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स्टेम बोरर द्वारा होने वाली क्षति की प्रकृति

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1. बोरर का लार्वा टिलर में प्रवेश कर खाता है, वृद्धि करता है और इसके कारण फसल के चरण के आधार पर ‘मृत बीज के दाने’ अथवा ‘सफेद बाली’ का लक्षण प्रकट होता है। 

2. टिलरिंग के चरण में, कीटों द्वारा पौधों को बार-बार खाने के परिणामस्वरूप पौधों के आधार से शीर्ष के भाग कट कर अलग हो जाते हैं।  

3. पत्ते का केन्द्रीय छल्ला नहीं मुड़ता, भूरे रंगा का हो जाता है और सूख जाता है जबकि नीचे के पत्ते हरे और स्वस्थ्य रहते हैं। यह स्थिति ‘मृत बीज दाना’ कहलाता है। प्रभावित टिलर  में पुष्प-गुच्छ लगने से पहले यह सूख जाता है। 

4. पुष्प-गुच्छ के दौरान, वृद्धि कर रहे भाग आधार से कट कर अलग हो जाते हैं जिसके परिणामस्वरूप पुष्प-गुच्छ सूख जाता है। पुष्प-गुच्छ दुबारा नहीं उग पाता और वे जो पहले से उगे हैं उनमें दाने नहीं बन पाते। 

5. खाली पुष्प-गुच्छ खेत में बिल्कुल स्पष्ट हो जाते हैं अर्थात् वे सफेद और सीधे रहते हैं।

 

 

File Courtesy: 
IPM –NCIPM निबंध
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