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Stage 2 - Tillering of rice plant अवस्था 2- चावल के पौधे की टिलरिंग (कल्ले फूटना)

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1. यह अवस्था प्रथम टिलर (कल्ले) के निकलने से लेकर उनकी अधिकतम संख्या में हो जाने तक रहती है।
2. ये टिलर मुख्य तने के पर्व की अनुषंगी कलिकाओं अथवा अन्य टिलरों से हैं।
3. यह बिड़वा मुख्य मुख्य नाल और इसके पत्तों के सापेक्ष दो प्राथमिक टिलरों की स्थिति को दर्शाता है।
4. जब मुख्य नाल पर पांचवी पत्ती निकलती है तब नाल की दूसरी पत्ती के कक्ष से पहला कल्ला (टिलर) फूटता है।इसी तरह जब मुख्य नाल पर छठी पत्ती निकलती है तब नाल की तीसरी पत्ती के कक्ष से कल्ले की पहली पत्ती निकलती है। इसप्रकार, मुख्य नाल की n th पत्ती और (n-3) पत्ती के कक्ष से कल्ले की पहली पत्ती का निकलना सभी अन्य टिलर पर लागू होता है।
5. प्राथमिक कल्ले के निकलने के बाद उसीसे दूसरा कल्ला फूटता है। यह प्रतिरोपण के 30 दिनों के बाद होता है।
6. अब पौधे की ऊंचाई बढ़ने लगती है और उसमें सक्रिय रूप से कल्ले फ़ूटने लगते हैं। पत्तों की संख्या बढ़ने और कल्लों के विकास के साथ कल्लों की साइज और पौधे के चंदोवे के विकास को नोट करें।
7. इसके अलावा, पौधे के लंबे और बड़े होते जाने से अनेक प्राथमिक और द्वितीयक कल्ले, द्वितीयक कल्ले से नए तृतीयक कल्ले फूटते हैं। इस अवस्था तक कल्लों की संख्या इतनी बढ़ जाती है कि मुख्य तने को पहचानना मुश्किल होता है। पौधे के अगली स्थिति में प्रवेश करने अर्थात तने के लंबे होते जाने से कल्ले लगातार बढ़ते जाते हैं।

File Courtesy: 
RARS, करजत
Image Courtesy: 
RARS, करजत
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