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Rice Soils

Rice Soils
8
Aug

वर्षा आधारित उच्चभूमि चावल पारितंत्र

वर्षा आधारित उच्चभूमि चावल पारितंत्र

1. एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका में उच्च भूमि वाले क्षेत्र पाए जाते हैं।

2. भारत में, वर्षा आधारित उच्चभूमि चावल की खेती के अंतर्गत करीब 60 लाख हे. क्षेत्रफल आता है जो देश में कुल चावल के क्षेत्रफल का 13.5% है।

3. वर्षा आधारित उच्चभूमि चावल की खेती पूर्वी क्षेत्र में की जाती है जिसमें ये प्रदेश आते हैं:

File Courtesy: 
http://www.rice-trade .com/rice-eco-system.html
Image Courtesy: 
BAU, Ranchi
8
Aug

वर्षा आधारित निम्नभूमि चावल पारितंत्र

वर्षा आधारित निम्नभूमि चावल पारितंत्र

वर्षा आधारित निम्नभूमि चावल पारितंत्र

1. वर्षा आधारित निम्नभूमि चावल की खेती पूर्वी भारत, बांग्लादेश, इंडोनेशिया, फिलिपींस और थाइलैंड में होती है जिसके अंतर्गत कुल वैश्विक चावल की खेती का 25% क्षेत्रफल है।

2. भारत में, वर्षा आधारित निम्नभूमि चावल का क्षेत्रफल 1.44 करोड़ हे. है जो कुल चावल की खेती का 32.4% है।

3. चावल उत्पादन की पर्याप्त तकनीक के अभाव और विभिन्न पर्यावरणीय दशाओं के कारण उत्पादन में स्थिरता नहीं है।

File Courtesy: 
http://www.rice-t rade.com/rice-eco-system.html
8
Aug

सिंचित चावल पारितंत्र

सिंचित चावल पारितंत्र

1. सिंचित चावल पारितंत्र

2. सिंचित चावल पारितंत्र द. एशिया में पाया जाने वाला मुख्य पारितंत्र है।

3. सिंचित चावल पारितंत्र वैश्विक चावल उत्पादन का 75% है।

4. भारत में, चावल का कुल सिंचित क्षेत्र लगभग 2.2करोड़ हे. है जो कुल चावल की खेती के क्षेत्रफल का 49.5% है।

5. इन राज्यों में चावल की खेती सिंचित दशाओं में होती है:

File Courtesy: 
http://www.rice-tra de.com/rice-eco-system.html
Image Courtesy: 
Mr.Chaitanya, DRR
8
Aug

सिंचित चावल पारितंत्र

सिंचित चावल पारितंत्र

1. सिंचित चावल पारितंत्र

2. सिंचित चावल पारितंत्र द. एशिया में पाया जाने वाला मुख्य पारितंत्र है।

3. सिंचित चावल पारितंत्र वैश्विक चावल उत्पादन का 75% है।

4. भारत में, चावल का कुल सिंचित क्षेत्र लगभग 2.2करोड़ हे. है जो कुल चावल की खेती के क्षेत्रफल का 49.5% है।

5. इन राज्यों में चावल की खेती सिंचित दशाओं में होती है:

8
Aug

चावल की खेती वाले पारितंत्र, भारत के विभिन्न चावल पारितंत्र

चावल की खेती वाले पारितंत्र

1. चावल की खेती भारत के कई कृषि पारितंत्रों में की जाती है। दुनिया के किसी भी अन्य देश में चावल के इतने विविध पारितंत्र नहीं हैं।

2. चूंकि चावल की खेती इतनी व्यापक है, भारत में चार प्रकार के पारितंत्र विकसित हुए हैं।

भारत के विभिन्न चावल पारितंत्र

भारत में चावल के चार पारितंत्र पाए जाते हैं:

1. सिंचित चावल पारितंत्र

2. वर्षा आधारित उच्चभूमि चावल पारितंत्र

3. वर्षा आधारित निम्नभूमि चावल पारितंत्र

4. बाढ़ वाला चावल पारितंत्र

File Courtesy: 
http://www.rice-trade.co m/rice-eco-system.html
8
Aug

शुष्क पश्चिमी मैदान

शुष्क पश्चिमी मैदान

शुष्क पश्चिमी मैदान के अंतर्गत आते हैं:

