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Growth & Development

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14
Sep

रोपण और बुआई के उपकरण

1. धान की खेती में प्रतिरोपण एक अत्यंत श्रमसाध्य कार्य है जिसमें प्रति हे. लगभग 280 से 350 मानव घंटे की आवश्यकता होती है।

2. आगे, हाथ से रोपणकार्य बहुत ही थका देने वाला मुश्किल काम है क्योंकि इसमें लंबे समय तक श्रमिकों को झुकी हुई अवस्था में काम करना पड़ता है।

3. अच्छी फसल के लिए समय पर रोपाई जरूरी होती है। काम के सबसे व्यस्त समय में मजदूरों की किल्लत से समय पर रोपणकार्य बुरी तरह प्रभावित होता है।

4. कृषि क्षेत्रों से उद्योगों की ओर मजदूरों के पलायन से किसानों के लिए मुश्किल और भी बढ़ जाती है।

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DRR ट्रेनिंग मैनुअल
14
Sep

कोनो पड्लर(IRRI मॉडल)

1. यह पड्लर शंक्वाकार रोटर की एक नई अवधारणा का इस्तेमाल करता है 

ताकि मुलायम मिट्टी वाले धान के खेत में कम से कम खिंचाव लगे।

2. यह इस सिद्धांत पर काम करता है कि जब ब्लेड कोनो रोटर मिट्टी में सीधा चलता है तो शंकु की विभिन्न जगहों पर लगे ब्लेड मिट्टी को अलग-अलग तरह से हटाता है।

3. यह मिट्टी में क्षैतिज रूप से आगे-पीछे गति करता है। यह जुताई को ऊपरी मृदा स्तर पर 100-120मिमि तक सीमित रखता है।

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DRR ट्रेनिंग मैनुअल
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IRRI
14
Sep

कुंडलीदार ब्लेड पड्लर

1. हलके इस्पात से बने पांच कुंडलीदार ब्लेड तिरछे रूप में लगे होते हैं और एक लकड़ी के बियरिंग पर इस प्रकार स्थित रहते हैं कि ब्लेड मुक्त रूप से घूम सकें।

2. एक हैंडल और पोल शाफ्ट दिए गए होते हैं। ब्लेड के कुंडलीदार आकृति के कारण ब्लेड और मिट्टी के बीच लगातार सम्पर्क बना रहता है, जिससे बैल की गरदन पर एकसमान भार पड़े।

3. देशी हल से खेत की जुताई के बाद यह उपकरण खेत में कीचड़ तैयार करने में इस्तेमाल किया जाता है। यह 80-100 मिमि की गहराई पर काम करता है।

4. कुंडलीदार आकृति के कारण इससे पड्लिंग के लिए मिट्टी का मंथन और मिट्टी की कटाई बेहतर तरीके से होते हैं।

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DRR ट्रेनिंग मैनुअल
14
Sep

APAU पडलर

1. इसमें एक सेंट्रल शाफ्ट होता है जिसमें शाफ्ट की ओर झुके हुए ब्लेड होते हैं।

शाफ़्ट बेयरिंग के साथ फ्रेम से जुड़ा होता है।

2. यह बैल से खींचा जाने वाला यंत्र है। बैलों की गति के साथ शाफ्ट घूमता है, शाफ्ट के घूमने से ब्लेड घूमते हैं और फिर उनके द्वारा मिट्टी का मंथन होता है।

3. यह हर प्रकार की मिट्टी के लिए उपयुक्त है। इसका वर्किंग विड्थ 750 मिमि है। 2-3 किमी/घंटा की रफ्तार से यह एक दिन में 0.6 हे. खेत की पड्लिंग करता है।

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DRR ट्रेनिंग मैनुअल
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DRR ट्रेनिंग मैनुअल
14
Sep

