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आवरण की सडन

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आवरण की सडन

पहले इस रोग को मामूली बीमारी के रूप में माना जाता था, लेकिन अब यह पूर्वोत्तर क्षेत्र के चावल उगाने के कई क्षेत्रों में एक प्रमुख रूप में प्रकट होता है। पैनिकल्स को ढकने वाले पत्ते के आवरण पर भूरे रंग के अनियमित मार्जिन के रूप में धब्बे विकसित होते हैं। युवा पैनिकल पत्ते के आवरण में ही रहते हैं या केवल आंशिक रूप से उभरते हैं। दाने बगैर भरे हुए या बदरंग होते हैं। गंभीर मामलों में पैनिकल सड़ सकते हैं।

यह रोग ऎक्रोसिलिंड्रिअम ऑरिज़ी की वजह से होता है। रोगज़नक़ कॉनिडिआ उत्पन्न करता है, जो हाइअलाइन होते हैं, एकल कोशिका के तथा बेलनाकार होते हैं।

फंगस संक्रमित पौधे के मलबे में जीवित रहता है और फसल के मौसम के दौरान पौधे को संक्रमित करता है। संक्रमित पौधों पर उत्पन्न कॉनिंडिआ हवा से फैलता है और द्वितीयक संक्रमण फैलाता है। गर्म आर्द्र मौसम, रोग के विकास मंक मदद करता है।

इस रोग के नियंत्रण के उपायों में शामिल हैं:

  • पौधों के संक्रमित मलबे को जलाकर नष्ट करना
  • 0.2% डाइथेन एम-45 या डाइथेन ज़ेड-78 का छिड़काव
File Courtesy: 
ICAR NEH, Umiam
Image Courtesy: 
Dr. Krishnaveni, DRR
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