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Growth & Development

Growth & Development
13
Sep

ज्वारीय आर्द्रभूमि चावल पारितंत्र

1. ज्वारीय आर्द्रभूमि ऐसे क्षेत्र हैं जहां भूमि समुद्र से मिलती है। 

2. उच्च अथवा वृहत् ज्वार के कारण ये इलाके समुद्र के जलस्तर में वृद्धि होने से समय-समय पर जलमग्न हो जाते हैं या ज्वारीय चक्र के द्वारा जलस्तर में चक्रीय रूप से परिवर्तन आने के कारण प्रभावित होते रहते हैं।

3. खारा दलदल और कीचड़ वाले क्षेत्र ज्वारीय आर्द्रभूमि के सामान्य प्रकार हैं जो न्यूयार्क के समुद्री तटरेखा के साथ-साथ पाए जाते हैं।

File Courtesy: 
http://agropedia.iitk.ac.in/?q=content/tidal-wetland-ecosystem
Image Courtesy: 
http://www.vims.edu/newsandevents/topstories/archives/2009/wetland_threat.php
13
Sep

गहरे जल का चावल पारितंत्र

1. गहरे जल और ज्वारीय आर्द्रभूमि चावल पारितंत्र के अंतर्गत 1.3 करोड़ हे.

भूमि आती है जो अधिकांशतः द.एशिया में स्थित है।

2. ये ऐसे क्षेत्र हैं जहां चावल की खेती वर्षा पोषित शुष्क भूमियों में अथवा 1-3 महीनों की छिछली बाढ़ वाली स्थितियों में की जाती है, जहां 50 सेमी से अधिक जलस्तर में फसल को एक या अधिक महीने तक रहना पड़ता है।

File Courtesy: 
http://agropedia.iitk.ac.in/?q=content/deep-water-ecosystem
Image Courtesy: 
श्री चैतन्य, DRR
13
Sep

बाढ़प्रभावित चावल पारितंत्र

1. बाढ़ प्रभावित पारितंत्र दक्षिण और दक्षिण पूर्वी एशिया में पाए जाते हैं 

और इन क्षेत्रों में जबरदस्त सूखा एवं बाढ़ की स्थितियां आती हैं।

2. उपज कम और अनियमित होती है। वर्षा के दिनों में जून से नवंबर के बीच बाढ़ आती है और चावल की किस्मों का चयन जलनिमज्ज्न सहने की क्षमता के आधार पर किया जाता है।

3. भारत में चावल पारितंत्र विश्व में चावल खेती के सिंचित क्षे. का 24%, वर्षा पोषित निम्नभूमि का 34%, बाढ़ प्रभावित क्षे. का 26% और वर्षा पोषित उच्चभूमि का 37% है।

File Courtesy: 
TNRRI,अदुथुरई
Image Courtesy: 
BAU
13
Sep

वर्षापोषित उच्चभूमि वाला चावल पारितंत्र

1. वर्षापोषित उच्चभूमि चावल पारितंत्र एशिया, अफ्रीका और

लैटिन कमेरिका में पाए जाते हैं।

2. भारत में, वर्षापोषित उच्चभूमि वाले चावल पारितंत्र के अंतर्गत 60 लाख हे. भूमि आती है जो देश में कुल चावल के क्षे. का 13.5% है।

3. असम,बिहार,पूर्वी मध्य प्रदेश,पूर्वी उ.प्र., प.बंगाल और उ.पू. पर्वतीय क्षेत्र में वर्षापोषित उच्चभूमि वाले चावल पारितंत्र पाए जाते हैं।

4. वर्षापोषित उच्चभूमि चावल पारितंत्र के खेत आमतौर पर सूखे, बिना ऊंची मेड़ वाले और सीधे बोए गए होते हैं।

File Courtesy: 
TNRRI,अदुथुरई
Image Courtesy: 
श्री चैतन्य, DRR
13
Sep

वर्षापोषित निम्नभूमि चावल पारितंत्र

1. वर्षापोषित निम्नभूमि चावल पारितंत्र पूर्वी भारत, बांग्लादेश, इंडोनेशिया, फिलिपींस और थाइलैंड में पाए जाते हैं जो विश्व के कुल चावल क्षे. का 25% है।

2. भारत में, वर्षापोषित निम्नभूमि चावल का क्षे. 1.44 करोड़ हे. है जो देश में चावल के कुल क्षे. का 32.4% है।

3. चावल के उत्पादन में तकनीक के प्रयोग में कमी के कारण उत्पादन असमान है।

4. वर्षापोषित निम्नभूमि के किसानों को कमजोर मिट्टी, सूखा/बाढ़ और अनिश्चित फसल का सामना करना पड़ता है।

