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खर-पतवार के नियंत्रण के लिए अंतर-फ़सल प्रणाली

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• भारत तथा विदेशों में किए अध्ययन में यह पता चला है कि  Sesbania bispinosa का गीले बीज वाले चावल के साथ एक अंतरफ़सल के रूप में उपयोग कर खर-पतवार का नियंत्रण किया जा सकता है। 

• चावल+चवली तथा चावल+मूंग के अंतरफ़सल प्रणाली में  खर-पतवार का घनत्व तथा खर-पतवारों का शुष्क भार चावल की अकेली खेती वाली प्रणाली जितना ही कम पाया गया।  निरंतर चावल मोनो-कल्चर के कारण खर-पतवार के घनत्व में वृद्धि होती है, जो गीली दशा में वृद्धि के लिए अनुकूलित होते हैं।

• गीली भूमि के चक्र की बजाए शुष्क भूमि फ़सल के प्रयोग से खर-पतवार के विकास में कमी आती है। दूसरे चावल-चावल क्रमिक फ़सलीकरण प्रणाली में Echinochloa crusgalli के समूह की संख्या घटाई जा सकती है। 

• चावल की खेती में खर-पतवार के बेहतर नियंत्रण से गैर-टिलेज प्रणाली की तुलना में अगली सोयाबीन फ़सल में उनकी कमी पर अच्छा असर पड़ता है। 

• शुष्क चावल + मूंग प्रणाली में, Cyperus rotundus तथा Rottboellia exaltata सर्वाधिक प्रतियोगी खर-पतवार प्रजातियां होती हैं।  चावल-गेहूं के फ़सलीकरण में E. crusgalli तथा Cyperus iria, चावल में  तथा  गेहूं में Phalaris minor प्रभावी खर-पतवार पाए जाते हैं। 

 

File Courtesy: 
चावल में खर-पतवार प्रबंधन, DRR ट्रैनिंग मैनुअल
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