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Production Know How

Production Know How
26
Sep

फ़सल के पौधों (चावल) पर रोग/पीड़क के हमले पर नाइट्रोजन (N) की भूमिका

1. खनिज पोषण तत्त्वों के बीच  पौधों के प्रतिरोध पर N का सबसे अधिक प्रभाव होता है। 

2. पोषक पौधे का रोगों/पीड़कों के प्रति प्रतिरोध पर N की बढ़ती भूमिका रिसर्च खेतों तथा उद्यान फ़सलों के मैनेजर/किसानों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है। 

3. अन्य प्रमुख पोषणों की तुलना में अत्यधिक N अनुप्रयोग (9.5: 3.0: 1.0 NPK) पौधे की संवेदनशीलता को बढ़ाता है। N  की बढ़ती हुई आपूर्ति तथा पीड़कों/रोगों के प्रति प्रतिरोध के बीच सामान्यतः एक नकारात्मक संबंध देखा गया है।  

File Courtesy: 
DRR टेक्निकल बुलेटिन नं. 11, 2004-2005, एम. नारायण रेड्डी, आर. महेन्दर कुमार तथा बी. मिश्रा, चावल आधारित फ़सल प्रणाली हेतु स्थल-विशिष्ट समेकित पोषण प्रबंधन
26
Sep

समेकित पीड़क/रोग प्रबंधन में पोषण प्रबंधन रणनीति की संभावना

1. यद्यपि प्रतिरोध/सहनशीलता का नियंत्रण जीन के जरिए होता है, उनकी अभिव्यक्ति कई सारे पर्यावरणीय कारकों (पारिस्थितिक प्रतिरोध) के जरिए प्रभावित होती है।  

2. पोषक पौधे की वृद्धि तथा आकार जो पौधे की पोषण स्थिति/पोषण गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं, ऐसे ही कुछ पर्यावरणीय कारक है। हालांकि इसका प्रबंधन संवेदनशील होता है।   

3. नियम के अनुसार पौधे के प्रतिरोध पर खनिज पोषण का प्रभाव उच्च प्रतिरोधक तथा उच्च संवेदनशील किस्मों पर काफी कम होता है, पर यह प्रभाव मध्यम रूप से संवेदनशील/प्रतिरोधक किस्मों (फील्ड प्रतिरोध) पर काफी अधिक होता है।  

File Courtesy: 
DRR टेक्निकल बुलेटिन नं. 11, 2004-2005, एम. नारायण रेड्डी, आर. महेन्दर कुमार तथा बी. मिश्रा, चावल आधारित फ़सल प्रणाली हेतु स्थल-विशिष्ट समेकित पोषण प्रबंधन
26
Sep

फ़सल वाले पौधों के खनिज पोषण स्थिति का रोगों तथा पीड़कों पर प्रभाव

1.Balanced nutrition is the key to crop plants relative to plant health besides crop productivity.  पौधों के स्वास्थ्य तथा उनकी उत्पादकता के लिए संतुलित पोषण काफी अहम होता है। 

2. फ़सल की वृद्धि/उपज पर खनिज पोषण का प्रभाव को अच्छी तरह से अध्ययन किया गया है तथा पौधे की वृद्धि/उपापचय में सामान्यतः उनके संरचनात्मक/शरीर-क्रिया वैज्ञानिक/जैव-रसायनिक कार्य की व्याख्या की जाती है। 

3. उर्वरकों के इस्तेमाल के जरिए कई बार किसान अधिक उपज पाने के लिए उनका असंतुलित उपयोग करते हैं, जो चावल जैसी फ़सल में रोगों/पीड़कों की अधिक संभावना उत्पन्न करता है।   

File Courtesy: 
DRR टेक्निकल बुलेटिन नं. 11, 2004-2005, एम. नारायण रेड्डी, आर. महेन्दर कुमार तथा बी. मिश्रा, चावल आधारित फ़सल प्रणाली हेतु स्थल-विशिष्ट समेकित पोषण प्रबंधन
26
Sep