File Courtesy: 
TNRRI,अदुथुरई
13
Sep

सिंचित चावल पारितंत्र

1. सिंचित चावल पारितंत्र पू. एशिया का प्रमुख चावल पारितंत्र।

2. सिंचित चावल पारितंत्र वैश्विक चावल उत्पादन का 75% उपलब्ध कराता।

3. भारत में, सिंचित चावल की खेती के अंतर्गत 2.2 करोड़ हे. भूमि आती है जो देश में चावल की कुल कृषि-क्षे. का 49.5% होता है।

4. सिंचित चावल की खेती पंजाब, हरियाणा, उत्तरप्रदेश, जम्मू-कश्मीर, आन्ध्र प्रदेश, तमिलनाडु, सिक्किम, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश और गुजरात में की जाती है।

5. सिंचित चावल की खेती मेड़ युक्त खेतों में की जाती है।

File Courtesy: 
TNRRI,अदुथुरई
Image Courtesy: 
श्री चैतन्य, DRR
13
Sep

भारत में चावल आधारित विभिन्न पारितंत्र

भारत में चावल आधारित 6 सुस्पष्ट पारितंत्र हैं:

1. सिंचित चावल पारितंत्र

2. वर्षापोषित उच्चभूमि चावल पारितंत्र

3. वर्षापोषित निम्नभूमि चावल पारितंत्र

4. बाढ़प्रभावित चावल पारितंत्र

5. गहरे जल का चावल पारितंत्र 6. ज्वारीय आर्द्रभूमि चावल पारितंत्र

File Courtesy: 
http://www.rice-trade.com/rice-eco-system.html
13
Sep

चावल के पारितंत्रों की विविधता

1. भारत में चावल की खेती विभिन्न दशाओं के अंतर्गत की जाती है। यहां, यह मुख्य रूप से वर्षापोषित फसल के रूप में उगाई जाती है जिसे अनिश्चित मानसून और अनियमित वर्षा का सामना करना पड़ता है।

2. इसे ऐसे इलाके में भी उगाया जाता है जहां जलस्तर 5मी. या उससे अधिक तक पहुंच जाता है। केरल के कुट्टनाड जिले में इसकी खेती समुद्रतल से नीचे की जाती है।

3. जबकि, जम्मू और कश्मीर राज्य में इसे 2000 MSL(6600फीट) की ऊंचाई तक उगाया जाता है।

File Courtesy: 
DRR ट्रेनिंग मैनुअल
13
Sep

चावल आधारित पारितंत्र

1. भारत के विभिन्न कृषि पारितंत्रों में चावल उगाया जाता है। चावल के पारितंत्रों में ऐसी विविधता विश्व के किसी भी देश में नहीं पाई जाती है।

2. खेती के बहुत व्यापक पैमाने पर होने के कारण भारत में स्पष्ट रूप से चार प्रकार के पारितंत्रों का विकास हुआ है।

File Courtesy: 
http://www.rice-trade.com/rice-eco-system.html
13
Sep

गरमा या गृष्मकालीन चावल

1. भारत में रबी फसलों का मौसम नवम्बर-फरवरी से मार्च-जून तक रहता है। इस मौसम में उगाए जाने वाले चावल को रबी चावल या गृष्मकालीन चावल कहा जाता है।

2. गृष्मकालीन चावल को देश के विभिन्न भागों में अलग-अल्ग नामों से जाना जाता है। उदाहरण के लिए, असम और बंगाल में इसे ‘बोरो’, उड़ीसा में ‘दलुआ’, आन्ध्र प्रदेश में ‘दलवा’, केरल में’पुंजा’,तमिलनाडु में ‘नवरई/सोर्नावारी’ और बिहार में ‘गरमा’ कहा जाता है।

File Courtesy: 
http://www.rice-trade.com/rabi-rice.html
13
Sep

Winter/ kharif जाड़े या खरीफ की फसल

1. भारत में चावल की अधिकतर खेती खरीफ मौसम में की जाती है। वर्षा-पोषित खरीफ फसल दक्षिण-पश्चिमी मानसून पर निर्भर करता है।

2. देश में खरीफ या जाड़ा चावल के लिए मुख्य मौसम है। कटाई के समय के आधार पर इसे जाड़े या खरीफ चावल कहते हैं।

3. जाड़े की फसल की बुआई जून से अक्टूबर के बीच की जाती है और इसकी कटाई नवंबर से अप्रील के बीच होती है।

4. देश में लगभग 84% चावल की फसल इस मौसम में उगाई जाती है और प्रायः इस मौसम में मध्यम से लेकर लंबी अवधि तक की किस्में उगाई जाती हैं। 2002 तक खरीफ के अंतर्गत लगभग 403 लाख हे. भूमि खरीफ चावल की खेती के अंतर्गत थी।

File Courtesy: 
http://www.rice-trade.com/kharif-rice.html
13
Sep

Autumn शरत्

1. आमतौर पर, शरत् या जाड़े से पहले का मौसम मार्च-मई से लेकर जून-अक्टूबर तक रहता है। शरत् में उगाया जाने वाला चावल शरत् कालीन चावल या खरीफ-पूर्व चावल कहलाता है। लगभग 7% चावल इस मौसम में उगाया जाता है।

