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1. फ़सल अंकुरण पर लवण दाब का प्रभाव

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1. खारेपन की स्थिति में बीजों का अंकुरण तीन तरीके से प्रभावित होता है। 

2. मृदा घोल का परासरण में वृद्धि से बीजों में जल का अवशोषण तथा प्रवेश पर रोग लगती है। 

3. कुछ लवण घटक भ्रूण तथा बिचड़ों के लिए विषैले होते हैं। CO3, NO3, Cl-, SO4 जैसे एनायन बीज के अंकुरण के लिए अधिक हानिकारक होते हैं। 

4. लवण दाब से संचित सामग्रियों के मेटाबॉलिज्म बाधित होता है। प्रोटीएज एंजाइम बीज में घुलनशील प्रोटीन को घुलनशील नाइट्रोजन में उत्प्रेरित करता है, जो लवणता द्वारा बाधित होता है।   

5. a – एमाइलेज की गतिविधि पर काफी रोक लग काती है। अतः स्टार्च से शर्करा के रूपांतरण भी बाधित होता है। लवणता से न्युक्लिक अम्ल तथा RNAase के निर्माण में विलम्ब होता है।  

6. लवणता के कारण ग्लायोक्सीसोमल केटालेज तथा मैलेट सिंथेज एवं आइसोसाइट्रेज पर रोक लगता है, जिसके कारण ग्लिसराइड्स में कमी होती है और तिलहन के दानों में अधिक वसा अम्ल जमा होता है। 

 

File Courtesy: 
TNRRI,अदुथुरई
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