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Rice Soils

Rice Soils
26
Sep

फ़सल के प्रजनन संबंधी वृद्धि तथा उपज पर लवण की दाब का प्रभाव

1. लवण दाब स्थिति में स्रोत के आकार की लवण की सीमा के कारण

निम्न में विलम्ब हो जाती है: जनन से जुड़ी संरचनाओं की संख्या, जैसे फूलों की संख्या/पुष्प-गुच्छों की संख्या काफी कम हो जाती है। 

2. ऊतक में लवणों की अत्यधिक मात्रा के संचय के कारण, प्रोटीन, एमीनो अम्ल, शर्करा तथा अन्य कार्बनिक यौगिकों का संश्लेषण बाधित हो जाता है। 

3. सामान्य मेटाबॉलिज्म के बाधित होने से निर्माण स्थल से मेटाबोलाइट की उपयोग स्थल की ओर गतिशीलता प्रभावित होती है। 

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TNRRI,अदुथुरई
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TNRRI, अदुतुराई
26
Sep

फ़सल की प्रकाश-संश्लेषण क्षमता पर लवण दाब का प्रभाव

1. क्लोरोप्लास्ट में Na2 तथा Cl- के उच्च जमाव से प्रकाश-संश्लेषण बाधित हो जाता है।    

2. चूंकि  प्रकाश-संश्लेषण से जुड़े इलेक्ट्रॉनों का परिवहन लवण के प्रति अपेक्षाकृत अवंदेनशील होता है, इसलिए कार्बन मेटाबॉलिज्म अथवा फोटो-फॉस्पोरिलेशन प्रभावित हो सकता है।  

3.  प्रकाश-संश्लेषी एंजाइम या कार्बन स्वागीकरण के लिए जिम्मेदार एंजाइम्स  NaCl की उपस्थिति के प्रति काफी संवेदनशील होते हैं। 

 

26
Sep

फ़सल की वर्धी वृद्धि अवस्था पर लवण दाब का प्रभाव

1. मिट्टी तथा जड़ क्षेत्र में आयनों के जमाव से, पौधे जल का अवशोषण में

अक्षम हो जाते हैं और इस लिए पौधों में जल की कमी उत्पन्न हो जाती है, जिसे फीजियोलॉजिकल ड्रॉट कहते हैं। 

2. वर्धी अवस्था के दौरान, लवण प्ररित जल से स्टोमेटा बंद हो जाता है, जिससे  CO2 के स्वांगीकरण तथा प्रस्वेदन में कमी हो जाती है। 

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TNRRI,अदुथुरई
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TNRRI, अदुतुराई
26
Sep

1. फ़सल अंकुरण पर लवण दाब का प्रभाव

1. खारेपन की स्थिति में बीजों का अंकुरण तीन तरीके से प्रभावित होता है। 

2. मृदा घोल का परासरण में वृद्धि से बीजों में जल का अवशोषण तथा प्रवेश पर रोग लगती है। 

3. कुछ लवण घटक भ्रूण तथा बिचड़ों के लिए विषैले होते हैं। CO3, NO3, Cl-, SO4 जैसे एनायन बीज के अंकुरण के लिए अधिक हानिकारक होते हैं। 

4. लवण दाब से संचित सामग्रियों के मेटाबॉलिज्म बाधित होता है। प्रोटीएज एंजाइम बीज में घुलनशील प्रोटीन को घुलनशील नाइट्रोजन में उत्प्रेरित करता है, जो लवणता द्वारा बाधित होता है।   

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TNRRI,अदुथुरई
26
Sep

फ़सल के पौधों पर लवणता के प्रमुख प्रभाव

1. परासरणीय प्रभाव या जल की कमी का प्रभाव।

पौधों द्वारा जल लेने की क्षमता को कम करता है तथा इसके कारण उनकी वृद्धि बाधित हो जाती है। यह लवणता का परासरणीय या जल की कमी का प्रभाव होता है।

2. लवण का विशेष प्रभाव तथा आयन अधिकता का प्रभाव

प्रस्वेदन प्रभाव में लवण के प्रवेश करने से पत्तियों में प्रस्वेदन के दौरान कोशिकाएं घायल होती हैं, जिससे उनकी वृद्धि रुक जाती हैं।

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TNRRI,अदुथुरई
26
Sep

2) गैर खारा मिट्टी – क्षारीय मिट्टी: (सॉडिक मिट्टी) & 3) लवणीय क्षारीय मिट्टी

2) गैर खारा मिट्टी – क्षारीय मिट्टी: (सॉडिक मिट्टी) 

