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पत्ते का जलने का दाग

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1. उत्तर-पूर्व के सभी राज्यों में फसल के वयस्क अवस्था में यह रोग

पाया जाता है। पत्ते के ऊपरी भाग पर इसका प्रारूपी लक्षण प्रकट होता है। क्षति शीर्ष अथवा किनारे से आरंभ होती है और गहरे भूरे अथवा हल्के पीले क्षेत्रों के रूप में दीर्घाकार हो जाती है। 

2. यह रोग Rhynchosporium oryzae के कारण होता है। रोगानु से कोनीडिया का निर्माण होता है जो hyaline, 2-सेलों वाला और शीर्ष सेल पर असमान लघु पार्ष्व चोंच होता है। 

रोग का प्रबन्धन निम्नलिखित उपायों द्वारा किया जा सकता है-  

 पोटाश की ऊंची मात्रा का प्रयोग कर (80 kg ~O/हेक्टेयर) 

 प्रतिरोधी प्रजातियों की खेती कर  

 रोग दिखाई पड़ने के बाद 15 दिनों के अंतराल पर 0.1 % Carbendazim और 0.1 % Thiophanate-methyl का 3 बार छिड़काव करने से प्रबन्धन में मदद मिलती है। 

 

 

File Courtesy: 
ICAR NEH, Umiam
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