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Hybrid Rice

Hybrid Rice
22
Nov

Farmers opt for paddy variety that needs less water

 
One of the farmers who is cultivating the KRH-4 paddy variety in Matada Doddi village near Malavalli in Mandya district.

Farmers in at least six districts, who were affected by deficient rainfall this year, have come forward to cultivate a hybrid variety of paddy, KRH-4, developed by the University of Agricultural Sciences (UAS), Bangalore, which requires less water compared to other varieties.

The paddy variety, developed after several years of research and field trials, is expected to yield 7.8 tonnes a hectare, which is more than double the yield from traditional varieties, according to UAS-B authorities.

Hundreds of farmers have expressed their willingness to cultivate KRH-4 paddy in over 5,000 acres of land in Mandya, Mysore, Hassan, Tumkur, Shimoga and Ramanagaram districts, N. Shivakumar, a breeder at the Paddy Division at the V.C. Farm here, told The Hindu on Sunday.

Promoting the variety

To promote the KRH-4 paddy, the UAS-B is cultivating the variety in 125 acres of land in various districts using the innovative and water saving method of System of Rice Intensification. Standing crop in most of the fields is in the ‘milky’ stage, which will be followed by grain-filling and maturity stages.

Scientists at the Zonal Agricultural Research Station, V.C. Farm, are expecting that yield from the KRH-4 variety to be at least two times more than that from the other varieties.

Crop demonstrations

UAS-B and V.C. Farm authorities have conducted live crop demonstrations in several villages in the six districts which were attended by hundreds of farmers cultivating traditional paddy varieties.

Mr. Shivakumar said more than 20 districts in the State had been badly affected owing to deficient rainfall. KRH-4 was a boon for farmers as it requires less water and fertilizer.

Cultivation of the variety in the 125 acres had been taken up in association with V.C. Farm, Krishi Vigyan Kendras (KVKs) and Karnataka State Seeds Corporation, he said.

“Hundreds of farmers have placed orders for the KRH-4 variety to take up sowing in about 5,000 acres in the next season. The variety may be cultivated in over 15,000 acres in the next two seasons,” he said. The variety has also evoked curiosity among researchers in different parts of the country.

The paddy variety is being cultivated in 15 acres of land at Matada Doddi village near Malavalli.

Puttaswamy, who has been growing traditional paddy varieties since the last 19 years, is cultivating the KRH-4 variety in nearly 4 acres. He said the new variety had drastically reduced the input costs as it requires less water. The yield was expected to be three times more than that from the traditional varieties, he said.

“Farmers in Hadya, Katte Doddi, Channanke Gowdana Doddi, Kyathanahalli, Naguvanahalli and others villages have decided to take up cultivation of the KRH-4 variety in a big way. In Matada Doddi itself at least 100 farmers are ready to sow the hybrid variety,” Mr. Puttaswamy said.

Farmers in the surroundings of Malavalli and Mandya cultivate paddy varieties such as MTU 1001, BPT 5204, IR 64, Thanu and IR 3864. With uncertainty over the release of Cauvery water and owing to deficient rainfall many of them were willing to opt for the new hybrid variety, scientists at the V.C. Farm said.

courtesy:www.thehindu.com

File Courtesy: 
http://www.thehindu.com/news/states/karnataka/farmers-opt-for-paddy-variety-that-needs-less-water/article4108970.ece
27
Aug

KJTRH-3

महाराष्ट्र राज्य में व्यावसायिक खेती के लिए रीजनल एग्रीकल्चरल रिसर्च स्टेशन, करजत द्वारा KJTRH-3 को 2004 में सहयाद्री-2 नाम से जारी किया गया। बेहतरीन दाने की क्वालिटी(L.S.), बेहतरीन मिलिंग (70.2 %) और हेड राइस रिकवरी(56 %) के साथ यह जल्द (115-120 दिनों में) तैयार होने वाला हाइब्रिड है, जो राज्य की उच्च भूमि और दोहरी फसल वाले क्षेत्र के लिए उपयुक्त है। यह किस्म ब्लास्ट, बैक्टीरियल ब्लाइट, फाल्स स्मट, ब्राउन प्लांट होपर और स्टेम बोरर के प्रति सामान्य रोधन क्षमता दर्शाती है।