लवण दाब में राहत

1.NaCl (10 mM सांद्रण) के साथ बीजों में कड़ापन लाना।  

2. जिप्सम @ 50% का अनुप्रयोग।

3. रोपण से पहले डैंचा (6.25 t/ha) का अनुप्रयोग।

4.0.5 ppm ब्रासिनोडोल का फोलियर स्प्रे फोटो-संश्लेषण गतिविधि को बढ़ाता है। 

5. क्रिटिकल अवस्था में 2% DAP + 1% KCl (MOP) का फोलियर स्प्रे 

6.100 ppm सेलिसाइलिक अम्ल का स्प्रे 

7.  समय से पूर्व फूल/कलियों/फलों को झड़ने से बचाने के लिए 40 ppm NAA का स्प्रे 

8.  उच्च स्थिति में नाइट्रोजन (25%) की अतिरिक्त ख़ुराक 

9.N तथा K उर्वरकों का स्प्लिट अनुप्रयोग 

File Courtesy: 
TNRRI,अदुथुरई
26
Sep

फ़सल के प्रजनन संबंधी वृद्धि तथा उपज पर लवण की दाब का प्रभाव

1. लवण दाब स्थिति में स्रोत के आकार की लवण की सीमा के कारण

निम्न में विलम्ब हो जाती है: जनन से जुड़ी संरचनाओं की संख्या, जैसे फूलों की संख्या/पुष्प-गुच्छों की संख्या काफी कम हो जाती है। 

2. ऊतक में लवणों की अत्यधिक मात्रा के संचय के कारण, प्रोटीन, एमीनो अम्ल, शर्करा तथा अन्य कार्बनिक यौगिकों का संश्लेषण बाधित हो जाता है। 

3. सामान्य मेटाबॉलिज्म के बाधित होने से निर्माण स्थल से मेटाबोलाइट की उपयोग स्थल की ओर गतिशीलता प्रभावित होती है। 

File Courtesy: 
TNRRI,अदुथुरई
Image Courtesy: 
TNRRI, अदुतुराई
26
Sep

फ़सल की प्रकाश-संश्लेषण क्षमता पर लवण दाब का प्रभाव

1. क्लोरोप्लास्ट में Na2 तथा Cl- के उच्च जमाव से प्रकाश-संश्लेषण बाधित हो जाता है।    

2. चूंकि  प्रकाश-संश्लेषण से जुड़े इलेक्ट्रॉनों का परिवहन लवण के प्रति अपेक्षाकृत अवंदेनशील होता है, इसलिए कार्बन मेटाबॉलिज्म अथवा फोटो-फॉस्पोरिलेशन प्रभावित हो सकता है।  

3.  प्रकाश-संश्लेषी एंजाइम या कार्बन स्वागीकरण के लिए जिम्मेदार एंजाइम्स  NaCl की उपस्थिति के प्रति काफी संवेदनशील होते हैं। 

 

26
Sep

फ़सल की वर्धी वृद्धि अवस्था पर लवण दाब का प्रभाव

1. मिट्टी तथा जड़ क्षेत्र में आयनों के जमाव से, पौधे जल का अवशोषण में

अक्षम हो जाते हैं और इस लिए पौधों में जल की कमी उत्पन्न हो जाती है, जिसे फीजियोलॉजिकल ड्रॉट कहते हैं। 

2. वर्धी अवस्था के दौरान, लवण प्ररित जल से स्टोमेटा बंद हो जाता है, जिससे  CO2 के स्वांगीकरण तथा प्रस्वेदन में कमी हो जाती है। 

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TNRRI,अदुथुरई
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TNRRI, अदुतुराई
26
Sep

1. फ़सल अंकुरण पर लवण दाब का प्रभाव

1. खारेपन की स्थिति में बीजों का अंकुरण तीन तरीके से प्रभावित होता है। 

2. मृदा घोल का परासरण में वृद्धि से बीजों में जल का अवशोषण तथा प्रवेश पर रोग लगती है। 

3. कुछ लवण घटक भ्रूण तथा बिचड़ों के लिए विषैले होते हैं। CO3, NO3, Cl-, SO4 जैसे एनायन बीज के अंकुरण के लिए अधिक हानिकारक होते हैं। 

4. लवण दाब से संचित सामग्रियों के मेटाबॉलिज्म बाधित होता है। प्रोटीएज एंजाइम बीज में घुलनशील प्रोटीन को घुलनशील नाइट्रोजन में उत्प्रेरित करता है, जो लवणता द्वारा बाधित होता है।   

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TNRRI,अदुथुरई
26
Sep

फ़सल के पौधों पर लवणता के प्रमुख प्रभाव

1. परासरणीय प्रभाव या जल की कमी का प्रभाव।

पौधों द्वारा जल लेने की क्षमता को कम करता है तथा इसके कारण उनकी वृद्धि बाधित हो जाती है। यह लवणता का परासरणीय या जल की कमी का प्रभाव होता है।

2. लवण का विशेष प्रभाव तथा आयन अधिकता का प्रभाव

प्रस्वेदन प्रभाव में लवण के प्रवेश करने से पत्तियों में प्रस्वेदन के दौरान कोशिकाएं घायल होती हैं, जिससे उनकी वृद्धि रुक जाती हैं।