निम्न घुलनशील लवण, EC < 4 dS/m

विनिमय योग्य Na प्रतिशता > 15

pH is > 8.5

3) लवणीय क्षारीय मिट्टी

ESP युक्त घुलनशील लवण की उच्च सांद्रता 15 से अधिक। 

फ़सल की वृद्धि तथा विकास पर लवण दाब का प्रभाव। 

 

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TNRRI,अदुथुरई
26
Sep

1) खारा मिट्टी

लवण की सांद्रता अधिक होती है तथा मिट्टी की EC > 4 dS/m

विनिमय योग्य सोडियम प्रतिशतता < 15

pH मान 8.5 से कम

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TNRRI,अदुथुरई
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DRR SSINM
26
Sep

लवणता का वर्गीकरण

1) खारा मिट्टी

2) गैर-खारा- क्षारीय मिट्टी: (सॉडिक मिट्टी)

3) Saline alkali soils खारा क्षारीय मिट्टी

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TNRRI,अदुथुरई
26
Sep

मृदा लवणता के कारण

लवण दाब मुख्यतः दो कारकों से उत्पन्न होती है: 

1. सिंचाई जल 

सिंचाई के लिए भूमिगत जल का निरंतर प्रयोग, जिसके कारण भूमिगत क्षेत्र में अतिरिक्त नमक जमा होता है।  

2. मिट्टी के प्रकार 

वर्षापोषित स्थिति में उच्च वाष्पन-प्रस्वेदन के कारण, जल मिट्टी की संरचना से होकर ऊपर की ओर बढ़त अहै और मिट्टी की सतह पर लवण का निर्माण होता है।  

 

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TNRRI,अदुथुरई
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TNRRI, अदुतुराई
26
Sep

लवणता

1. लवणता दुनियाभर में फ़सल की वृद्धि तथा उत्पादकता को प्रभावित

करने वाला कारक है। पौधों में लवण दाब मिट्टी में लवण की अत्यधिक मात्रा के कारण उत्पन्न होता है, जिससे मिट्टी का जल विभव कम हो जाता है और मृदा घोल पौधे के अनुपलब्ध हो जाता है। 

एक आकलन के मुताबिक धरती पर लगभग एक तिहाई सिंचित भूमि लवण दाब से प्रभावित है। दुनिया भर में 1.5 अरब हेक्टेयर के कृषि भूमि का 23% लवणता तथा 37% सॉडिसिटी से प्रभावित है।      

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TNRRI, अदुतुराई
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TNRRI, अदुतुराई
26
Sep

Al की विषाक्तता का प्रबंधन

1. अम्ल उच्चभूमि वाली मिट्टी में Al की विषाक्तता को चूने @

1.5 –2.0 t ha-1 के प्रयोग से सुधारा जा सकता है। 

2. उप-मृदा अम्लीयता के सुधार के लिए जिप्सम तथा जिप्सम युक्त P (SSP) जैसे घुलनशील स्रोत की अनुशंसा की जाती है। 

3.Al के प्रति सहनशील पौधे की खेती, जो अपने जड़ों की मदद से  Al को बाहर या असंघटित करता तथा P, Mg तथा Ca का जमाव करता है। 

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DRR टेक्निकल बुलेटिन नं. 11, 2004-2005, एम. नारायण रेड्डी, आर. महेन्दर कुमार तथा बी. मिश्रा, चावल आधारित फ़सल प्रणाली हेतु स्थल-विशिष्ट समेकित पोषण प्रबंधन
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NEH कॉम्प्लेक्स
26
Sep

Al विषाक्तता के कारण

1. निम्न मृदा pH (<5.0) जैसा कि उच्च भूमि की अम्लीय मिट्टी में

देखा जाता है,जिससे Mg, P तथा Ca की गंभीर कमी होती है। 

2. की कमी वाली उच्च भूमिक वाली मिट्टियां। 

3. एसिड सल्फेट मिट्टी, जहां जलमग्नता से पहले (थायलैंड में) चावल को उच्चभूमि फ़सल के रूप में उपजाया जाता है।  

 

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DRR टेक्निकल बुलेटिन नं. 11, 2004-2005, एम. नारायण रेड्डी, आर. महेन्दर कुमार तथा बी. मिश्रा, चावल आधारित फ़सल प्रणाली हेतु स्थल-विशिष्ट समेकित पोषण प्रबंधन
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NEH कॉम्प्लेक्स
26
Sep

