Best Viewed in Mozilla Firefox, Google Chrome

05
Nov

खरपतवार प्रबंधन

खरपतवार प्रबंधन

(ए) 2 बार के लिए हस्त निराई की सलाह दी जाती है।

(बी) रासायनिक निराई

(i) सीधी बुवाई:

                  (क) उत्थान के पश्चात के रूप में: सभी प्रकार के खरपतवारों के नियंत्रण के लिए बुवाई के 2-3 दिन बाद 700-800 लीटर पानी में, 2-3 लीटर/ हे. के दर पर बुटाक्लोर 50 ई.सी. या थायोबॅनकार्ब 50 ई.सी. का छिड़काव करें।

                  (ख) पूर्व-उत्थान के रूप में: सभी घासफूस के बीजों के अंकुरण की जांच के लिए, उँची भूमि स्थिति में बुवाई से पहले 4 लीटर/हे के दर पर, एलाक्लोर 50 ई.सी. या बुटाक्लोर 50 ई.सी. का छिड़काव करें।

(ii) प्रतिरोपित धान क्षेत्र: सभी प्रकार के खरपतवारों के नियंत्रण के लिए बुवाई के 5-7 दिनों के बाद 600-700 लीटर पानी में, एनिलोफॉस 30 ई.सी. 0.4 ली./हे के दर पर या ऑक्ज़िफ्रफॅन 200 ग्रा./हे के दर पर या बुटाक्लोर 50 ई.सी. 2ली./हे के दर पर छिड़काव करें। क्षेत्र में स्थायी पानी 5 से.

05
Nov

खाद एवं उर्वरक

खाद एवं उर्वरक

धान की खेती के लिए आवश्यक खाद एवं उर्वरक निम्नानुसार हैं:

  • एफ़वायएम/खाद: 10 ~ 15 कार्टलोड (खाद: एन = 0.5 ~ 0.5%, पी= 1.5%, के= 2.3%)।
  • नाइट्रोजन: 100 ~ 150 कि.ग्रा/ हेक्टेयर।
  • फॉस्फोरस: 50 ~ 60 कि.ग्रा. P2O5/ हे. (P= P2O5 × 0.44 एवं P2O5= P × 2.29)
  • पोटाश: 40 ~ 50 कि.ग्रा. KO/ हे. (K= K2O × 0.83 एवं KO= K × 1.20)
  • जिंक सल्फेट: 25 कि.ग्रा./ हे. (22 ~ 35% Zn)
  • हरी खाद फसलें: सनाई, धैनचा, मूंग/ उड़द, आदि।
05
Nov

बीज दर, उपचार एवं अंतर

बीज दर, उपचार एवं अंतर

ए) बीज दर: बिहार में धान की बुवाई की दो पद्धतियाँ हैं। वे हैं

          (i) सीधी बुवाई

          ii) रोपाई

बुवाई के लिए बीज दर 90-100 कि.ग्रा./ हे. है एवं रोपाई के लिए 30-50 कि.ग्रा./ हे है।

बी) बीज उपचार: बुवाई के पहले बीज को पानी में डुबो कर 60 ग्रा. सेरिसॅन 2.5% डब्ल्यूपी या अन्य ओरगेनो मरक्यूरियल फफूँदनाशी के साथ उसका इलाज किया जाना चाहिए।

सी) अंतर: धान की खेती के लिए 2-3 अंकुर/ पहाड़ी पर 20 x 30 से.मी. का अंतर रखा जाना चाहिए। हेक्टेयर का 1/20वाँ भाग नर्सरी क्षेत्र से भरा होना चाहिए।

05
Nov

बुवाई एवं रोपाई

बुवाई एवं रोपाई:

ए) बुवाई  

  • धान तीन मौसमों में उगाया जाता है। वे हैं खरीफ़, राबी/ शीतकालीन एवं ग्रीष्मकालीन मौसम।
  • खरीफ़ के मौसम में फसल जून के दौरान बोई जाती है।
  • राबी / शीतकालीन मौसम में फसल अक्टूबर - नवंबर के दौरान बोई जाती है।
  • गर्मी के मौसम में फसल मार्च के पहले पखवारे के दौरान बोई जाती है।

बी) रोपाई: मुख्य क्षेत्र में फसल बुवाई के बाद 25-30 दिनों में रोपित की जाती है।

जलवायु एवं मिट्टी की आवश्यकताएँ

  • जलवायु: बिहार में चावल की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु है मध्यम जलवायु।
  • वर्षा: धान की खेती के लिए औसत 120-140 से.मी. वर्षा आवश्यक है।
  • तापमान: बिहार में धान के लिए 21-37 डि.से. तापमान की आवश्यकता है।
  • मिट्टी: खेती के लिए उपयुक्त मिट्टी भारी से रेतीले दूमट है।

बिहार में खेती के लिए सिफारिश की गई उपयुक्त प्रजातियाँ

(ए) खरीफ मौसम के लिए

  • ऊँचि भूमि / वर्षा पूरित दशा: पूसा 2-21; टुरान्टा (केवल 75 दिनों की फसल); प्रभात (केवल 90 दिनों की फसल); सी.आर. 44-35 (साकेत-4) ; सरोज ; बिरसा धान 105; बिरसा धान 201; बिरसा धन 202; धनलक्ष्मी; कंचन; कलिंगा-III;रिचारिया; आदित्य; तुलसी; वंदना।
  •  मध्यम भूमि: बी.आर.34; आइ.आर 36; सी.आर 1002; राजेंद्र धान 201; सीता; कनक; मंसूरी; सुजाता; जय श्री; राज श्री; पंकज; स्वर्ण; जानकी; राधा; सावित्री; सलिवाहना, एमटीयू- 7029, सोनम, बीपीटी-5204, बीपीटी-1001, नाता महसूरी, हीरा, सत्यम, पंजाब परिमल।
  • निचली भूमि: बी.आर.8; सी.आर.1002; सत्यम; किशोरी; राज श्री; पंकज; स्वर्णधान; मंसूरी; श्यामला; क्रांति; सुरेखा; वैदेही; राधा शकुंतला; संतोष; महामाया;टी 141।
  • गहरा पानी: जानकी; वैदेही; सुधा; जलधी-I; जलधी-II; जलमग्न।

(बी) शीतकालीन मौसम के लिए: गौतम; धनलक्ष्मी; रिचारिया; सरोज।

(स

05
Nov

धान का वर्गीकरण

धान का वर्गीकरण

फसल का नाम: धान

वैज्ञानिक नाम: ओराइज़ा सॅटिवा

क्रम: पोकीस

परिवार: ग्रेमिने

Copy rights | Disclaimer | RKMP Policies