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चावल की फ़सल पर खर-पतवार का ऐलेलोपैथिक प्रभाव

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• जड़ निःश्रवण द्वारा या पौधे के सड़े-गले पदार्थों से पर्यावरण में विषैले पदार्थों की मुक्ती के जरिए खर-पतवारों की ऐलीलोपैथिक क्षमता का प्रदर्शन लगभग 90 प्रजातियों में किया गया (पत्नम 1986)।

• चावल का अंकुरण, वृद्धि तथा उपज  C. rotundus से उत्पन्न लीचैट्स द्वारा कम होता है तथा यह कमी ऐलेलोपैथिन की मौजूदगी के कारण उत्पन्न होती है।  Lantana camara, Cyperus rotundus, Ageratum conizoides, Echinochloa crusgalli, Commelina benghalensis तथा Xanthium strumanium के संपूर्ण वनस्पति निष्कर्षण के बीच (E. crusgalli तथा C. benghalensis को छोड़कर)  अन्य सभी चावल के बीज के अंकुरण को विलम्बित करते हैं। 

• गूज वीड(Sphenoclea zeylanica) से मिथेनॉल के निष्कर्षण के ऐलीलोपैथिक प्रभाव की जांच प्रेमास्तिरा तथा जुंगसोंटिपोर्न (1996) की गई, जिसमें उन्होंने बायो-ऐसेज विधियों का इस्तेमाल कर यह यह निष्कर्ष निकाला कि निष्कर्षण का फाइटोटॉक्सिक प्रभाव S. zeylanica की आयु के साथ बढ़ा। पुष्पण (बीज) से प्राप्त निष्कर्षण सबसे अधिक फाइटोटॉक्सिक होते हैं, इसके बाद पत्तियों, तना तथा जड़ों से प्राप्त निष्कर्षण फाइटोटॉक्सिक होते हैं।     

• जलीय खर-पतवारों के बीच जैसे  Ceratophyllum sps., Hydrilla sps., Nymphoides sps., alga and chara sps. के बीच, चावल के अंकुरण तथा मूल की लंबाई पर निष्कर्षण के 1-10% घोल के प्रभाव की जांच करने पर यह पाया गया कि  Ceratophyllum sps., Hydrilla sps. ने बीज अंकुरण में वृद्धि किया।  

• मूल की लंबाई पर निष्कर्षणों का प्रभाव काफी भिन्न था (नाहर तथा अन्य 1993) इचिजेन तथा अन्य (1997) ने अपने परीक्षण से यह निष्कर्ष निकाला कि Eleocharis acicularis ने Scirpus juncoides, Cyperus difformis तथा Monochoria vaginalis के विकास को मंद किया तथा चावल की उपज में वृद्धि हुई। Cyperus rotundus, C. iria तथा Fimbristylis miliacea चावल बीज (ज्योति किस्म) के अकुरण पर कोई प्रभाव नहीं डालता, पर C. difformis ने असर दिखाया। 

 

File Courtesy: 
चावल में खर-पतवार प्रबंधन, DRR ट्रैनिंग मैनुअल
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