2. इस मौसम में उगाया जाने वाला चावल ज्यादातर अल्पकालीन होता है जिसके तैयार होने में लगभग 90-110 दिन लगते हैं।

3. शरत् कालीन या खरीफ-पूर्व चावल मई से लेकर अगस्त तक बोया जाता है। यद्यपि, बुआई का समय मौसम की दशाओं और वर्षा की स्थिति के अनुसार विभिन्न राज्यों में भिन्न-भिन्न होता है।

4. भारत के अलग-अलग भागों में शरत् कालीन चावल की फसल को अलग-अलग नामों से पुकारा जाता है।

File Courtesy: 
http://www.rice-trade.com/pre-kharif-rice.html
13
Sep

Rice growing season in different agro-ecosystems of India भारत के विभिन्न कृषि-पारितंत्रों में चावल की खेती के मौसम

1. शरत्

2. खरीफ/शीत (जाड़े की फसल)

3. बोरो/गरमा (गृष्म कालीन)

File Courtesy: 
http://www.rice-trade.com/rice-growing-seasons.html
13
Sep

Rice growing seasons चावल की खेती के मौसम

1. चावल की खेती के तीन मुख्य मौसम हैं और उनके नाम फसल की कटाई के मौसमों के अनुसार रखे गए हैं।

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DRR ट्रेनिंग मैनुअल
13
Sep

Stage 10 - Mature grain stage अवस्था 10- परिपक्व दाने की अवस्था

1. चावल का दाना परिपक्व,पूर्णविकसित,कठोर और पीले रंग का हो जाता है।.

2. ऊपर के पत्ते अब तेजी से सूखने लगते हैं हालांकि कुछ किस्मों की पत्तियां अब भी हरी रहती हैं।

3. पौधे के आधारभाग में बड़ी संख्या में सूखे पत्ते जमा हो जाते हैं।

File Courtesy: 
RARS, करजत
Image Courtesy: 
RARS, करजत
13
Sep

Stage 9 - Yellow ripening stage of rice plant अवस्था 9- चावल के पौधे में दानों के पीले होकर पकने की अवस्था

1. पूरी तरह से भरे हुए दाने कड़े हो जाते हैं और धीरे-धीरे उनका रंग पीला होने लगता है। यह अवस्था 7 दिनों की होती है।

File Courtesy: 
RARS, करजत
13
Sep

Stage 8 - Dough grain stage of rice plant अवस्था 8- दाने में भरे दूध के गाढ़े होने की अवस्था

1. इस अवस्था में, दाने में भरा दूध पहले गाढ़ा होता है फिर उसमें कठोरता आने लगती है।

2. पुष्पगुच्छ के दाने हरे रंग से पीले रंग के होने लगते हैं। कल्लों और पत्तियों में जरायुता दिखाई देने लगती है।

3. खेत का रंग पीला होने लगता है। पुष्पगुच्छ के पीले हो जाने के कारण प्रत्येक कल्ले के आखिरी दो पत्ते अपने शीर्ष की ओर से सूखने लगते हैं।

File Courtesy: 
RARS, करजत
Image Courtesy: 
RARS, करजत
13
Sep

Stage 7 - Milk grain stage of rice plant अवस्था 7- चावल के दाने में दूध आने की अवस्था

1. दूध की इस अवस्था में दानों में दूधिया पदार्थ भरने लगता है। 

2. दानों में दूधिया द्रव भरने लगता है जो दानों को उंगली से दबाने पर फूट कर बाहर निकलता है।

3. पुष्पगुच्छ दिखने में हरे रंग का हो जाता है और झुकने लगता है। कल्लों के आधार भाग में जरायुता दिखने लगती है। ध्वज पत्र और नीचे के दो पत्ते हरे होते हैं।

File Courtesy: 
RARS, करजत
Image Courtesy: 
RARS, करजत
13
Sep

Ripening phase of rice plant चावल के पौधे की पक्वन अवस्था

1. पक्वन अवस्था के अंतर्गत आती हैं- दाने में दूध आने की अवस्था, दूध के गाढ़ा होने की अवस्था तथा पीले होने और पकने की अवस्था।

File Courtesy: 
RARS, करजत
13
Sep

Stage 6 - Flowering of rice plant (Anthesis) अवस्था 6- चावल के पौधे का पुष्पण (एंथेसिस्)

1. पुष्पण तब शुरू होता है जब शूकिका से परागकोश बाहर की ओर निकलता है

और तब परागण और निषेचन सम्पन्न होते हैं।

2. पुष्पण के दौरान पुष्पिका खुलती है, पुंकेसर के दीर्घीकरण के कारण पुष्प कवच से परागकोश बाहर निकलता है और परागकोश का स्फुटन होता है तथा पराग कण झरते हैं।

File Courtesy: 
RARS, करजत
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RARS, करजत
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