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दानों का मलिनीकरण

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दानों का मलिनीकरण

1. ऊंची भूमि तथा तराई दोनों में चावल की कुछ किस्मों में उसका रंग फीका पडना एक प्रमुख समस्या बनती जा रही है। यह अंकुरण कम कर देता है, कोपलों के क्षय का कारण बनता है, भोसीदार दाने उत्पन्न करता है और अनाज की खपत की गुणवत्ता कम करता है।

2. विकार अलग - अलग दानों तक सीमित रह सकता है, लेकिन गंभीर मामलों में रेशिस सहित लगभग पूरा पैनिकल फीका पड़ जाता है।

3. ड्रेक्स्लेरा ऑरिज़ी, फुज़ेरिअम एसपी, निग्रोस्पोरा ऑरिज़ी, पैनिसिलम एसपी, कर्वुलेरिआ एसपी, सैरोक्लैडिअम ऑरिज़ी तथा र्हाइज़ोफस एसपी दाने फीके पडने से जुडे हैं।

नाइट्रोजन उर्वरकों की भारी मात्रा दानों के मलिनकिरण में वृद्धि करती है। दानों के मलिनीकरण को इनके द्वारा नियंत्रित किया जा सकता है

  • पैनिकल के उद्भव के समय 0.1% कार्बेंडिज़्म का छिड़काव
  • साफ़ खेती
  • प्रतिरोधी किस्में लगाना
File Courtesy: 
ICAR NEH, Umiam
Image Courtesy: 
Mr.Chaitanya, DRR
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