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Rice diseases


Charmo takes a toll on paddy in Bicholim, Sattari

KERI: Rice blast fungus locally known as charmo has damaged paddy crop in many areas of Bicholim and Sattari talukas.

Though the zonal agriculture officers at Bicholim, Sattari and Sakhali have taken needful steps, information about the disease was not provided in time.

Magnaporthe grisea, also known as rice blast fungus, rice rotten neck or rice seedling blight is a plant-pathogenic fungus that seriously affects rice.

Initial symptoms are white to gray-green lesions or spots with darker borders produced on all parts of the shoot, while older lesions are elliptical or spindle-shaped and whitish to gray with necrotic borders. It also affects reproduction by causing the host to produce fewer seeds.

Navalo Zore from Vantichemol of Ghoteli in Sattari told TOI, "Our crops are affected badly by charmo. My family and I have worked hard but rice blast fungus would drastically reduce the yield and cause heavy losses. We are landless and our investment this year has proved futile."

Kishor Bhave, the zonal agricultural officer of Sattari, said, "As soon as our officials received information, we made sincere efforts to providing tricyclozole chemical free of cost to the affected farmers. In some cases, tricyclozole has helped farmers to get rid of the affects of charmo."

Shashikant Malik from Kudne said, "This year farmers with more than 5ha are worried that our hardwork will not yield much fruit as the paddy is affected by blast fungus."

Dasharath Morajkar, social activist from Pelavade-Ravan in Sattari, said, "Since the losses will not be compensated under the Shetkari Aadhaar Nidhi Scheme initiated by the government of Goa, farmers are under further stress."



Controlling blast infestation in rice

Blast infestation in rice has been reported from many places of Andhra Pradesh State. In Telangana, Andhra and Rayalaseema zones, the disease has been reported to an extent of 10-20 per cent during this season.

There are broadly three types of blast. The first is called as leaf blast. Infested crop leaves exhibit spindle shaped spots with brown margin and grey dots.

This type has been prevalent in Warangal, Karimnagar, Khammam, Krishna, East Godavari, West Godavari, Nellore, Srikakulum and other districts of Andhra Pradesh for the last few weeks.

Node blast

The second type is node blast. Caused by a fungus, the symptoms are crop turning black in colour and panicles breaking easily.

The third type is called neck blast. This starts during panicle emergence initiation of the crop period. The neck region is blackened and shrivelled. Grain set in ears is completely or partially inhibited.

Out of the three, neck blast is more severe and results in yield losses to a great extent.

Favourable environmental factors such as prolonged dry periods, cool nights, low night temperature, high relative humidity, cloudy, drizzling weather and high nitrogen supply increase all the three disease incidences.


Healthy disease free seeds alone should be used for sowing.

Use disease resistant or tolerant rice cultivars

Seed treatment with tricyclozole 75 WP at 2.0 g or carbendazim at 1.0g per kg seed as wet seed treatment or carbendazim at 3.0 g per kg as dry seed treatment.

Seeds should not be collected from infested fields.

Remove weeds and collateral hosts from field and bunds. Balanced fertillizer application is a must.

At the time of harvesting, infested plants should be removed and destroyed.

Field bunds and irrigation channels should be kept clean. Avoid excess application of nitrogenous fertilizers.

Spraying of fungicides like tricyclozole 75 WP at 0.6 g or isoprothiolane 40EC at 1.5 ml or kasugamycin 3 L at 2.5 ml will be more effective.

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TN farmers asked monitor paddy crop for diseases

Coimbatore, Nov. 27:  Rice farmers in Tamil Nadu have been advised to monitor the crop for rice blast and false smut diseases in paddy.

University experts foresee an outbreak of such diseases in paddy because of the abnormal weather prevailing in the rice growing areas of Tamil Nadu.

Urging farmers to monitor the crop more closely, the Director for Plant Protection Studies at Tamil Nadu Agricultural University here said the blast symptoms appear as spindle-shaped lesions with white to grey-green darker borders. “Rice grains are replaced by a mass of velvety spores due to the false smut infection, which burst open between the glumes. To control this disease, spray Propiconazole or Copper hydroxide at boot leaf and at flowering stage,” the director said in a release.

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धान में बीमारी लगने से किसान चिंतित

सोनारायठाढ़ी : धान में बीमारी लग जाने के कारण किसान परेशान हैं। प्रखंड प्रशासन द्वारा इस दिशा में अब तक कोई प्रयास नहीं किया गया है। बिंझा पंचायत के कपिल मंडल ने बताया कि उन्होंने आठ बीघा जमीन में स्वर्णा धान लगाया है। इस बार पानी की कमी भी नहीं हुई। सोचा था कि उपज अच्छी होगी। अब बीमारी लग जाने के कारण स्थिति खराब हो गई है। अधिक पानी पड़ने के कारण धान का पौधा सड़ने लगा है। मगडीहा पंचायत के भलविंधा निवासी दुबे काली सोरेन एवं लखोरिया पंचायत के देवपहरी निवासी महादेव पंडित, कोल्हड़िया के कपिल मंडल ने बताया कि ललाट व स्वर्णा धान की फसल लगाया था। लेकिन बीमारी के कारण आशानुरूप उपज नहीं हुआ। आत्मा के निदेशक मंटू कुमार ने बताया कि कृषक पाठशाला के जरिए किसानों को बीमारी से बचाव की जानकारी दी गई थी। बीमारी लगने की स्थिति में किसानों को कीटनाशक दवा का छिड़काव करना चाहिए।

