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ऐलेलोपैथी प्रणाली

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• निक्षालन, अवशिष्ट समावेशन तथा अपघटन, वाष्पीकरण, जड़ निःश्रवण इत्यादि द्वारा ऐलेलोपैथिक यौगिक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से राइजोइजोस्फेयर में मुक्त होते हैं। अनुसंधान से पता चलता है कि जब एक पौधे द्वारा निर्मित ऐलेलोकेमिकल पर्यावरण में मुक्त होता है तब जैव-रसायन की अंतःक्रिया होती है, तथा दूसरे पौधे की वृद्धि तथा विकास प्रभावित होता है।   

• जटिल होने के कारण ऐलेलोपैथिक परिघटना का प्रदर्शन कठिन होता है। प्रयोगशाला बायोऐसेज अहम होते हैं, क्योंकि वे कम समय में अनुसंधानकर्ताओं को बड़ी मात्रा में पौधे की सामग्रियों के अध्ययन की अनुमति देते हैं। ये अनुसंधानकर्ताओं को अध्ययन के तहत आने वाले कारकों के अलावा हस्तक्षेप कारकों को समाप्त करते हैं।  

• चावल की प्रजातियों की ऐलेलोपैथिक क्षमता खेती की पद्धतियां, मृदा के गुण तथा पर्यावरणीय दशाओं पर निर्भर करते हैं और ये वनस्पति हस्तक्षेप यौगिक क्रमिक रूप से तथा साथ-साथ संचालित होते हैं। हस्तक्षेप क्रियाविधियों के अध्ययन के दौरान इन पर अवश्य विचार करना चाहिए।   

 

File Courtesy: 
चावल में खर-पतवार प्रबंधन, DRR ट्रैनिंग मैनुअल
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