  • हरियाणा
  • राजस्थान
  • गुजरात
  • दादरा और नगर हवेली

मुख्य मृदा-समूह हैं:

  • जलोढ़ मिट्टी
  • लाल-पीली मिट्टी
  • मध्यम से लेकर गहरी काली मिट्टी
File Courtesy: 
http://www.rice-trade .com/arid-western-plains.html
8
Aug

सतलज-गंगा का उप-आर्द्र जलोढ़ मैदान

सतलज-गंगा का उप-आर्द्र जलोढ़ मैदान

इस क्षेत्र में मई-जून से सितंबर-अक्टूबर तक चावल की एकल फसल उगाई जाती है। जाड़ॆ में तापमान कम रहता है।

सतलज-गंगा के उप-आर्द्र जलोढ़ मैदान में ये राज्य आते हैं:

  • पंजाब
  • उत्तरप्रदेश
  • बिहार
  • दिल्ली

मुख्य मृदा-समूह हैं:  

  • चूनायुक्त जलोढ़ मिट्टी
  • नदीय जलोढ़ मिट्टी
  • खारी और क्षारीय मिट्टी
  • लाल-पीली दुमट मिट्टी
  • मिश्रित लाल और काली मिट्टियां
  • लाल बलुई मिट्टी
File Courtesy: 
http://www.rice-trade .com/sutlej-ganga-allu vial-plains.html
8
Aug

अर्ध शुष्क लावा पठार और केन्द्रीय उच्च भूमि

अर्ध शुष्क लावा पठार और केन्द्रीय उच्च भूमि

इस क्षेत्र में निम्नलिखित राज्य आते हैं:

  • महाराष्ट्र
  • पश्चिमी और केन्द्रीय मध्य प्रदेश
  • गोवा, दमन और दीव

प्रमुख मृदा समूह:

File Courtesy: 
http://www.rice-trade.c om/central-highlands.html
8
Aug

आर्द्र पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र

आर्द्र पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र

इस क्षेत्र के प्रमुख मृदा समूह

1. उप-परवतीय मिट्टी

2. पहाड़ी मिट्टी

3. तराई मिट्टी

आर्द्र पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में निम्नलिखित प्रदेश आते हैं:

File Courtesy: 
http://www.rice-trade.com/humid-western-himalayan-region.html
8
Aug

पश्चिमी घाट और कर्नाटक के पठार का आर्द्र से लेकर अर्धशुष्क क्षेत्र

पश्चिमी घाट और कर्नाटक के पठार का आर्द्र से लेकर अर्धशुष्क क्षेत्र

इस क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले राज्य:

  • कर्नाटक
  • तमिलनाडु
  • केरल
  • पांडिचेरी और लक्षद्वीप के केन्द्रशासित प्रदेश

इस क्षेत्र की मिट्टियां

  • लैटेराइट मिट्टी
  • लाल बलुई या कंकड़ीली मिट्टी
  • लाल दोमट मिट्टी
  • तटीय जलोढ़ मिट्टी
File Courtesy: 
http://www.rice-trade.co m/karnataka-plateau.html
8
Aug

पूर्वी हिमालय का आर्द्र क्षेत्र

पूर्वी हिमालय का आर्द्र क्षेत्र

पूर्वी हिमालय का आर्द्र क्षेत्र और खाड़ी के द्वीपसमूह के अंतर्गत ये प्रदेश आते हैं:

  • अरुणाचल प्रदेश
  • नागालैंड
  • मणिपुर
  • मिजोरम
  • त्रिपुरा
  • मेघालय
  • अन्दमान और निकोबार द्वीप समूह

प्रमुख मृदा समूह :

  • लाल दोमट मिट्टी
  • लैटेराइट मिट्टी
  • लाल-पीली मिट्टी
  • जलोढ़ मिट्टी
File Courtesy: 
http://www.rice-trade.com/classification-soil-types.html
8
Aug