File Courtesy: 
RARS करजत
27
Aug

KJTRH-1

महाराष्ट्र राज्य में व्यावसायिक खेती के लिए रीजनल एग्रीकल्चरल रिसर्च स्टेशन करजत द्वारा प्रथम हाइब्रिड चावल KJTRH-1 को 1998 में सहयाद्री नाम से जारी किया गया। इसे बाद में साल 2000 में देश के पश्चिमी क्षेत्रों अर्थात महाराष्ट्र , गोवा और गुजरात के लिए अधिसूचित कर दिया गया।

File Courtesy: 
RARS करजत
27
Aug

RARS करजत में विकसित हाइब्रिड

करजत में इन दो हाइब्रिडों का विकास किया गया है:
1. KLTRH-1
2. KLTRH-2

File Courtesy: 
RARS करजत
27
Aug

दक्षिण भारत के लिए हाइब्रिड चावलों का विकास

1. दक्षिण में हाइब्रिड चावल की खेती का क्षेत्र जिस प्रकार सिमटा हुआ है उसे देखकर लगता है कि दक्षिण भारत में इसने कोई खास लोकप्रियता हासिल नहीं की है।

2. इसका कारण यह है कि दक्षिण भारत के लोग BPT 5204 जैसे मध्यम मोटाई के प्रीमियम क्वालिटी के चावल पसंद करते हैं, जबकि मौजूदा हाइब्रिड चावल लंबे दाने वाले और लसीले होते हैं।

3. हाल में, डाइरेक्टरेट ऑफ राइस रिसर्च, हैदराबाद ने एक हाइब्रिड किस्म DRR TRAINING MANUALH-3 का विकास किया है जो BPT 5204 (मध्यम पतलापन के साथ सबसे लोकप्रिय किस्म) की तुलना में उपज और दाने की क्वालिटी दोनों ही मामलों में ज्यादा अच्छा है।

File Courtesy: 
एग्रो टेक्निक्स फॉर हाइब्रिड राइस कल्टिवेशन एंड सीड प्रोडक्शन- 2005, DRR ट्रेनिंग मैनुअल
27
Aug

हाइब्रिड बासमती चावल का विकास

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एग्रो टेक्निक्स फॉर हाइब्रिड राइस कल्टिवेशन एंड सीड प्रोडक्शन- 2005, DRR ट्रेनिंग मैनुअल
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एग्रो टेक्निक्स फॉर हाइब्रिड राइस कल्टिवेशन एंड सीड प्रोडक्शन- 2005, DRR ट्रेनिंग मैनुअल
27
Aug

दाने की क्वालिटी

1. बीजों की कुकिंग क्वालिटी क्षेत्रों के अनुसार भिन्न-भिन्न हो सकती है। चावल की क्वालिटी के लिए मिलिंग क्वालिटी, दाने की साइज, आकार, रूप-रंग और उनके पकने की विशेषताओं को ध्यान मेंब रखना चाहिए।

2. हाइब्रिड के कुल मिल्ड चावल में साबुत दानों की संख्या भरपूर होनी चाहिए। उनकी लंबाई और चौड़ाई का अनुपात 2.5:3 से लेकर 5.5: 6.6 तक हो सकता है। ज्यादा लंबे दाने 6.6 मिमि से अधिक के हो सकते हैं। वे दिखने में अर्ध पारदर्शी होंगे और उनका जिलेटिनाइजेशन तापमान और उनमें एमाइलेज की मात्रा भिन्न-भिन्न हो सकती है।

File Courtesy: 
एग्रो टेक्निक्स फॉर हाइब्रिड राइस कल्टिवेशन एंड सीड प्रोडक्शन- 2005, DRR ट्रेनिंग मैनुअल
27
Aug

बीज की उपज

खरीफ और रबी मौसमों में बीजों की उपज इस प्रकार ली जा सकती है:

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RARS करजत
27
Aug

बीजों की पैकिंग और उनपर लेबुल लगाना

1. बीजों को जूट के साफसुथरे और बिल्कुल नए बोरों में पैक करें।

2. यदि आप पुराने जूट के बोरों में बीजों को रखें तो बोरों को संक्रमण मुक्त कर लें ताकि बीजों पर किन्हीं जंतुओं का प्रकोप न हो।

3. उनके अंदर वाले हिस्से बाहर उलट लें और उन्हें अच्छी तरह झाड़ें ताकि कोई अन्य बीज उनके अंदर न रह जाए।
बोरों को 10 मिनट तक 0.15% मैलाथियान के घोल में रखें (इस घोल को तैयार करने के लिए 300 भाग पानी में 1 भाग 50 EC मैलाथियान मिलाएं)।

