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चावल आधारिक कृषि प्रणाली बनाम खर-पतवर प्रबंधन

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• समेकित चावल तथा बत्तख खेती का प्रचलन वियतनाम में काफी अधिक हैम जहां बत्तख पालन को शामिल करने से मोनो-कोट खर-पतवार जैसे Echinochloa crusgalli तथा Monochoria vaginalis (फ्युरुनो, 2001) में काफी कमी आती है। चावल-मूंग बीन फ़सल पर अन्नामलाई विश्वविद्यालय में किए 3 वर्षों के अध्ययन में यह बात सामने आई कि मूंग बीन की रिले क्रॉप के इस्तेमाल से समस्या उत्पन्न करने वाले खर-पतवार Cyperus difformis (काथिरेसन, 2002) में कमी आयी। 

• अजोला जैसा जैव-उर्वरक़ जो एक फर्न है और मृदा में वायुमंडलीय नाइट्रोजन स्थिर करता है, खेत के ठहरे जल के ऊपर इसके द्वारा निर्मित थैलस की मोटी चादर से खर-पतवार को धूप नहीं मिल पाती जिससे उनकी वृद्धि में कमी आती है। (कैथिरेसन तथा अन्य, 2001). 

• मछली तथा पॉल्ट्री घटक के समेकन से होने वाले दीर्घकालिक प्रभाव पर अन्नामलाई विश्वविद्यालय में 8 वर्षों तह किए अध्ययन में यह देखा गया कि मछली तथा पॉल्ट्री घटक ने क्रमशः खर-पतवार में 26 से 24 की हिस्सेदारी दिखाई। साथ ही मछली + पॉल्ट्री साथ मिलकर 30% का खर-पतवार नियंत्रण दिखाया। चावल-मछली+ पॉल्ट्री खेती के संयोजन में चीनी मिल के उपोत्पादों को जैविक खाद के रूप में जैव उर्वरक़ अजोला के साथ इस्तेमाल करने पर 69% का उच्चतम खर-पतवार नियंत्रण क्षमता प्राप्त हुई। (गुनासेकरण तथा कथिरेसन, 2003)    

 

File Courtesy: 
चावल में खर-पतवार प्रबंधन, DRR ट्रैनिंग मैनुअल
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