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आवरण कुम्हलाना

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यह रोग वर्तमान में पूर्वोत्तर क्षेत्र में बहुत गंभीर हो गया है। यह रोग ज्यादातर पत्ती के आवरण पर धब्बे या घाव उत्पन्न करता है, जो अनुकूल परिस्थितियों के तहत पत्तियों की धार तक होते हैं। घाव लम्बे होते हैं, और भूरे सफेद केंद्र तथा भूरे लाल या बैंगनी लाल मार्जिन के साथ आयताकार होते हैं। उन्नत चरणों में घावों में स्क्लेरोशिआ बनते हैं, जो आसानी से अलग हो जाते हैं। गंभीर मामलों में, पौधे के सभी पत्ते कुम्हला जाते हैं जिसके परिणामस्वरूप पौधे की मृत्यु हो जाती है। यह एक मिट्टी जनित रोग है।

यह रोग र्हाइज़ोक्टोनिआ सोलानी की वजह से होता है। फंगस स्क्लेरोशिआ उत्पन्न करता है, जो गहरे भूरे से लेकर भूरे, गोलाकार और व्यास में 4-5 मिमी के होते हैं। फंगस के स्क्लेरोशिआ कई महीनों तक मिट्टी में जीवित रहते हैं और भूमि की तैयारी के दौरान पानी की सतह पर तैरते हैं। स्क्लेरोशिआ पौधों को संक्रमित करते हैं और माइसेलियम उत्पन्न करते हैं जिनसे धब्बे या घाव होते हैं। यह रोग उच्च आर्द्रता और गर्म तापमान में विनाशकारी है। पास-पास में रोपण और भारी मात्रा में नाइट्रोजन निषेचन इस रोग की घटनाओं में वृद्धि करता है।

इस रोग के नियंत्रण के उपायों में शामिल हैं:

  • प्रतिरोधी किस्में लगाना
  • खेतों से पानी की निकासी  
  • 0.1% गीले सेरासन से मिट्टी को गीला करना

बीज उपचार के रूप में स्यूडोमोनास फ्लोरेसेंट्स (600 ग्राम/हेक्टेयर) के अनुप्रयोग के बाद मिट्टी में (2.5 किलोग्राम/हेक्टेयर) अनुप्रयोग।

File Courtesy: 
ICAR NEH, Umiam
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