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వరికి తెగుళ్లు.. రైతుల ఆందోళన

గజపతినగరం, సెప్టెంబర్ 29 : మండలం పరిధిలో పరిపైరుకు పురుగులు తెగుళ్లు సోకడంతో రైతులు తీవ్ర ఆందోళన చెందుతున్నారు. పైరుకు సోకుతున్న పురుగులు తెగుళ్లను పరిశీలించి తగు సూచనలు, సలహాలు ఇవ్వాల్సిన వ్యవసాయ శాఖ అధికారి, సిబ్బంది సమ్మెలో కొనసాగుతున్న కారణంగా రైతులకు దిక్కుతోచడం లేదు. తీవ్ర వర్షాభావ పరిస్థితుల కారణంగా పలు గ్రామాల్లో ఏటి కాలువలు, వ్యవసాయ బావులు, ఆయకట్టు పరిధిలో గల భూముల్లో కేవలం 40 శాతం మేరకు వరి ఉబాలు జరిగాయి. ఇటీవల వర్షాలు కురిసినా వరినారు ముదిరిపోయిన కారణంగా రైతులు ఉబాలు జరపలేకపోయారు. 40 శాతం విస్తీర్ణంలో ఉబాలు జరిగినా వరిపైరుకు పాముపొడ తేగుళు, దోమపోటు (సుడితెగుళు) రసంపీల్చే పురుగు, ఆకుముడత పురుగులు విస్తృతంగా సోకుతున్నాయి. ఇటీవల సస్యరక్షణకు అవసరమైన మందుల ధరలు రెండింతలు పెరగడంతో రైతులు సస్యరక్షణ చర్యలు చేపట్టలేకపోతున్నారు. ప్రభుత్వం ఇప్పటికైనా సస్యరక్షణ మందులు రాయితీపై రైతులకు సరఫరా చేసి సూచనలు సలహాలు ఇవ్వడానికి సిబ్బందిని నియమించాలని రైతులు కోరుతున్నారు. ఉభాలు జరపడానికి, రసాయనిక ఎరువులు వినియోగానికి అప్పులు చేసి పంటలకు ఖర్చు పెట్టి న రైతులు ఆదుకోవాలని ప్రభుత్వాన్ని కోరుతున్నారు. వరినారు పోసిన వర్షాలు సరిగ్గా కురవనందుకు చాలా చోట్ల పొలాల్లోనే వరినారును వదిలి వేశారు.

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लीफ ब्लास्ट व भूरा तैला की चपेट में आया धान

भास्कर न्यूज -!- राई
खादर क्षेत्र के किसानों का धान अब लीफ ब्लास्ट एवं भूरा तैला नामक बीमारी की चपेट में आ गया है। धान में आई बीमारी से किसान परेशान हैं। किसानों को धान में स्प्रे कराने के लिए सात सौ से लेकर एक हजार रुपए का अतिरिक्त खर्च वहन करना पड़ रहा है।लीफ ब्लास्ट व भूरा तैला की चपेट में आया धान

खादर के प्रीतमपुरा, खेवड़ा, झुंडपुर, मनौली, सेरसा, जाटी, जाजल, पलड़ी कलां, जाखौली, अटेरना, सेरसा गांव में धान की फसल में लीफ ब्लास्ट व भूरा तैला नामक बीमारी व कीट का प्रकोप है। धान की अगेती फसल में बीमारी आई है। किसानों का कहना है कि इससे पैदावार पर असर पड़ेगा।
यह होती है लीफ ब्लास्ट व भूरा तैला बीमारी : लीफ ब्लास्ट बीमारी में धान के पत्ते पर आंखनुमा धब्बे की तरह से लक्षण दिखाई देते हैं। ये धब्बे बढ़कर पत्तों को सुखा देते हैं। इसी तरह से भूरा तैला फसल के तने में काफी संख्या में लग जाता है। जो तने का रस चूस लेता है और तने को कमजोर कर देता है। इससे तना चिपचिपा दिखाई देता है। भूरा तैला नामक बीमारी को यदि समय रहते नियंत्रण नहीं किया तो पूरे खेत की फसल को जमीन में बिछा देता है। जिससे फसल की पैदावार में काफी नुकसान होता है।
ऐसे करें नियंत्रण : कृषि अधिकारी बोले लीफ ब्लास्ट के लिए प्रति एकड़ 120 एमएल बीम को दो सौ लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें। भूरा तेला को प्रति एकड़ 300 एमएल नूवान 30 केजी रेत में मिलाकर शाम के समय खेत में छिड़काव करें।