पडलिंग के लिए मीडियम ट्रैक्टर

1. 35 एचपी का एक मध्यम श्रेणी का ट्रैक्टर भी आधे या पूरे केज ह्वील

के साथ पडलिंग के लिए उपयोगी होता है।

2. ट्रैक्टर के पहियों के साथ केज ह्वील मुख्य रूप से इसलिए लगाए जाते हैं कि आर्द्रभूमि में जुताई के दौरान ट्रैक्टर को आवश्यक कर्षण प्राप्त हो सके और इसलिए भी कि इससे कीचड़ तैयार करने में मदद मिलती है।

3. पूर्ण केज ह्वील के इस्तेमाल की स्थिति में ट्रैक्टर के टायर निकाल दिए जाते हैं।

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DRR ट्रेनिंग मैनुअल
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DRR ट्रेनिंग मैनुअल
14
Sep

पडलिंग के लिए ट्रैक्टर

1. ट्रैक्टर दो पावर रेंज में आते हैं। 18 एचपी के छोटे ट्रैक्टर खास तौर से चावल की खेती के लिए होते हैं।

2. यह हल्के वजन का फोर ह्वील ड्राइव ट्रैक्टर है जिसके हाइड्रॉलिक माउंट पर, खासतौर पर आर्द्रभूमि में पड्लिंग के लिए रोटोवेटर लगा होता है।

3. ट्रैक्टर के पावर टेक ऑफ के ड्राइव से रोटोवेटर परिचालित होता है।

4. इसके वजन में हल्के होने के कारण ट्रैफिक एबिलिटी की समस्या से बचा जा सकता है।

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DRR ट्रेनिंग मैनुअल
14
Sep

पडलिंग के लिए पावर टिलर

1. यह एक 12 एचपी का सेल्फ प्रोपेल्ड मशीन है जो खास तौर पर चावल

के छोटे खेतों के लिए उपयुक्त है क्योंकि यह छोटा मोड़ ले सकता है।

2. इसके साथ पडलिंग के लिए रोटोवेटर, खेत तैयार करने के लिए कल्टीवेटर और पम्पिंग, थ्रेशिंग तथा खेत में परिवहन के लिए अन्य यंत्र होते हैं।

3. एक हे. खेत के पडलिंग के लिए यह 5 घंटे का समय और खेत तैयार करने के लिए 10 घंटे का समय लेता है।

4. इसकी कीमत लगभग एक लाख रु. होती है। इसके बहूपयोगी होने के कारण यह किसानों के बीच काफी लोकप्रिय है।

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DRR ट्रेनिंग मैनुअल
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DRR ट्रेनिंग मैनुअल
14
Sep

पशुओं द्वारा खींचे जाने वाले पडलर

1. यह आयतकार ब्लेड वाला पडलर है जो आर्द्रभूमि में पडलिंग कार्य

के लिए उपयुक्त होता है।

2. इसमें ब्लेड की तीन कतारें होती हैं और प्रत्येक कतार में शाफ्ट पर चार ब्लेड लगे होते हैं।

3. इस कार्य के लिए औसत गहराई 10 सेमी ली जाती है जहां क्षेत्र क्षमता 0.09हे./घंटा और क्षेत्र दक्षता 65% होती है।

4. पशुओं से खींचे जाने वाले देशी हल से कीचड़ तैयार करने की तुलना में इससे 66% श्रम और 88% परिचालन समय की बचत होती है।

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ICAR NEH, उमियम
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ICAR NEH, उमियम
14
Sep

कीचड़ तैयार करने के उपकरण

कीचड़ तैयार करने (पडलिंग) के उपकरण हैं:

1. पशुओं द्वारा खींचे जाने वाले पडलर

2. पावर टिलर

3. ट्रैक्टर

4. मीडियम ट्रैक्टर

5. APAU पडलर

6. कुंडलीदार ब्लेड वाला पडलर

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DRR ट्रेनिंग मैनुअल
14
Sep

खेत में कीचड़ तैयार करना

1. खेत में कीचड़ तैयार करना धान के पौधे के प्रतिरोपण के लिए सबसे महत्वपूर्ण कार्य है।

