Best Viewed in Mozilla Firefox, Google Chrome

खर-पतवारों के नियंत्रण के लिए उर्वरक प्रबंधन

PrintPrintSend to friendSend to friend

• उर्वरकों तथा खादों को मिट्टी के अंदर 5-10 सेमी गहरे डालना चाहिए, ताकि भूमि सतह पर मौजूद खर-पतवारों के नन्हे पौधों के लिए वे उपलब्ध न हो पाए। उच्चभूमि या अजलमग्न चावल खेती में जीवों के सड़ना तथा हरे खाद वाले पौधे को चावल के पौधे के लिए भूमि तैयारी में शामिल किया जाना इतना अहम नहीं होता जितना जलमग्नता वाली स्थिति में चावल की खेती के लिए होता है।    

• जल निमग्न समेत अधिकतर खर-पतवार जलमग्नता की स्थिति में या भूमि की सतह पर नाइट्रोजन उर्वरक डालने से काफी तेजी से वृद्धि करते हैं। फॉस्फेट उर्वरकों को मिट्टी की सतह पर डालने से खलिहान में उगने वाली घास तथा शैवाल भी उगते हैं। चावल की फ़सल से पहले उर्वरकों का इस्तेमाल काफी आम बात है, जिससे खर-पतवारों की तीव्र वृद्धि होती है।    

• अत्यधिक मात्रा में उर्वरक डाले जाने से भी खर-पतवारों की वृद्धि बढ़ती है, और ज्योंही खर-पतवार के हमले में तेजी होती है कि अधिक उर्वरकों के मिलने से चावल के अधिकतर खर-पतवार और तेजी से वृद्धि करने लगते हैं और पोषण, नमी तथा धूप पर कब्जा जमाकर चावल के पौधों को नुकसान पहुंचाते हैं।   

• खर-पतवार के प्रसार को रोकने तथा उर्वरकों के अधिकतम लाभ के लिए नाइट्रोजन का प्रयोग सही समय पर करना चाहिए। प्रत्यक्ष बीज वाले चावल की फ़सल में सही प्रकार से निराई-गुड़ाई करने के बाद उर्वरकों के इस्तेमाल से अधिकतम लाभ मिलता है। उर्वरक का पहला इस्तेमाल निराई-गुड़ाई होने के बाद ही करना चाहिए।  

• निराई-गुड़ाई के बाद के चरणों में  N की टॉप ड्रेसिंग से उर्वरक का अधिकतम उपयोग होता है तथा खर-पतवारों के कारण उपज की हानि कम होती है। खर-पतवार नियंत्रण किए बिना नाइट्रोजन युक्त उर्वरकों के उच्च दर से इस्तेमाल करने से काफी हानि देखी गई है; जबकि प्रत्यक्ष बीज वाली चावल खेती में निराई-गुड़ाई के बाद निम्न दर से नाइट्रोजन युक्त उर्वरकों के इस्तेमाल से कम क्षति होती है।  

 

File Courtesy: 
चावल में खर-पतवार प्रबंधन, DRR ट्रैनिंग मैनुअल
Related Terms: FISWeed Management
Copy rights | Disclaimer | RKMP Policies