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अजैविक/रासायनिक ऊर्वरक

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अजैविक/रासायनिक ऊर्वरक

1. बाहर से दिए जाने वाले पोषण का ऊर्वरक मुख्य श्रोत है। करीब 16 मिट्रिक टन NPK का इस्तेमाल किया जाता है जिसका 40% चावल की खेती में प्रयुक्त होता है।

2. NPK ऊर्वरकों का असंतुलित इस्तेमाल (4:2:1 की बजाए 9.5:2.7:1) एक आम बात है।

3. नाइट्रोजन के कारण होने वाली भूमि उर्वरता के असंतुलन के कारण मिट्टी में Zn, S, Mn और Cu की कमी होती है।

4. चावल की फसल में NPK उर्वरकों के मुख्य श्रोत इस प्रकार हैं: DAP- बेसल डोज के रूप में, यूरिया- टॉप ड्रेसिंग के रूप में और साथ ही जिंक सल्फ़ेट।

5. सही पोषण प्रबंधन की कमी का कारण है मिट्टी के गुणों तथा फसल की पोषकीय आवश्यकता के आधार पर ऊर्वरक की मात्रा का निर्धारण नहीं किया जाना।

6. सही समय पर ऊर्वरक का इस्तेमाल नहीं करने और जरूरत से ज्यदा ऊर्वरक डालने के कारण जल बहाव के साथ, जमीन में रिसकर, उड़कर और डिनाइट्रीफिकेशन आदि के कारण ऊर्वरक बरबाद चला जाता है और इसके अलावा इससे पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचता है।

File Courtesy: 
DRR टेक्नीक बुलेटिन नं. 11, 2004-2005, एम.नारायण रेड्डी, आर. महेन्द्र कुमार एंड बी. मिश्रा, साइट स्पेसिफिक इंटीग्रेटेड न्युट्रिएंट मैनेजमेंट फॉर सस्टेनैबल राइस बेस्ड क्रॉपिंग सिस्टम
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