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खर-पतवारों के नियंत्रण की रासायनिक विधि

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• सभी विधियों में रासायनिक विधि प्रभावी होती है तथा खर-पतवार नाशी के सस्ते, भरोसेमंद होने के कारण इससे कृषि विज्ञान में क्रांतिकारी बदलाव आया है। वर्तमान में खर-पतवार नाशी कृषि में प्रयुक्त उत्पादन का दो-तिहाई हिस्सा निर्मित करता है।  

• अमेरिका,जर्मनी, फ्रांस तथा ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में दुनिया भर में कीटनाशियों की बिक्री का 50 से 70% हिस्सा बेचा जाता है। भारत में खर-पतवार नाशकों का इस्तेमाल कुल कीटनाशकों का केवल 15 से 25% होता है और मुख्यतः यह सिंचित गेहूं, धान, सोयाबीन, सब्जियां, चाय, कपास, मक्का, ज्वार तथा गन्ना के लिए प्रयुक्त होता है।   

• खर-पतवारनाशी ऐसे रासायनिक पदार्थ होते हैं, जो कोशिका विभाजन, ऊतक विकास, क्लोरोफिल के निर्माण, प्रकाश-संश्लेषण, प्रस्वेदन, नाइट्रोजन, नाइट्रोजन उपापचय तथा प्रोटीन, वसा तथा विटामिक जैसे अहम तत्त्वों के जैव संश्लेषण से जुड़े एंजाइम की सक्रियता द्वारा पौधे को मृत करते हैं या उनके विकास को बाधित करते हैं  

• खर-पतवारनाशी को 100% सक्रिय तत्त्व के रूप में नहीं बेचा जाता। उनमें पाउडर, विलायक, स्टिकर्स या गीला करने वाले तत्त्व मिलाए जाते हैं, ताकि उनके सक्रिय तत्त्व पूरे वाहक तत्त्व में फैल जाए। अंतिम उत्पाद के रूप में फॉर्मुलेटेड खर-पतवार नाशी मिलता है, जिसमें सक्रिय घटक तत्त्वों के भिन्न अनुपात मौजूद रहते हैं। 

 

File Courtesy: 
चावल में खर-पतवार प्रबंधन, DRR ट्रैनिंग मैनुअल
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