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प्रजाति का नाम : दुर्गेश्वरी (आर 1243-1224-578-1, आइईटी 19795)

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1. उत्पत्ति - महामाया × एनएसएन 5 (एमटीसी - 4, आइईटी 11904)

2. परिपक्वता – 130-135 दिन

3. अनाज का प्रजाति - लंबा पतला अनाज

4. जैविक तनाव – 1. लीफ़ ब्लास्ट के लिए प्रतिरोधी।

2.   शीथ ब्लाइट, बॅक्टेरियल ब्लाइट, शीथ रॉट, गॉल मिज एवं राइस टुन्ग्रो के लिए मध्यम प्रतिरोधी/सहनशील।

5. सिफ़ारिश किए गए क्षेत्र/स्थान - इस प्रजाति की शारीरिक स्तर पर, सूखे के प्रति बेहतर सहनशीलता है।

6. अभिग्रहण के क्षेत्र - भारत के पूर्वी क्षेत्रों, छत्तीसगढ़, उड़ीसा एवं बिहार के लिए सिफ़ारिश की गई है।

7. विशेष गुण - छत्तीसगढ़, उड़ीसा एवं बिहार के सिंचित क्षेत्र।

  मध्यम से गाढी बनावट वाली मिट्टी के वर्षा पूरित क्षेत्र (डोर्सा एवं कन्हार) छत्तीसगढ़।

8. औसत उपज – दुर्गेश्वरी प्रजाति (आइईटी 19795) में लंबा पतला अनाज, बेहतर हेड राइस रिकवरी (55%), मध्यवर्ती ऍमोलीस सामग्री (24.62%) होता है। इसकी जेल स्थिरता मध्यम (63 मि.मी.) है बेहतर एवं मध्यवर्ती ऐलकेली फैलने का मूल्य (4.0) है एवं साथ ही निर्यात गुणवत्ता 50-55 क्विंटल/ हेक्टेयर है, इसलिए यह बेहतर पकता है।. 

9. द्वारा विकसित - डॉ. ए.के.सरावगी, रवींद्र कुमार वर्मा, दीपक शर्मा, वी.एस.त्रिमूर्ति, संजय शर्मा, एन.पांडे, एस.बी.वेरुळकर, एन.के.मोतीरमानी, डी.जे.शर्मा, संतोष सिन्हा, जी.आर.साहू, एवं एलिस टिर्की। 

 

 

 

 

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