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चावल का गॉल मिज

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चावल का गॉल मिज

1. गॉल मिज (ऑर्सेओलिआ ऑरिज़ी) मणिपुर में एक गंभीर कीट है और यह पूरे क्षेत्र में भी एक आम कीट के रूप में होता है।

2. यह चावल के पौधे के टिलरिंग चरण के दौरान तराई की और ऊंची भूमि, दोनों स्थितियों में पाया जाता है। इसके. असम में गहरे पानी के चावल में होने की सूचना भी दी गई है।

3. इसकी जनसंख्या का घनत्व मुख्य रूप से बादलयुक्त या बरसाती मौसम, उच्च टिलरिंग किस्मों की खेती, सघन प्रबन्धन प्रथाओं तथा कम परजीवीकरण से प्रभावित होता है।

4. वयस्क निशाचर होते हैं और उन्हें प्रकाश जाल का उपयोग कर आसानी से एकत्र किया जा सकता है। वे उद्भव के बाद जल्द ही प्रजनन करते हैं। प्रत्येक मादा मिज केवल एक बार प्रजनन करती है। यह 4 दिन के जीवनकाल में 100-200 अंडे तक दे सकती है।

5. नर मिज उद्भव के बाद 12-18 घंटे के लिए जीवित रहता है। लार्वा और प्यूपा का विकास गॉल के अंदर पूरा हो जाता है। एक कीड़ा एक टिलर पर रहता है। 14-20 दिनों में लार्वा के तीन से चार चरण देखे जाते हैं। प्यूपेशन में 2-7 दिन लगते हैं। वयस्क के उद्भव से पहले, गॉल के शीर्ष पर पहुंचने के लिए प्यूपा उसके पेट के स्पाइन का उपयोग करता है।

6. भोजन की वज़ह से ‘सिल्वर’ या ‘अनिअन’ नामक गॉल बनता है। यह वयस्क के उद्भव के लिए निकास के छेद बनाता है। शुष्क मौसम के दौरान, कीट वैकल्पिक मेजबान की निष्क्रिय कलियों में एक कोषस्थ कीट के रूप में निष्क्रिय रहता है।

7. सामान्य परिस्थितियों में चावल का गॉल मिज छः हाइमन पैरासिटॉइड्स जैसे कि टेट्रास्टिकस एसपी., सेराटोसोलेन एसपी., एनेरिस्टस सीरोप्लास्टेट, कोकोफैगस एसपी., सी. शिर्कि, मेटाफाइअर्स एसपी. द्वारा परजीवीकृत होता है और कीट को 50% सीमा तक नियंत्रित करता है।

File Courtesy: 
ICAR NEH, Umiam
Image Courtesy: 
CRRI
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