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Rice Hispa राइस हिस्पा

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1. राइस हिस्पा (Dicladispa armigera) एक नीले-काले रंग का बीटल है

जो स्पाइन से ढका होता है। लार्वा द्वारा पत्तों में लंबे सुरंग बनाए जाते हैं जबकि वयस्क पत्तियों से क्लोरोफिल खुरच कर हटा दिया जाता है।   

2. प्रभावित पत्तियां सफेद जालीदार हो जाती हैं और आखिरकार सूख जाती हैं। पत्र फलक की ऊपरी सतह के खुरच जाने से निचला एपिडर्मिस सफेद लकीर की तरह हो जाता है और यह मध्यशिरा के समांतर होता है। 

3. पत्ते के ऊतक से होकर लार्वा द्वारा सुरंग बना देने से अनियमित अर्धपारदर्शी धब्बे बनते हैं जो पत्रशिरा के समांतर होते हैं। क्षतिग्रस्त पत्ते मुरझा जाते हैं और इनकी सफेदी से धान का खेत सफेद दिखने लगता है। अधिक गंभीर प्रकोप होने पर फसल जला हुई दिखने लगती है।  

4. क्षति की गंभीरता का संबंध इस तथ्य से है कि पौधे की किस अवस्था में इस कीट का आक्रमण हुआ है। लार्वा पत्रावरण के बीच से होकर नीचे उतरता है और कक्षीय या पार्श्व कलिका तक पहुंचता है।

5. वे कलिका के ऊतक को विदीर्ण कर देते हैं और प्यूपा की अवस्था तक उसे खाते हैं। हिस्पा का प्रकोप असम, मेघालय और बांगलादेश से सटे त्रिपुरा के इलाकों में अत्यंत गंभीर होता है। 1987 में मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में राइस हिस्पा का गंभीर प्रकोप हुआ था।

6. हिस्पा के निदान के रूप में  Beauveria bassiana@3 ग्राम/लि. की दर से छिड़काव किया जा सकता है। 

 

 

File Courtesy: 
ICAR NEH,उमियम
Image Courtesy: 
CRRI
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