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जैविक रूप से खर-पतवार का नियंत्रण

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1. खर-पतवार नियंत्रण के उदासीन या जैविक एजेंट वे जैविक मूल के एजेंट होते हैं, जो वांछित पौधों को बिना प्रभावित किए खर-पतवारों को नष्ट करते हैं अथवा उन्हें बाधित करते हैं। ऐसे एजेंटों में शामिल हैं- कीट, जानवर, मछलियां (जैसे चाइनीज कार्प), घोंघे, पक्षी (जैसे बत्तख), रोगाणु (कवक, बैक्टीरिया, वायरस, नेमाटोड इत्यादि), उनके विषैले उत्पाद तथा पौधे (परपोषी पौधे, प्रतियोगी पौधे) या उनके उत्पाद।  

2. भारत तथा अन्य देशों में राइजी-पिसीकल्चर में देखा गया है कि शाकाहारी (मैक्रोफाइटोफेगस) तथा शैवालहारी (माइक्रोफाइटोफेगस) मछलियों को चावल के खेतों में खरपतवार एवं शैवाल के नियंत्रण में उपयोग किया जा सकता है। इस उद्देश्य के लिए प्रयुक्त मछलियां हैं एशिया में  Puntius javanicus, अफ्रीका में  Tilapia rendalli तथा T. zilli , जो शाकाहारी होती हैं, और एशिया में T. mossambica , जो शैवालहारी होती हैं। 

3.  भारत में गैर-मौसम में सुअर जैसे जानवर पर्पल नत्सेज ( C. rotundus) की गांठ खाते हैं। चावल के खेतों में  Ludwigia parviflora के नियंत्रण में स्टील ब्लू बीटल ( Haltica cyaamea) तथा Bactra verutana के लार्वा   Cyperus rotundus के प्ररोह में छेद करते पाये गये हैं।  

4.  वनस्पति रोगाणु, Colletotrichum gloeosporioides sp. Aeschynomene,  Aeschynomene virginica तथा Colletotrichum gloeosporioides sp. Jussiaceae के नियंत्रण में प्रभावी पाये गये हैं। अन्य रोगाणु जो चावल के खर-पतवारों के जैविक नियंत्रण में प्रभावी पाये गये हैं, शामिल हैं- Echinochloa crusgalli के नियंत्रण के लिए Drechslera monoceras,  Echinochloa kuroguwa के नियंत्रण के लिए Epicoccosorus nematosporus,; E. kuroguwai का जैव नियंत्रण एक वनस्पति रोगाणु Epicoccosorus nematosporus, द्वारा तथा Scirpus planculmis का नियंत्रण रोगाणु Alternaria sp. द्वारा होता है। 

 

File Courtesy: 
चावल में खर-पतवार प्रबंधन, DRR ट्रैनिंग मैनुअल
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