बंगाल–असम का आर्द्र बेसिन

बंगाल–असम का आर्द्र बेसिन

बंगाल–असम के आर्द्र बेसिन के अंतर्गत:

  • प. बंगाल
  • असम

मुख्य मृदा समूह:

  • नदीय जलोढ़
  • तराई मिट्टी
  • लैटेराइट मिट्टी
  • लाल-पीली दोमट
  • लाल बलुई मिट्टी
File Courtesy: 
http://www.rice-trade.com/classification-soil-types.html
8
Aug

शुष्क पश्चिमी मैदान

शुष्क पश्चिमी मैदान

शुष्क पश्चिमी मैदान के अंतर्गत आते हैं:

  • हरियाणा
  • राजस्थान
  • गुजरात
  • दादरा और नगर हवेली

मुख्य मृदा-समूह हैं:

  • जलोढ़ मिट्टी
  • लाल-पीली मिट्टी
  • मध्यम से लेकर गहरी काली मिट्टी
File Courtesy: 
http://www.rice-trade.com/classification-soil-types.html
8
Aug

देश में चावल उत्पादक विभिन्न प्रकार की मिट्टियों का क्षेत्रवार विवरण

देश में चावल उत्पादक विभिन्न प्रकार की मिट्टियों का क्षेत्रवार विवरण

1. शुष्क पश्चिमी मैदान

2. बंगाल–असम का आर्द्र बेसिन

3. पूर्वी हिमालय का आर्द्र क्षेत्र

4. पश्चिमी घाट और कर्नाटक का आर्द्र से लेकर अर्धशुष्क क्षेत्र

5. पश्चिमी हिमालय का आर्द्र क्षेत्र

6. अर्ध शुष्क लावा पठार और केन्द्रीय उच्च भूमि

7. सतलज-गंगा का उप-आर्द्र जलोढ़ मैदान

8. पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी उच्च भूमियों का उप-आर्द्र से लेकर आर्द्र क्षेत्र

File Courtesy: 
http://www.rice-trade.com/classification-soil-types.html
8
Aug

डेल्टाई जलोढ़ मिट्टी और तटीय जलोढ़ मिट्टी

डेल्टाई जलोढ़ मिट्टी

1. तटीय प्रदेशों में भरपूर रूप से उपजाऊ डेल्टाई जलोढ़ मिट्टी पाई जाती है जिस कारण इन प्रदेशों में चावल की व्यापक खेती की जाती है।

2. डेल्टाओं की जलोढ़ मिट्टी अत्यंत गहरी, अच्छे अपवाह वाली और बहुत ही उपजाऊ होती है।

तटीय जलोढ़ मिट्टी

1. इस प्रकार की मिट्टी अधिक पारगम्यता के साथ पश्चिमी तट पर पाई जाती है। इनका निर्माण हाल के समुद्री निक्षेपों से हुआ है।

2. इस मिट्टी में जैव पदार्थों की कमी पाई जाती है। निम्न CEC . जल धारण की क्षमता कम होती है।

File Courtesy: 
http://www.rice-trade.com/classification-soil-types.html
8
Aug

लाल मिट्टी और काली मिट्टी

लाल मिट्टी

1. मिट्टी का लाल रंग आमतौर पर लौह ऑक्साइड के रूप में लोहे की उच्च मात्रा की उपस्थिति को दर्शाता है जो मिट्टी के कणों को आवृत की हुई होती है।

2. ये मिट्टियां अम्लीय होती हैं और पोटैसियम की मात्रा इनमें भरपूर जबकि फॉसफोरस कम पाया जाता है।

काली मिट्टी

1. काली मिट्टी का विस्तार मुख्य रूप से दक्कन के लावा पठार, मालवा पठार और गुजरात के भीतरी भागों में पाया जाता है जहां हल्की वर्षा होती है और जमीन में नीचे बैसाल्ट चट्टान पाई जाती है।

2. कभी-कभी काली मिट्टी लाल मिट्टी वाले क्षेत्रों में पृथक रूप से भी पाई जाती है।

File Courtesy: 
http://www.rice-trade.com/classification-soil-types.html
8
Aug

खारी (लवणयुक्त) और क्षारीय मिट्टी और लाल पीली दोमट मिट्टी

खारी (लवणयुक्त) और क्षारीय मिट्टी

  • खारी (लवणयुक्त) और क्षारीय मिट्टी अत्यधिक क्षारीय होती है और नीचे की पटल कठोर होती है जिस कारण जल की नीचे की ओर केशिकीय गति नहीं हो पाती.

