Best Viewed in Mozilla Firefox, Google Chrome

24
Aug

तरौरी बासमती

• संरक्षण : स्थानीय बासमती में से शुद्ध चयन • अवधि : 135-138
• पर्यावरणीय परिस्थिति : सुगंधित
• प्रमुख विशेषताएं : लंबा, अनाज: एल.एस सुगंधित; पैदावार: 21 क्वि./हेक्ट.
• क्षेत्र का सुझाव : हरियाणा
24
Aug

PR-111 (IET-13576)

1. संरक्षण : IR-54 x PR-106
2. वर्ष :
3. अवधि : 135-138
4. पर्यावरणीय परिस्थिति : सिंचित क्षेत्र
5. प्रमुख विशेषताएं : अर्ध बौना (97 सें.मी.), अनाज: एल.एस, बी.एल.बी प्रतिरोधी; पैदावार: 70 क्वि./हेक्ट.
6. क्षेत्र का सुझाव : हरियाणा
24
Aug

HKR-126

1. संरक्षण : नामसगुई-19 x IR-4215-301-2-2-6 x IR-5853-162-1-2-
2. वर्ष :
3. अवधि :
4. पर्यावरणीय परिस्थिति : सिंचित क्षेत्र
5. प्रमुख विशेषताएं : अर्ध बौना (110 सें.मी.), अनाज: एल.एस, गैर-भंडारण, टूट-फूट प्रतिरोधी, जल्दी बोए जाने वाले, पानी संबंधी तनाव बर्दाश्त कर पाता है, ब्लास्ट और रॉट का सामान्य प्रतिरोधी, बी.एल.बी के प्रति सामान्य रूप से संवेदी और WBPH प्रतिरोधी; पैदावार: 78 क्वि./हेक्ट.
6. क्षेत्र का सुझाव : हरियाणा
24
Aug

बासमती-370

1. संरक्षण : लागू नहीं
2. वर्ष : 1973-76
3. अवधि :
4. पर्यावरणीय परिस्थिति : सिंचित
5. प्रमुख विशेषताएं : लंबा, (140-150 से.मी), अनाज: एल.एस और ए.डब्ल्यू.ए, पैदावार: 22 क्विंटल/हेक्टेयर.
6. क्षेत्र का सुझाव : हरियाणा
24
Aug

झोना-349

1. संरक्षण : लागू नहीं
2. वर्ष : 1969-78
3. अवधि :
4. पर्यावरणीय परिस्थिति : क्षारीय मिट्टी
5. प्रमुख विशेषताएं : लंबा, अनाज: लंबा मोटा, सफेद, long bold, white, दानेदार, पैदवार: 35-40 क्विंटल/हेक्टेयर.
6. क्षेत्र का सुझाव : हरियाणा
24
Aug

रोग का प्रबंधन ( Management of disease)

पैनिकल इनिशियएन में 0.1% कार्बेन्डैजिम 50 WP के एक या दो छिड़काव करने से बीमारी की गंभीरता को कम किया जा सकता है।
मिट्टी की उर्वरता की कमी में सुधार कर और संतुलित पोषण का प्रयोग कर इस रोग से बचा जा सकता है।
24
Aug

ब्राउन स्पॉट रोग ( Brown Spot disease)

लक्षण: इस रोग का मुख्य कारण हेल्मिन्थोस्पोरियल ओराइजी होता है। यह पत्तियों और प्लूम पर अंडाकार गहरा भूरा दाग बनाता है। यह रोग मुख्यतः पोषकहीन और कमजोर मिट्टी में पाया जाता है। गंभीर स्थिति में यह नर्सरी व खेत की फसलों को हानि पहुंचा सकता है।
A) ब्लास्ट-प्रतिरोधी की अलग-अलग किस्मों का उपयोग करें। B) रासायनिक नियंत्रण 1. नर्सरी में बोने से पहले या ऊंची भूमि (अपलैन्ड) में होने वाले चावल के प्रसारण से पहले बीजों को 0.1% कार्बेन्डाजिम 50 WP (बैविस्टिन, डेरोसॉल या जेकेस्टेन) में भिगोना चाहिए। 2. तराई भूमि (लो लैन्ड) में होने वाले फसलों में अपरूटिंग (जड़ से उखाड़ने) के बाद अंकुरो को 0.1% कार्बेन्डाजिम 50 WP (बैविस्टिन, डेरोसॉल या जेकेस्टेन) में 12 घंटों के लिए जड़ तक भिगा कर उपचार करें। 3. बैविस्टिन (0.1%) के बाद हिनोसैन (0.1%) या डाइथेन M-45 (0.25%) का छिड़काव पहली बार रोग के प्रकट होते ही पाक्षिक (15 दिनों के) अंतराल पर किया जाना चाहिए। रोग पर ठीक से नियंत्रण प्राप्त करने के लिए स्प्रे घोल के साथ सैन्डोविट या ट्राइटोन का उपयोग स्टिकर @0.2% के रुप में किया जाना चाहिए। तराई भूमि की फसलों के लिए खेत में स्थिर पानी होने पर टिलरिंग और बूटिंग अवस्था

1. पत्तियों के सामान्य घाव तंतु (स्पिन्डल) आकार के होते हैं जिसके केंद्र में भूरा (ग्रे) रंग होता है और जिसका किनारा आमतौर पर लालिमायुक्त पीला (रेडिश येलो) होता है। 2. अतिसंवेदनशील किस्म के पत्ते सूख जाते हैं। फंगस (कवक) तने के नोडों को भी प्रभावित कर सकते हैं जिस कारण इसका गहरा भूरा रंग काला हो जाता है और यह आसानी से टूट सकता है। 3. घाव पैनिकल नेक में भी हो सकता है। संक्रमित नेक काला हो जाता है और फिर टूट जाता है। नेक ब्लास्ट की वज़ह से पैनिकल में कुछ ही बीज पनप सकते हैं या बिल्कुल भी नहीं।
Copy rights | Disclaimer | RKMP Policies