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दक्षिण भारत के लिए हाइब्रिड चावलों का विकास

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1. दक्षिण में हाइब्रिड चावल की खेती का क्षेत्र जिस प्रकार सिमटा हुआ है उसे देखकर लगता है कि दक्षिण भारत में इसने कोई खास लोकप्रियता हासिल नहीं की है।

2. इसका कारण यह है कि दक्षिण भारत के लोग BPT 5204 जैसे मध्यम मोटाई के प्रीमियम क्वालिटी के चावल पसंद करते हैं, जबकि मौजूदा हाइब्रिड चावल लंबे दाने वाले और लसीले होते हैं।

3. हाल में, डाइरेक्टरेट ऑफ राइस रिसर्च, हैदराबाद ने एक हाइब्रिड किस्म DRR TRAINING MANUALH-3 का विकास किया है जो BPT 5204 (मध्यम पतलापन के साथ सबसे लोकप्रिय किस्म) की तुलना में उपज और दाने की क्वालिटी दोनों ही मामलों में ज्यादा अच्छा है।

4. इस हाइब्रिड को 2009 में आन्ध्र प्रदेश, गुजरात, मध्यप्रदेश, उड़ीसा और उत्तर प्रदेश में CSCSN&RV द्वारा जारी किया गया। अपने देश में जारी की गई, यह BPT क्वालिटी युक्त मध्यम पतलापन वाले चावल की पहली किस्म है।

File Courtesy: 
एग्रो टेक्निक्स फॉर हाइब्रिड राइस कल्टिवेशन एंड सीड प्रोडक्शन- 2005, DRR ट्रेनिंग मैनुअल
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