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प्रजाति का नाम : श्यामला (आइईटी 12561, आर 259- डबल्यूआर 37-2)

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1. उत्पत्ति - आर 60-2713 × आर 238-6  

2. परिपक्वता – 130-135 दिन

3. अनाज का प्रजाति - लंबा महीन अनाज

4. जैविक तनाव - इस प्रजाति ने, अन्य बैंगनी पत्ती की  प्रजातियों (क्रॉस 51 एवं नागकेसर) की तुलना में, प्रमुख कीट एवं रोगों के लिए उच्च प्रतिक्रिया से बेहतर दिखाई है।

5. अजैविक तनाव - अन्य बैंगनी पत्ती की किस्मों की तुलना में सूखा के प्रति बेहतर सहनशीलता।

6. सिफ़ारिश किए गए क्षेत्र/स्थान - राज्य के सभी उपजाउ क्षेत्र जहाँ जंगली धान एक समस्या है, उनके लिए सिफ़ारिश की गई है। उस क्षेत्र में जो कि छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उड़ीसा, महाराष्ट्र एवं बिहार के हिस्सों सहित, धान की फसल का मूल माध्यमिक केन्द्र माना जाता है, वहाँ जंगली चावल की फसल की समस्या, जो कि सबसे गंभीर है, उस पर नियंत्रण पाने के लिए इस प्रजाति की सिफ़ारिश की गई है। 

7. अभिग्रहण के क्षेत्र - विशेष रूप से छत्तीसगढ़ मैदानों के जंगली चावल के प्रभावित क्षेत्रों में खेती के लिए सिफारिश की गई है। बैस्टर एवं सरगुजा क्षेत्रों में बियासी या चरण बुवाई प्रणाली, सिंचित एवं वर्षा पूरित तराई पर्यावरण प्रणालियों के अंतर्गत अपनाई गई है।

8. विशेष गुण – 1. यह प्रजाति नर्सरी एवं क्षेत्र में फसल के आरंभिक विकास चरण में जंगली धान पौधों की पहचान करने में मदद करती है।

2. इस प्रजाति में अच्छी हेड राइस रिकवरी प्रतिशत के सहित लंबा महीन अनाज होता है।

9. औसत उपज – 35-40 क्विंटल/हेक्टेयर

10. द्वारा विकसित – पी.एस.श्रीवास्तव, आर.डी.तिवारी, एम.एन.श्रीवास्तव, बी.पी.चौधरी, आर.के.साहू, वी.एन.साहू, ए.के.सरावगी, डी.के.शर्मा, के.सी.अग्रवाल, बी.सी.शुक्ला।

 

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