4 . बीज भरने से पहले बोरों को छाया में सुखा लें।

5 . यदि बीजों में नमी 13% से अधिक हो तो उन्हें पैक न करें। ऐसा करने से भंडारित बीज बाद में खराब हो जाएंगे।

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http://www.knowledgebank.irri.org/hybridriceseed/Packing_and_labeling_the_seed.htm
27
Aug

बीजों के अंकुरण की जांच

1. बीजों को हाइब्रिड बीज के रूप में पैक कर बेचने से पहले उनके अंकुरण की दर और शुद्धता की जांच आवश्यक होती है।
आम तौर पर बीजों की जांच और प्रमाणन का काम सरकारी बीज जांच एजेंसियां करती हैं।

2. बीजों के प्रमाणन के लिए अंकुरण की दर कम से कम 85% होनी चाहिए। अपने बीज को जांच के लिए ले जाने से पूर्व आप खुद से उनकी अंकुरण दर की जांच निम्नलिखित विधि से कर सकते हैं।

3. नए या पुराने साफ टाट के टुकड़े पर पानी में भींगे 200 बीजों को समान रूप से फैलाकर रखें। एक दूसरे टाट के टुकड़े से बीजों को ढंक दें।

File Courtesy: 
http://www.knowledgebank.irri.org/hybridriceseed/Seed_germination_testing.htm
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http://www.knowledgebank.irri.org/hybridriceseed/Seed_germination_testing.htm
27
Aug

बीजों की सफाई और ग्रेडिंग

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http://www.knowledgebank.irri.org/hybridriceseed/Cleaning_and_grading.htm
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DRR
27
Aug

बाजार में उतारे जाने के लिए हाइब्रिड चावल के बीजों की प्रोसेसिंग

1. बीजों का प्रसंस्करण इसलिए किया जाता है ताकि उनमें से विभिन्न प्रकार की अवांछित वस्तुओं जैसे डंठलों के टुकड़ों, पत्तियों, टूटे हुए दाने, मिट्टी या रेत के कणों, घास-फूस के बीजों आदि को दूर किया जा सके और साथ ही उनमें से अपरिपक्व, सिकुड़े हुए, अधूरे दानों को निकाला जा सके।

2 . बीजों का प्रसंस्करण सरकारी या निजी सीड एजेंसियों द्वारा एअर स्क्रीन मशीनों के द्वारा किया जा सकता है।

3. एअर स्क्रीन मशीनों से बीजों की सफाई के अलावा उन्हें एक समान अलग-अलग साइजों में अलग कर उनकी ग्रेडिंग़ भी की जाती है।

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एग्रो टेक्निक्स फॉर हाइब्रिड राइस कल्टिवेशन एंड सीड प्रोडक्शन- 2005, DRR ट्रेनिंग मैनुअल
27
Aug

हवा के प्रवाह द्वारा बीजों का सुखाया जाना

1. बीजों को बैच-टाइप के ड्रायर में गर्म हवा के प्रवाह द्वारा 40-450C पर सुखाया जाता है।

2. बीजों की नमी यदि 20% से अधिक हो तो उन्हें अचानक 13% तक न सुखाएं।

3. बैच-टाइप ड्रायर में बीजों का स्तर 45 सेमी से अधिक मोटा न रखें।

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एग्रो टेक्निक्स फॉर हाइब्रिड राइस कल्टिवेशन एंड सीड प्रोडक्शन- 2005, DRR ट्रेनिंग मैनुअल
27
Aug

धूप में सुखाना

1. बीजों को थ्रेसिंग फ्लोर पर ही सुखाया जा सकता है।

2. बीजों को कंक्रीट थ्रेसिंग फ्लोर पर सीधे रखकर नहीं सुखाएं।

3. उन्हें जूट के बोरों या तिरपाल पर रखकर सुखाना चाहिए।

4. समय-समय पर बीजों चलाएं ताकि वे समान रूप से सूख पाएं।

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एग्रो टेक्निक्स फॉर हाइब्रिड राइस कल्टिवेशन एंड सीड प्रोडक्शन- 2005, DRR ट्रेनिंग मैनुअल
27
Aug

बीजो को सुखाने की विधियां

बीजों को दो विधियों से सुखाया जा सकता है:

1. धूप में

2. हवा के प्रवाह द्वारा

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एग्रो टेक्निक्स फॉर हाइब्रिड राइस कल्टिवेशन एंड सीड प्रोडक्शन- 2005, DRR ट्रेनिंग मैनुअल
27
Aug

