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राइस येलो मॉट्ल वायरस (RYMV)

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1. राइस येलो मॉट्ल वायरस का आकृति-विज्ञान  

2. प्रयोगशाला वाली दशाओं में यह वायरस स्थायी होता है तथा उनका शुद्धीकरण आसान हो जाती है (बेकर,1970, 1974)। बेहतरीन शुद्धता के लिए संक्रमण के 10-12 दिनों बाद ताजा या गहरे-शीतित नव चावल पत्तियों की कटाई उत्तम मानी जाती है।   

3. छोटे टुकड़े को 0.1 M फॉस्फेट बफर pH 5.0 + 0.2% 2-मर्कैप्टोइथेनॉल (1 g पत्तियां /20 ml बफर) में समांगीकृत किया जाता है। कपड़े से निचोड़ा जाता है। क्लोरोफॉर्म (5 मिनट) के साथ एमल्सीकृत किया जाता है तथा कम रफ्तार में अपकेंद्रित किया जाता है। 

4. प्रत्येक 100 मि.ली जलीय फेज में 20 g (NH4)2SO4 मिलाया जाता है तथा उसे हिलोड़ने के दौरान कम रफ्तार से अपकेंद्रित किया जाता है। इस प्रक्रिया को सुपरनैटेंट द्रव के साथ दुहराया जाता है पर इस बार पेलेट को कम रफ्तार के अपकेंद्रण पर रखा जाता है।  

5. उन्हें पुनः बफर pH 5.0 की अल्प मात्रा में नीलंबित करें तथा उसी बफर में डायलीकृत किया जाता है। डिफ्रेंशियल सेंट्रिफ्युगेशन (6600 g पर 20 मि. 78,500 g पर 100 मि. ). के एक चक्र द्वारा क्लेरिफाय किया जाता है। 

6. सेडिमेंट को 0.01 M फॉस्फेट बफर pH 7.0 में उच्च रफ्तार से अपकेंद्रण किया जाता है। उसी बफर में डायलीकृत किया जाता है तथा कम रफ्तार में (NH4)2SO4 के साथ वायरस के अवक्षेपण के दौरान तथा  तथा प्रथम डायलिसिस के दौरान कमरे के तापमान पर कार्य करें, अन्यथा 4 डिग्री सें. पर कार्य करें। यील्ड  1 mg वायरस/g पत्तियां मिलेगी। 

 

File Courtesy: 
http://www.dpvweb.net/dpv/showdpv.php?dpvno=149
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