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TNRRI,अदुथुरई
26
Sep

2) गैर खारा मिट्टी – क्षारीय मिट्टी: (सॉडिक मिट्टी) & 3) लवणीय क्षारीय मिट्टी

2) गैर खारा मिट्टी – क्षारीय मिट्टी: (सॉडिक मिट्टी) 

निम्न घुलनशील लवण, EC < 4 dS/m

विनिमय योग्य Na प्रतिशता > 15

pH is > 8.5

3) लवणीय क्षारीय मिट्टी

ESP युक्त घुलनशील लवण की उच्च सांद्रता 15 से अधिक। 

फ़सल की वृद्धि तथा विकास पर लवण दाब का प्रभाव। 

 

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TNRRI,अदुथुरई
26
Sep

1) खारा मिट्टी

लवण की सांद्रता अधिक होती है तथा मिट्टी की EC > 4 dS/m

विनिमय योग्य सोडियम प्रतिशतता < 15

pH मान 8.5 से कम

File Courtesy: 
TNRRI,अदुथुरई
Image Courtesy: 
DRR SSINM
26
Sep

लवणता का वर्गीकरण

1) खारा मिट्टी

2) गैर-खारा- क्षारीय मिट्टी: (सॉडिक मिट्टी)

3) Saline alkali soils खारा क्षारीय मिट्टी

File Courtesy: 
TNRRI,अदुथुरई
26
Sep

मृदा लवणता के कारण

लवण दाब मुख्यतः दो कारकों से उत्पन्न होती है: 

1. सिंचाई जल 

सिंचाई के लिए भूमिगत जल का निरंतर प्रयोग, जिसके कारण भूमिगत क्षेत्र में अतिरिक्त नमक जमा होता है।  

2. मिट्टी के प्रकार 

वर्षापोषित स्थिति में उच्च वाष्पन-प्रस्वेदन के कारण, जल मिट्टी की संरचना से होकर ऊपर की ओर बढ़त अहै और मिट्टी की सतह पर लवण का निर्माण होता है।  

 

File Courtesy: 
TNRRI,अदुथुरई
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TNRRI, अदुतुराई
26
Sep

लवणता

1. लवणता दुनियाभर में फ़सल की वृद्धि तथा उत्पादकता को प्रभावित

करने वाला कारक है। पौधों में लवण दाब मिट्टी में लवण की अत्यधिक मात्रा के कारण उत्पन्न होता है, जिससे मिट्टी का जल विभव कम हो जाता है और मृदा घोल पौधे के अनुपलब्ध हो जाता है। 

एक आकलन के मुताबिक धरती पर लगभग एक तिहाई सिंचित भूमि लवण दाब से प्रभावित है। दुनिया भर में 1.5 अरब हेक्टेयर के कृषि भूमि का 23% लवणता तथा 37% सॉडिसिटी से प्रभावित है।      

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TNRRI, अदुतुराई
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TNRRI, अदुतुराई
26
Sep

Al की विषाक्तता का प्रबंधन

1. अम्ल उच्चभूमि वाली मिट्टी में Al की विषाक्तता को चूने @

1.5 –2.0 t ha-1 के प्रयोग से सुधारा जा सकता है। 

2. उप-मृदा अम्लीयता के सुधार के लिए जिप्सम तथा जिप्सम युक्त P (SSP) जैसे घुलनशील स्रोत की अनुशंसा की जाती है। 

3.Al के प्रति सहनशील पौधे की खेती, जो अपने जड़ों की मदद से  Al को बाहर या असंघटित करता तथा P, Mg तथा Ca का जमाव करता है। 

File Courtesy: 
DRR टेक्निकल बुलेटिन नं. 11, 2004-2005, एम. नारायण रेड्डी, आर. महेन्दर कुमार तथा बी. मिश्रा, चावल आधारित फ़सल प्रणाली हेतु स्थल-विशिष्ट समेकित पोषण प्रबंधन
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NEH कॉम्प्लेक्स
26
Sep

Al विषाक्तता के कारण

1. निम्न मृदा pH (<5.0) जैसा कि उच्च भूमि की अम्लीय मिट्टी में

देखा जाता है,जिससे Mg, P तथा Ca की गंभीर कमी होती है। 

2. की कमी वाली उच्च भूमिक वाली मिट्टियां। 

3. एसिड सल्फेट मिट्टी, जहां जलमग्नता से पहले (थायलैंड में) चावल को उच्चभूमि फ़सल के रूप में उपजाया जाता है।  

 

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DRR टेक्निकल बुलेटिन नं. 11, 2004-2005, एम. नारायण रेड्डी, आर. महेन्दर कुमार तथा बी. मिश्रा, चावल आधारित फ़सल प्रणाली हेतु स्थल-विशिष्ट समेकित पोषण प्रबंधन
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NEH कॉम्प्लेक्स
26
Sep