बीजों को सुखाना

1. बीजों की नमी का स्तर यदि 13% से कम हो तो उन्हें सुरक्षित रूप से भंडारित किया जा सकता है।
2. बीजों को सुखाने से उनकी अंकुरण क्षमता और चमक को लंबे समय तक बरकरार रखा जा सकता है।
3. सुखाने से बीजों में कवक की वृद्धि और ऐसे अन्य जीवों की गतिविधि को नियंत्रित किया जाता है जो भंडारित बीजों की गुणवत्ता को घटा सकते हैं।
4. सुखाने से बीजों को बदरंग होने से भी बचाया जा सकता है। बदरंग बीजों का बाजार मूल्य कम हो जाता है।

File Courtesy: 
एग्रो टेक्निक्स फॉर हाइब्रिड राइस कल्टिवेशन एंड सीड प्रोडक्शन- 2005, DRR ट्रेनिंग मैनुअल
27
Aug

बीजों को सुखाना

1. बीजों को सुखाने से उनकी अतिरिक्त नमी को घटाकर वांछित स्तर तक लाया जाता है और इससे उनकी अंकुरण क्षमता और चमक को लंबे समय तक बरकरार रखा जा सकता है।
2. सुखाने से बीजों में कवक की वृद्धि और ऐसे अन्य जीवों की गतिविधि को नियंत्रित किया जाता है जो भंडारित बीजों की गुणवत्ता को घटा सकते हैं।
3. सुखाने से बीजों को बदरंग होने से भी बचाया जा सकता है।
4. बीजों की नमी का स्तर यदि 13% से कम हो तो उन्हें सुरक्षित रूप से भंडारित किया जा सकता है।

File Courtesy: 
एग्रो टेक्निक्स फॉर हाइब्रिड राइस कल्टिवेशन एंड सीड प्रोडक्शन- 2005, DRR ट्रेनिंग मैनुअल
27
Aug

थ्रेसिंग

1. थ्रेसिंग के दौरान ए लाइन और आर लाइन की कटी हुई पैरेंट फसलों को एक दूसरे से अलग-अलग रखना चाहिए।

2. ए और आर लाइन की थ्रेसिंग अलग-अलग करनी चाहिए।

3. थ्रेसिंग आरंभ करने से पहले, सारे थ्रेसिंग उपकरण, थ्रेसिंग फ्लोर और तिरपाल की सफाई अच्छी तरह की जानी चाहिए।

File Courtesy: 
एग्रो टेक्निक्स फॉर हाइब्रिड राइस कल्टिवेशन एंड सीड प्रोडक्शन- 2005, DRR ट्रेनिंग मैनुअल
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आर.एम.कुमार
27
Aug

ए लाइन की कटाई

कटाई से पहले एक और बार ए लाइन के पौधों की रोगिंग करें।

1. सामान्य दानों (अर्थात्, जो हाइब्रिड न हों) के समूह वाले पौधों को निकाल दें।

2. ऑफ टाइप के पौधे दिखें तो उन्हें भी निकाल दें।

3. ए लाइन के की कटाई हाथ से या कम्बाइन जैसे मशीनों से की जा सकती है।

4. यदि कम्बाइन का इस्तेमाल किया जाए तो इसके फील्ड स्पीड और क्लिअरेन्स एडजस्टेबल होने चाहिए ताकि फील्ड लॉस या दानों का नुकसान न हो सके।

File Courtesy: 
http://www.knowledgebank.irri.org/hybridriceseed/Harvesting_the_A_line.htm
Image Courtesy: 
http://www.knowledgebank.irri.org/hybridriceseed/Harvesting_the_A_line.htm
27
Aug

बी अथवा आर लाइन की कटाई

1. सभी बी अथवा आर लाइनों की कटाई पहले करें।

2. पौधों की कटाई हाथ से करें। हंसिए की मदद से उन्हें जड़ के पास से काटें।

3 . बाद में थ्रेसिंग के लिए, आर लाइन की कटी हुई फसल को हटाकर किसी सुरक्षित स्थान में भंडारित करें।

4. एक भी बाली को खेत में न रहने दें । इनके कारण ए लाइन के हाइब्रिड बीजों की परिशुद्धता में कमी आएगी।

File Courtesy: 
http://www.knowledgebank.irri.org/hybridriceseed/Harvesting_the_B_or_R_line.htm
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डॉ हरि प्रसाद ( DRR)
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