों को जमा करने में काफी अधिक मजदूरी व्यय करना होता है और फिर पत्तों की भी कमी रहती है।

3. मूलतः हरित खाद के लिए उगाई जाने वाली फसलें 45 दिनों के में पर्याप्त बायोमास उपलब्ध कराती हैं।

4. इन्हें दो बार उगाया जा सकता है- आंध्र प्रदेश के कमांड एरिया में खरीफ से पहले(गर्मी-बरसात के बीच के दिनों में) और इंडो-गंगा प्रदेशों में गेहूं की फसल के बाद गर्मियों में (ट्यूबवेल सिंचित क्षेत्र)

5. हरित खाद वाली फसलों को खरीफ और रबी मौसमों के बीच नहीं उगाना चाहिए क्योंकि इस दौरान तापमान अनुकूल नहीं होता और साथ ही उनका अपघटन भी ठीक से नहीं होता।

6. घास भूमि वाली मिट्टियों के लिए ढैंचा और बरसीम उपयुक्त होता है। जल जमाव वाली मिट्टियों (वर्षा वाली निम्नभूमि) के लिए सेसबैनिया रोस्ट्रैटा उपयुक्त होता है।

File Courtesy: 
DRR टेक्नीक बुलेटिन नं. 11, 2004-2005, एम.नारायण रेड्डी, आर. महेन्द्र कुमार एंड बी. मिश्रा, साइट स्पेसिफिक इंटीग्रेटेड न्युट्रिएंट मैनेजमेंट फॉर सस्टेनैबल राइस बेस्ड क्रॉपिंग सिस्टम
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