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खर-पतवार के नियंत्रण के लिए बीजों की क्यारी की तैयारी

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• चावल के रोपण से पहले चावल के बीजों की क्यारियों की अच्छी तरह से जुताई की जानी चाहिए, ताकि अधिक से अधिक खर-पतवारों के जड़ों तथा अंकुरित हो रहे खर-पतवारों का नाश हो सके। 

• हालांकि यांत्रिक जुताई द्वारा की गई भूमि तैयारी यदि सूखी मिट्टी में की जाती है तो खर-पतवार के नियंत्रण में इसका कोई खास असर नहीं पड़ता क्योंकि अधिकतर बीज निम्न नमी की स्थिति में उगते हैं।

• यदि मिट्टी की जुताई यदि सही तरह से नहीं का जाती है, तो खर-पतवार को बढ़ावा देने वाले बिचड़े भी उग आते हैं या मिट्टी ढीली होने के कारण उनके गहरे दबने से फ़सल की बाद की वृद्धि अवस्था के लिए काफी समस्या पैदा हो सकती है। 

• बीजों के मिट्टी में गहरे धंसने से जमीन के भीतर बीजों के चारों ओर ऑक्सीजन की कमी पैदा हो सकती है/या कार्बन डाइऑक्साइड या अन्य गैसों का अधिक निर्माण हो सकता है और बीज अपने द्वितीय निष्क्रियता में चले जाते हैं। द्वितीय निष्क्रियता वाले बीज बाद की जुताई में उग सकते हैं तथा उस समय गहरी जुताई ही ऐसी विधि होती है, जिसके जरिए जमीन के नीचे दबे खर-पतवार के बीजों को कम किया जा सकता है। 

• हाल के वर्षों में कार्बनिक खेती को काफी महत्व मिल रहा है; तथा कई बार हरे पौधे की सामग्रियों तथा जैविक अपशिष्टों के जरिए खर-पतवारों के बीज उनमें जा पहुंचते हैं; और जब उन्हें खेतों में डाला जाता है तब रोपण के लिए खेत तैयार करने से पहले उन्हें मिट्टी के अंदर तबतक डाल कर रखा जाए जबतक की उनका जीवन न खत्म हो जाए या उन्हें सड़ने छोड़ दिया जाए। 

 

File Courtesy: 
चावल में खर-पतवार प्रबंधन, DRR ट्रैनिंग मैनुअल
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