ऐल्युमीनियम की विषाक्तता के लक्षण

1. प्रभावित पत्तियां नारंगी पीली हो जाती है, जो अंतर्शिरीय क्लोरोसिस

को दिखाती है। 

2. गंभीर विषाक्तता की स्थिति में नेक्रोसिस उत्पन्न होता है। 

3. जड़ का अग्रभाग तथा पार्श्वीय जड़ विकृत हो जाते हैं तथा वे मोटे/भूरे हो जाते हैं, जिससे सूखे की संभावना बढ़ती है। 

 

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DRR टेक्निकल बुलेटिन नं. 11, 2004-2005, एम. नारायण रेड्डी, आर. महेन्दर कुमार तथा बी. मिश्रा, चावल आधारित फ़सल प्रणाली हेतु स्थल-विशिष्ट समेकित पोषण प्रबंधन
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NEH कॉम्प्लेक्स
26
Sep

ऐल्युमीनियम (AL)

1. पृथ्वी की पपड़ी में सबसे प्रचुर मात्रा में पाये जाने के कारण  ऐल्युमीनियम (Al) सभी मिट्टियों में मौजूद रहता है। 

2.Al की घुलनशीलता उदासीन/क्षारीय मिट्टी में काफी कम रहती है। हालांकि यह  pH <5.0. मान वाली अम्लीय मिट्टी में विषाक्त मात्रा में मौजूद रहता है।  

3. ऐल्युमीनियम (Al) की विषाक्तता  विषाक्तता निम्नभूमि / सिंचित अम्लीय मिट्टी में अधिक खतरा नहीं मानी जाती। 

4.Al विषाक्तता की समस्या मुख्यतः जलजमाव से पहले वर्षापोषित उच्च भूमि के अम्लीय मिट्टी/ एसिड सल्फेट वाली मिट्टी में देखी जाती है। 

 

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DRR टेक्निकल बुलेटिन नं. 11, 2004-2005, एम. नारायण रेड्डी, आर. महेन्दर कुमार तथा बी. मिश्रा, चावल आधारित फ़सल प्रणाली हेतु स्थल-विशिष्ट समेकित पोषण प्रबंधन
26
Sep

Si की अपर्याप्तता का प्रबंधन

1. न्यायपूर्ण तथा संतुलित N अनुप्रयोग ताकि पौधों में Si की मात्रा क्रिटिकल स्तर से कम न जाए। 

2. चावल की फ़सल के अवशेष का पुनर्चक्रण।

3. खासकर चावल के छिलके (8% Si) तथा सामान्य रूप से चावल के तिनके (4-5 % Si) Si के अच्छे स्रोत होते हैं। हालांकि, इन स्रोतों से Si की प्राप्ति काफी धीमी गति से होती है, इसलिए यह केवल लंबे समय के स्रोत के रूप में ही उपयुक्त माने जाते हैं।

4. चावल के छिलकों से अनुप्रयोग से मृदा में तथा Si के स्रोत में सुधार हो सकता है। चावल के छिलके की राख (33-40 % Si) भी Si का एक अच्छा स्रोत माना जाता है। 

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DRR टेक्निकल बुलेटिन नं. 11, 2004-2005, एम. नारायण रेड्डी, आर. महेन्दर कुमार तथा बी. मिश्रा, चावल आधारित फ़सल प्रणाली हेतु स्थल-विशिष्ट समेकित पोषण प्रबंधन
26
Sep

Si की कम मात्रा के कारण

1. प्रबल रूप से ऋतुक्षरित उष्णकटिबंधीय अम्ल मृदा (ऑक्सीसोल्स) जिसमें

निक्षालन के कारण Si की कमी रहती है, जिससे उच्च भूमि की अम्ल मृदा में Si की कमी उत्पन्न होती है।

2. समशीतोष्ण (जापान, कोरिया,ताइवान) तथा उपोष्ण कटिबंधीय क्षेत्र (श्रीलंका और वियतनाम) में कमजोर चावल फ़सल के कारण Si कमी दिखाई पड़ती है। 

3. कार्बनिक मिट्टी /पीट मिट्टी में (इंडोनेशिया, मलेशिया तथा फ्लोरिडा- USA) उगने वाली चावल की फ़सल को Si की गंभीर कमी का सामना करना पड़ता है। 

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DRR टेक्निकल बुलेटिन नं. 11, 2004-2005, एम. नारायण रेड्डी, आर. महेन्दर कुमार तथा बी. मिश्रा, चावल आधारित फ़सल प्रणाली हेतु स्थल-विशिष्ट समेकित पोषण प्रबंधन
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NEH कॉम्प्लेक्स
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