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किस्मों या जीनोटाइल के चयन द्वारा खर-पतवारों का नियंत्रण

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• पौधे की अच्छी किस्मों के चयन से जैविक उपज में वृद्धि होती है तथा इससे दाने भी पुष्ट होते हैं। वर्षा पूरित उच्च भूमि के चावल की उपज वाले क्षेत्रों में दानों की उच्च उपज की संभावना के अलावा खर-पतवार से प्रतियोगिता करने की उच्च क्षमता वाली किस्में अहम होती हैं।   

• CRRI, कटक में किए अनुसंधान में यह पाया गया कि वंदना, अंजली तथा कलिंग  ш जैसी किस्मों में खर-पतवारों से मुकाबला करने के गुण मौजूद होते हैं और इनकी उपज, वर्षा पूरित उच्च-भूमि की पारंपरिक किस्मों की तुलना में 42-63% अधिक होती है। 

• इसी तरह छिछली से निम्न भूमि में मोती, गायत्री, सावित्री तथा गहरे जल में दुर्गा काभी प्रभावी (पारंपरिक किस्मों की तुलना में 48-69% उपज लाभ) माना गया।  

• सोनिया, NCS 132, NCS 134, AUS 257, AUS 196 तथा अग्नीसाल एवं नरेंद्र 97 जैसे जीनोटाइप को खर-पतवारों से बेहतर तरीके से मुकाबला करने वाले देखे गए; और इनका भविष्य के संकर नस्ल के निर्माण में संभावनाशील दानकर्ता के रूप में उपयोग किया जा सकता है। 

 

File Courtesy: 
चावल में खर-पतवार प्रबंधन, DRR ट्रैनिंग मैनुअल
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