ऐल्युमीनियम की विषाक्तता के लक्षण

1. प्रभावित पत्तियां नारंगी पीली हो जाती है, जो अंतर्शिरीय क्लोरोसिस

को दिखाती है। 

2. गंभीर विषाक्तता की स्थिति में नेक्रोसिस उत्पन्न होता है। 

3. जड़ का अग्रभाग तथा पार्श्वीय जड़ विकृत हो जाते हैं तथा वे मोटे/भूरे हो जाते हैं, जिससे सूखे की संभावना बढ़ती है। 

 

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DRR टेक्निकल बुलेटिन नं. 11, 2004-2005, एम. नारायण रेड्डी, आर. महेन्दर कुमार तथा बी. मिश्रा, चावल आधारित फ़सल प्रणाली हेतु स्थल-विशिष्ट समेकित पोषण प्रबंधन
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NEH कॉम्प्लेक्स
26
Sep

ऐल्युमीनियम (AL)

1. पृथ्वी की पपड़ी में सबसे प्रचुर मात्रा में पाये जाने के कारण  ऐल्युमीनियम (Al) सभी मिट्टियों में मौजूद रहता है। 

2.Al की घुलनशीलता उदासीन/क्षारीय मिट्टी में काफी कम रहती है। हालांकि यह  pH <5.0. मान वाली अम्लीय मिट्टी में विषाक्त मात्रा में मौजूद रहता है।  

3. ऐल्युमीनियम (Al) की विषाक्तता  विषाक्तता निम्नभूमि / सिंचित अम्लीय मिट्टी में अधिक खतरा नहीं मानी जाती। 

4.Al विषाक्तता की समस्या मुख्यतः जलजमाव से पहले वर्षापोषित उच्च भूमि के अम्लीय मिट्टी/ एसिड सल्फेट वाली मिट्टी में देखी जाती है। 

 

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DRR टेक्निकल बुलेटिन नं. 11, 2004-2005, एम. नारायण रेड्डी, आर. महेन्दर कुमार तथा बी. मिश्रा, चावल आधारित फ़सल प्रणाली हेतु स्थल-विशिष्ट समेकित पोषण प्रबंधन
26
Sep

Si की अपर्याप्तता का प्रबंधन

1. न्यायपूर्ण तथा संतुलित N अनुप्रयोग ताकि पौधों में Si की मात्रा क्रिटिकल स्तर से कम न जाए। 

2. चावल की फ़सल के अवशेष का पुनर्चक्रण।

3. खासकर चावल के छिलके (8% Si) तथा सामान्य रूप से चावल के तिनके (4-5 % Si) Si के अच्छे स्रोत होते हैं। हालांकि, इन स्रोतों से Si की प्राप्ति काफी धीमी गति से होती है, इसलिए यह केवल लंबे समय के स्रोत के रूप में ही उपयुक्त माने जाते हैं।

4. चावल के छिलकों से अनुप्रयोग से मृदा में तथा Si के स्रोत में सुधार हो सकता है। चावल के छिलके की राख (33-40 % Si) भी Si का एक अच्छा स्रोत माना जाता है। 

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DRR टेक्निकल बुलेटिन नं. 11, 2004-2005, एम. नारायण रेड्डी, आर. महेन्दर कुमार तथा बी. मिश्रा, चावल आधारित फ़सल प्रणाली हेतु स्थल-विशिष्ट समेकित पोषण प्रबंधन
26
Sep

Si की कम मात्रा के कारण

1. प्रबल रूप से ऋतुक्षरित उष्णकटिबंधीय अम्ल मृदा (ऑक्सीसोल्स) जिसमें

निक्षालन के कारण Si की कमी रहती है, जिससे उच्च भूमि की अम्ल मृदा में Si की कमी उत्पन्न होती है।

2. समशीतोष्ण (जापान, कोरिया,ताइवान) तथा उपोष्ण कटिबंधीय क्षेत्र (श्रीलंका और वियतनाम) में कमजोर चावल फ़सल के कारण Si कमी दिखाई पड़ती है। 

3. कार्बनिक मिट्टी /पीट मिट्टी में (इंडोनेशिया, मलेशिया तथा फ्लोरिडा- USA) उगने वाली चावल की फ़सल को Si की गंभीर कमी का सामना करना पड़ता है। 

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DRR टेक्निकल बुलेटिन नं. 11, 2004-2005, एम. नारायण रेड्डी, आर. महेन्दर कुमार तथा बी. मिश्रा, चावल आधारित फ़सल प्रणाली हेतु स्थल-विशिष्ट समेकित पोषण प्रबंधन
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NEH कॉम्प्लेक्स
26
Sep

