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समेकित पीड़क/रोग प्रबंधन में पोषण प्रबंधन रणनीति की संभावना

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1. यद्यपि प्रतिरोध/सहनशीलता का नियंत्रण जीन के जरिए होता है, उनकी अभिव्यक्ति कई सारे पर्यावरणीय कारकों (पारिस्थितिक प्रतिरोध) के जरिए प्रभावित होती है।  

2. पोषक पौधे की वृद्धि तथा आकार जो पौधे की पोषण स्थिति/पोषण गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं, ऐसे ही कुछ पर्यावरणीय कारक है। हालांकि इसका प्रबंधन संवेदनशील होता है।   

3. नियम के अनुसार पौधे के प्रतिरोध पर खनिज पोषण का प्रभाव उच्च प्रतिरोधक तथा उच्च संवेदनशील किस्मों पर काफी कम होता है, पर यह प्रभाव मध्यम रूप से संवेदनशील/प्रतिरोधक किस्मों (फील्ड प्रतिरोध) पर काफी अधिक होता है।  

4. उदाहरण के लिए K उर्वरक TN -1 की ब्राउन लीफ स्पॉट के प्रति संवेदनशीलता पर कोई असर नहीं दिखाता, पर यह मध्यम रूप से संवेदनशील किस्म IR-8 पर रोग की संभावना को कम करता है।  

5. खेतों में मध्यम रूप से सहनशील/संवेदनशील चावल के व्यापक प्रयोग तथा खासकर  N तथा K उर्वरकों के असंतुलित उपयोग ( N का अत्यधिक तथा अपर्याप्त K) को देखते हुए, उर्वरकों के जरिए पोषक तत्त्वों का संतुलित तथा विवेकपूर्ण इस्तेमाल किसानों के स्तर पर पीड़कों तथा रोगों के हमले द्वारा फ़सल हानि को न्यूनतम करने का एक प्रभावी प्रबंधन है।      

 

 

File Courtesy: 
DRR टेक्निकल बुलेटिन नं. 11, 2004-2005, एम. नारायण रेड्डी, आर. महेन्दर कुमार तथा बी. मिश्रा, चावल आधारित फ़सल प्रणाली हेतु स्थल-विशिष्ट समेकित पोषण प्रबंधन
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