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क्लोरोटिक स्ट्रीक

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क्लोरोटिक स्ट्रीक सर्वप्रथम भारत में कटक में 1978 (अंजनेयुलु तथा अन्य,1980) में देखा गया।

1. इसके लक्षण हैं वृद्धि का बाधित होना, धारियों का निर्माण या नई पत्तियों की मॉट्लिंग तथा क्लोरोटिक स्ट्रीकिंग।

2. शूकियों का रंग फीका पड़ जाता है तथा ये अनुर्वर हो जाती हैं।

File Courtesy: 
“राइस”- लेखक जटा एस. नंदा तथा पवन के. अग्रवाल 2006 कल्यानी प्रकाशन. पृष्ठ संख्या.216.
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