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खर-पतवार के नियंत्रण के लिए जल प्रबंधन

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• चावल के उत्पादन में जल का इस्तेमाल खर-पतवार के विकास पर अहम प्रभाव डाल सकता है।   

• गीले बीज वाले चावल की तुलना में सूखे बीज वाले चावल की प्रजातियों तथा घनत्व में बीज की क्यारी के निर्माण में अंतर, अंकुरण के समय नमी तथा आरंभिक वृद्धि अवस्थाओं की उपस्थिति या अनुपस्थिति तथा चावल के आरंभिक विकास चरण के कारण खर-पतवार की समस्या भिन्न होती है।  

• इसके अतिरिक्त  C3 प्रकाश-संश्लेषक उपकरण वाले पौधे जलमग्न चावल की खेती की स्थिति में अधिक पाए जाते हैं जबकि C4  प्रकाश-संश्लेषक उपकरण वाले पौधे सूखे चावल की खेती की स्थिति में अधिक पाए जाते हैं । 

• चावल एक C3 प्रकार का पौधा है तथा  C3 खर-पतवारों के समान ही उसकी भी सीमाएं होती है; जबकि  C4 पौधों में उच्च प्रकाश-संश्लेषण सक्रियता होती है, उच्च प्रकाश, आदर्श तापमान तथा नमी की निम्न मात्रा होती है। 

• मृदा की नमी की मात्रा के आदर्श रेंज में होने से प्रतियोगिता के कारण खर-पतवारों की वृद्धि का नियंत्रण होता है तथा इस रेंज से बाहर मृदा की नमी खर-पतवार का नियंत्रण करती है।

 

File Courtesy: 
चावल में खर-पतवार प्रबंधन, DRR ट्रैनिंग मैनुअल
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