लाल पीली दोमट मिट्टी

  • इस प्रकार की मिट्टियां प्रायद्विपीय भारत के गैर जलोढ़ क्षेत्र में व्यापक रूप से पाई जाती है।
  • ये मिट्टियां उन इलाकों में निर्मित होती हैं जहां वर्षा के कारण जमीन से घुलनशील खनिज का निक्षालन हो जाता है और परिणाम स्वरूप मिट्टी की मूल रासायनिक संरचना बिगड़ जाती है।
File Courtesy: 
http://www.rice-trade.com/classification-soil-types.html
8
Aug

नदीय जलोढ़ मिट्टी और लैटेराइट मिट्टी (Laterite Soils)

नदीय जलोढ़ मिट्टी

1. नदीय जलोढ़ मिट्टी नदियों के किनारे पाई जाती हैं।

2. जलोढ़ की प्रकृति और नदी के प्रवाह मार्ग के जलग्रहण-क्षेत्र की विशेषताओं के आधार पर यह मिट्टी व्यापक विभिन्नता दर्शाती है।

3. इसमें सामान्य मात्रा में जैव पदार्थ, N एवं K पाए जाते हैं।

Laterite Soils लैटेराइट मिट्टी

1. लैटेराइट मिट्टी का रंग लाल होता है लेकिन यह लाल मिट्टी से अलग होती है।

2. लैटेराइट मिट्टी भारी वर्षा और ऊंचे तापमान वाले इलाकों में पाई जाती है।

3. यह मिट्टी अम्लीय ( pH मान 4.0-5.0 तक) होती है।

File Courtesy: 
http://www.rice-trade.com/classification-soil-types.html
8
Aug

Tarai Soils तराई मिट्टी और चूनायुक्त जलोढ़ मिट्टी

Tarai Soils तराई मिट्टी

1. पर्याप्त वर्षा और उच्च भूगर्भीय जलस्तर के कारण ये मिट्टियां नमी से सदैव संतृप्त रहती हैं।

2. इन मिट्टियों का निर्माण हिमालय से निकलने वाली विभिन्न नदियों द्वारा लाई गई कणों से हुआ है।

3. तराई मिट्टियां काफी उपजाऊ और ऊर्वरकों के प्रति अत्यंत अनुक्रियाशील होती हैं।

चूनायुक्त जलोढ़ मिट्टी

1. जलोढ़ मिट्टियां पोटाश और कैलसियम से भरपूर होती हैं किंतु इनमें जैव पदार्थों और फॉसफोरस की कमी पायी जाती है।

File Courtesy: 
http://www.rice-trade.com/classification-soil-types.html
8
Aug

उप-पर्वतीय मिट्टी और पहाड़ी मिट्टी (Hill Soils)

1) उप-पर्वतीय मिट्टी

  •  इन मिट्टियों का निर्माण घाटी की तली में झेलम और सिन्धु नदियों द्वारा लाए गए जलोढ़ निक्षेपों दे हुआ है।
  • ये गाद भरी दोमट से लेकर चिकनी दोमट तक और उदासीन से लेकर क्षारीय प्रकृति तक की होती हैं।

2) Hill Soils पहाड़ी मिट्टी

  • ऊंचाई के अनुसार ये मिट्टियां कम मोटाई की परतों में और पत्थर के टुकड़ों से युक्त होती हैं। इन्हें लाल दोमट, भूरी वन्य मिट्टी, घासस्थली मिट्टी और राख-मिट्टी ( podzolic soil) के रूप में वर्गीकृत किया जाता है।
File Courtesy: 
http://www.rice-trade.com /classification-soil-types .html
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