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खर-पतवार प्रबंधन के लिए फ़सल चक्रण

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• सावधानीपूर्वक किया गया फ़सल चक्रण  खर-पतवार के नियंत्रण की काफी प्रभावी पारंपरिक तकनीक है। कई बार  खर-पतवार विशेष फ़सल से जुड़े होते हैं, क्योंकि उननी वृद्धि जरूरत/गुण फ़सल जैसे ही होते हैं। क्योंकि खर-पतवार अपनी वृद्धि आदतें तथा जीवन चक्र में भिन्नता प्रदर्शित करते हैं, इसलिए अलग प्रकार के फ़सल चक्रण तथा पारंपरिक आवश्यकता के चुनाव से हम प्रभावी खर-पतवार के विकास को बाधित कर सकते हैं।      

• फ़सल तथा खर-पतवार नियंत्रण के उपायों को लंबे समय के फ़सल चक्रण कार्यक्रम में बदलना चाहिए। यदि समान फ़सल तथा खर-पतवार नियंत्रण कार्य का हर साल उपयोग किया जाए तो संपूर्ण चक्रण प्रणाली से जुड़े खर-पतवार इतने गंभीर हो जाएंगे जितने कि वे मोनोकल्चर प्रणाली में होते हैं।    

• भारत तथा विदेशों में किए अध्ययन में यह पता चला है कि  Sesbania bispinosa का गीले बीज वाले चावल के साथ एक अंतरफ़सल के रूप में उपयोग कर खर-पतवार का नियंत्रण किया जा सकता है। चावल+चवली तथा चावल+मूंग के अंतरफ़सल प्रणाली में  खर-पतवार का घनत्व तथा खर-पतवारों का शुष्क भार चावल की अकेली खेती वाली प्रणाली जितना ही कम था।

• निरंतर चावल मोनो-कल्चर के कारण खर-पतवार के घनत्व में वृद्धि होती है, जो गीली दशा में वृद्धि के लिए अनुकूलित होते हैं। गीली भूमि के चक्र की बजाए शुष्क भूमि फ़सल के प्रयोग से खर-पतवार के विकास में कमी आती है।   

• Echinochloa crusgalli के समूह को दूसरे चावल-चावल फ़सल प्रणाली में घटाया जा सकता है। चावल की खेती में खर-पतवार के बेहतर नियंत्रण से गैर-टिलेज प्रणाली की तुलना में अगली सोयाबीन फ़सल में उनकी कमी पर अच्छा असर पड़ता है। 

 

File Courtesy: 
चावल में खर-पतवार प्रबंधन, DRR ट्रैनिंग मैनुअल
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