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रूट एफिड्स

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रूट एफिड्स

1.रूट एफिड्स (र्होपालोसिफम रुफिएब्डोमाल्स एवं टेट्रान्यूरा निग्रिएब्डोमिनालिस) भारत में पहली बार दर्ज किये गये हैं, जो पूरे क्षेत्र में ऊंची भूमि की स्थितियों में चावल की फसल को गम्भीर क्षति पहुंचाते हैं (स्बाइलेशा व अन्य, 2006)।

2. रूट एफिड्स की दो प्रजातियां अर्थात काली जड के एफिड्स (र्होपालोसिफम रुफिएब्डोमाल्स) एवं भूरी गड के एफ्रिड (टेट्रान्यूरा निग्रिएब्डोमिनालिस) ऊंची भूमि के चावल की जड़ों हमला करते हैं।

3. भूरी जड़ के एफ्रिड काले एफ्रिड की तुलना में अधिक नुकसान करते हैं। संक्रमण 48 दिनों पर आरम्भ होता है और आक्रमणकारी युवा 83 दिनों तक बढना जारी रखते हैं जिसके बाद 90 दिनों पर इनका घटना शुरु हो जाता है।

4. रस चूसकर एफिड्स जड़ों के ऊपरी और मध्यम भागों के आसपास कालोनियों के रूप में भोजन लेते हैं। संक्रमित पौधों की पत्तियां पीली पड जाती हैं, मुड जाती हैं और पौधे के अवरुद्ध विकास का कारण बनती हैं। संक्रमण टिलर्स की संख्या को कम कर देता है जिसके परिणामस्वरूप उपज कम हो जाती है।

File Courtesy: 
ICAR NEH, Umiam
Image Courtesy: 
CRRI
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