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खर-पतवारनाशी प्रतिरोध तथा जीनरूपांतरित फ़सल

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• एक ही खर-पतवारनाशी के लगातार इस्तेमाल से खर-पतवार उस खर-पतवारनाशी के प्रति सहनशील हो जाते हैं या उन्हीं के बीच ऐसी प्रजाति विकसित हो जाती है, जो उस खर-पतवारनाशी के प्रति प्रतिरोधी होते हैं। कोरिया में वार्षिक खर-पतवार जैसे Echinochloa crusgalli तथाMonochoria vaginalis, एवं सदाबहार जैसे Sagittaria trifolia, Sagittaria pygmaea, Eleocharis kuroguwai, Cyperus serotinus एवं Potamogeton distinctus, चावल के खेतों में उगने वाले सर्वाधिक महत्वपूर्ण खर-पतवार प्रजातियां मानी जाती हैं। 

• अब सदाबहार खर-पतवार 19% (1971) से बढ़कर 54% (1981) तथा 60% (1990) तक जा पहुंचा है। E. kuroguwai तथा S. trifolia मौजूदा खर-पतवारनाशी के प्रति काफी सहनशील बन गए हैं, क्योंकि उनका उदय एक लंबी अवधि में हुआ है (किम, 1992).   

• लेटिन अमेरिकी चावल क्षेत्र में वंश Echinocloa में लगभग 50 प्रजातियां शामिल हैं, जिनमें उप-प्रजातियों के साथ ऐसी किस्में भी हैं जो प्रोपेनिल के प्रति प्रतिरोधक हैं। दुनियाभर में चावल से जुड़ी 30 खर-पतवार प्रजातियों ने प्रोपैनिल, बुटाच्लर, क्विनक्लोरैक, फेनोक्साप्रोप पी-ईथाइल, बेंसल्फ्युरॉन, निओलिनेट, सल्फ्युरॉन यूरिया, 2,4-D तथा बाइस्पाइरिबेक के प्रति प्रतिरोधकता दिखाई है, जो पुर्तगाल, ऑस्ट्रेलिया,, चीन, श्रीलंका, जापान, अमेरिका, इटली, मलेशिया, थाइलैंड, ब्राजिल, स्पैन और कोरिया जैसे देशों में पाई जाती हैं (वल्वर्डी तथा अन्य 2000)

• अमेरिका के खर-पतवारनाशी निरोधी खर-पतवारनाशी पर किए अंतर्राष्ट्रीय सर्वेक्षण में कुल 346 जैव प्रतिरोध वाले खर-पतवार (1944 से लेकर जनवरी, 2010 तथा) पाए गए, जिन्होंने 19 खर-पतवारनाशी समूह के रसायनों के प्रति प्रतिरोधकता दिखाई, गौरतलब है कि 1944 के दौरान ही पहली बाद खर-पतवारनाशी 2,4-D का इस्तेमाल किया गया था। इसलिए इन समस्याओं से बचने के लिए संयोजन खर-पतवारनाशियों या एचटी फ़सल के विकास की गहरी जरूरत है। 

 

File Courtesy: 
चावल में खर-पतवार प्रबंधन, DRR ट्रैनिंग मैनुअल
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