Si की निम्न मात्रा के लक्षण

1. पत्तियां मुलायम तथा ढीली-ढाली बन जाती हैं, जिससे पारस्परिक

पतन होता है तथा प्रकाश-संश्लेषण में कमी होती है। 

2. निचली पत्तियों का पीली या ब्राउन नेक्रोटिक में बदलना।  

3. राइस ब्लास्ट के रोग में वृद्धि होना। 

4. पत्तियों के शिखाग्र का मुर्झाना।

5. अनुर्वर शूकियों के उच्च अनुपात वाले छोटे पुष्प-गुच्छ। 

 

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DRR टेक्निकल बुलेटिन नं. 11, 2004-2005, एम. नारायण रेड्डी, आर. महेन्दर कुमार तथा बी. मिश्रा, चावल आधारित फ़सल प्रणाली हेतु स्थल-विशिष्ट समेकित पोषण प्रबंधन
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NEH कॉम्प्लेक्स
24
Sep

Si की लाभदायक भूमिकाएं

1.Si की अजैविक तथा जैविक दाब के कारण उत्पन्न प्रभाव में सुधार लाने में अहम भूमिका होता है। 

2. इसे Mn, Fe, Al आदि के विषैले प्रभावों के खिलाफ कार्य करने के लिए जाना जाता है (चावल की जड़ों की ऑक्सीकरण शक्ति में सुधार लाकर)।

3.Si को बाह्य स्तर के सिलिसिफिकेशन के जरिए ब्लास्ट, ब्राउस स्पॉट, शीथ ब्लाइट, भूरे टिड्डे, दीमक इत्यादि जैसे विपरीत जैविक कारकों के खिलाग रोग प्रतिरोधी क्षमता उत्पन्न करने में भूमिका निभाने के लिए जाना जाता है।

 

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DRR टेक्निकल बुलेटिन नं. 11, 2004-2005, एम. नारायण रेड्डी, आर. महेन्दर कुमार तथा बी. मिश्रा, चावल आधारित फ़सल प्रणाली हेतु स्थल-विशिष्ट समेकित पोषण प्रबंधन
24
Sep

सिलिकन (Si)

1. यद्यपि मात्रात्मक रूप से Si चावल का एक प्रमुख अकार्बनिक अवयव है, इसके बावजूद यह आवश्यक तत्त्व माना जाता है। 

2. चावल की फ़सल प्रत्येक 1 टन अनाज के उत्पादन के लिए 100 kg Si का इस्तेमाल करती है, जो N का पांच गुना होता है। 

3. वैज्ञानिक एप्स्टीन तथा कृषि वैज्ञानिक सावंत के अनुसार कृषि वैज्ञानिक रूप S एक आवश्यक तत्त्व है, जो टिकाऊ चावल उत्पादन/रोगों के ख़िलाफ फ़सल की प्रतिरोध क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है।    

4. वर्तमान में यह एक लाभदायक तत्त्व के रूप में जाना जाता है। 

 

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DRR टेक्निकल बुलेटिन नं. 11, 2004-2005, एम. नारायण रेड्डी, आर. महेन्दर कुमार तथा बी. मिश्रा, चावल आधारित फ़सल प्रणाली हेतु स्थल-विशिष्ट समेकित पोषण प्रबंधन
24
Sep

Mo की कमी का प्रबंधन

1. अम्ल मृदा को pH 6.5 तक रखने से इस समस्या से निजात मिलती है (यदि अन्य उद्देश्यों के लिए pH परिवर्तन की आवश्यकता न हो तो इसकी अनुशंसा नहीं की जाती।

2.Mo की कमी वाली मिट्टी में Na /NH4 मोलिब्डेट का छिड़्काव 100-500 g ha-1 दर से कहना चाहिए। 

3.0.07 –0.1 % Na /NH4 -1 मॉलिब्डेट का फोलियर स्प्रे करना चाहिए, क्योंकि Mo फ्लोएम में काफी गतिशील रहता है। 

4.0.5 % Na/ NH4 -1 मॉलिब्डेट का फोलियर स्प्रे से मूंगफली में काफी लाभ पहुंचता है, क्योंकि पेजिंग के समय टॉपड्रेसिंग के लिए अनुशंसित जिप्सम  BNF के लिए आवश्यक  Mo को धीमा करता है। 

 

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DRR टेक्निकल बुलेटिन नं. 11, 2004-2005, एम. नारायण रेड्डी, आर. महेन्दर कुमार तथा बी. मिश्रा, चावल आधारित फ़सल प्रणाली हेतु स्थल-विशिष्ट समेकित पोषण प्रबंधन
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