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जिले के कई गांवों में धान की फसल झुलसा रोग की चपेट में

कवर्धा-!-नगर के कृषि विज्ञान केंद्र में पदस्थ पौधरोग विशेषज्ञ डॉ. बीपी त्रिपाठी ने जिले के धान उत्पादक ग्रामों का भ्रमण कर धान की फसल में कुछ मुख्य बीमारियों के लक्षण परिलक्षित होने का खुलासा किया। डॉ. त्रिपाठी ने बताया कि जिले के कई ग्रामों में ली जा रही धान की फसल में झुलसा रोग का प्रकोप नजर आ रहा है।
जिले के कई गांवों में धान की फसल झुलसा रोग की चपेट में
झुलसा की पहचान धान के पत्तियों पर आंख व नाव आकार के धब्बे को देखकर की जा सकती है। ऐसे धब्बे झुलसा रोग की शुरुआत है। उन्होने किसानों को झुलसा के रोकथाम के लिए यूरिया का छिड़काव करने, खेत की मेड़ों को साफ सुथरा रखने एवं झुलसा का प्रकोप 10 प्रतिशत से अधिक होने पर ट्राइसाइक्लोजोल का 120 ग्राम प्रति एकड़ या टेबुकोनाजोल का 250 मि.ली. प्रति एकड़ छिड़काव करने की सलाह दी। डॉ. त्रिपाठी ने कहा कि धान के स्वर्णा, महामाया जैसे किस्मों में झुलसा का प्रकोप \'यादा रहता है, इसलिए इन किस्मों में ट्राइसाक्लोजोल या टेबुकोनाजोल कृषि रसायन का छिड़काव 15 दिन में दुबारा करना \'यादा लाभप्रद होगा। धान की अन्य बीमारी वीएलवी वैक्टीरियल लीफ प्लाइट जिसका प्रकोप पिछले दिनों जिले के ग्राम कोसमंदा, भेदली, झलमला, पंडरिया एवं गेगड़ा सहित कई ग्रामों में देखने को मिली थी। इसकी रोकथाम के लिए स्टेप्टोसाइक्लीन 6 ग्राम दवा प्रति एकड़ साथ में मैन्कोजेब 250 ग्राम को मिलाकर छिड़काव किया जा सकता है। वहीं धान में गलन की समस्या के लिए रसायनिक दवा हेक्जाकोनाजोल 250 मिली प्रति एकड़ छिड़काव किया जा सकता है।

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बरसात से धान की फसल की बीमारी हटी

संवाद सहयोगी, ढाड : पिछले कई दिनों से लगातार रुक-रुककर हो रही बरसात किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। बरसात के चलते किसानों के चेहरे खिले हुए हैं। बरसात के कारण काफी समय से धान की फसलों में लगी पत्ता लपेट व गोभ की सूंडी की बीमारी से ¨चतित किसानों को भी राहत मिली है।

खेतों में काफी मात्रा में पानी खड़ा हुआ है और फसलें लहलहा रही है। हालाकि कई किसान ने पत्ता लपेट व गोभ की सूंडी की बीमारी की रोकथाम के लिए स्प्रे करने में लगे हुए थे, लेकिन बरसात के चलते किसानों ने स्प्रे करना बंद कर दिया है। बरसात किसानों के लिए काफी लाभदायक सिद्ध हो रही है, क्योंकि किसानों को फसल में लगी बीमारियों की रोकथाम के लिए अधिक मात्रा में न तो कीटनाशक दवाओं का स्प्रे करना पड़ा और न ही फसलों की ¨सचाई के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा। शुरूआत में किसानों को धान की फसल की बिजाई के लिए ¨सचाई करने के लिए काफी मशक्कत का सामना करना पड़ा था, लेकिन समय-बे-समय हो रही बरसात से किसानों को राहत मिली।

किसान भीम ¨सह, कृष्ण श्योकंद, जवाहर मल, राजेंद्र नैन, हुकम चंद, हवा ¨सह सहित कई किसानों ने बताया कि बरसात से जहा पानी का जलस्तर ऊपर उठेगा, वहीं धान की फसलों में लगने वाली बीमारियों से भी किसानों को राहत मिलेगी। बरसात से धान की पैदावार में भी वृद्धि होगी।

कृषि विकास अधिकारी ढाड डॉ. चंद्रप्रकाश ने कहा कि बरसात धान की फसलों के लिए काफी लाभदायक साबित होगी और पैदावार में भी बढ़ोतरी होगी। फसलों में लगी सभी बीमारिया भी दूर हो जाएंगी। किसान फसलों में इस समय ज्यादा मात्रा में पानी न खड़ा करके कम मात्रा में एक इच से ज्यादा पानी खड़ा करे। किसान 21 प्रतिशत वाला आधा किलो जिंक सल्फेट, अढ़ाई किलो यूरिया को 100 लीटर पानी में घोलकर स्प्रे करे, ताकि फसलों में जिंक की कमी दूर हो जाएगी।

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