2. खेत में कीचड़ तैयार करने से जुड़ी बातें हैं- मिट्टी को पानी के साथ मथकर मिश्रण तैयार करना जिससे मिट्टी का घनत्व, जमीन में पानी रिसने की दर, मिट्टी की सछिद्रता और उसेक वेधन जैसे भौतिक गुणों में परिवर्तन।

3. यह प्रक्रिया खरपतवार की वृद्धि को रोकता है, जल तथा पोषक तत्त्वों का संरक्षण करती है और अंततः फसल की उपज में वृद्धि लाती है।

4. खेत में 50-100 मिमि पानी भरे होने की स्थिति में सूखी दशा में पहले से जोत कर रखे खेत में कीचड़ की तैयारी की जाती है।

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DRR
14
Sep

जुताई के लिए ‘हार्ड पैन’ का निर्माण

1. कुछ प्रकार की मिट्टियों में ‘हार्ड पैन’ या फसल की जड़ों वाले क्षेत्र की मिट्टी

के नीचे एक अपारगम्य परत तैयार करना वांछ्नीय होता है।

2. यह कठोर परत एक उपकरण की मदद से सबसे अच्छी तरह तैयार किया जाता है जो वास्तव में अपने सामान्य कार्य के दौरान मिट्टी का लेपन करता है।

3. इस कार्य के लिए रोटोवेटर सबसे उपयुक्त उपकरण है।

4. केज ह्वील लगे ट्रैक्टर के पहियों के स्लिप के हाइ लेवल भी इसी तरह का प्रभाव बनाता है।

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CRRI
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DRR ट्रेनिंग मैनुअल
14
Sep

जुताई का लैंड सिस्टम पैटर्न

1. इस तरीके में जुताई खेत के केन्द्र से शुरू होकर किनारे की ओर चलती है।

2. खेत में केन्द्रीय बिंदु के निर्धारण के लिए कुछ नापजोख करना पड़ता है और यदि मापन सही-सही किया जाए तो खेत समतल रहता है और इसके सिरे की ओर ड्रेनेज चैनल बनते हैं।

3. इस तरीके का इस्तेमाल सभी तरह के खेतों के लिए किया जा सकता है। काफी बड़ॆ खेतों में भूमि की कई टुकड़ों में जुताई की जा सकती है।

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CRRI
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CRRI
14
Sep

आगे-पीछे या हेडलैंड (सिरे की छूट) पैटर्न

1. इस पैटर्न के अंतर्गत खेत की जुताई समांतर फेरों के रूप में की जाती है।

2. जुताई के फेरे खेत के एक सिरे से शुरू होकर विपरीत सिरे पर समाप्त होता है और हल हेडलैंड (सिरे की छूट) पर जाकर मुड़ता है।

3. यह तरीका केवल टाइन्ड उपकरणों, रोटोवेटर, हैरो और रिवर्सिबल प्लाउ के साथ अपनाया जाता है।

4. यह खेत के लिए सबसे उपयुक्त जुताई पैटर्न है और यदि उपकरणों को ठीक से सेट और परिचालित किया जाए तो खेत का कोई हिस्सा अनजुता नहीं छूटता।

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CRRI
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CRRI
14
Sep

चक्करदार जुताई पैटर्न

1. चक्करदार पैटर्न में यंत्र खेत की एक सीमा के साथ-साथ काम करना 

शुरू करता है। यह अन्य सीमाओं के चलते हुए पुनः खेत की उस सीमा की ओर आता है जहां से काम शुरू किया गया था।

2. इस पैटर्न में जुताई खेत की सीमाओं की ओर से केन्द्र की ओर की जाती है और यह विधि एशिया में अपनाई जाने वाली सबसे लोकप्रिय विधि है।

3. यह जुताई आमतौर पर मोल्डबोर्ड, तवा और ऑफसेट डिस्क के साथ की जाती है।

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CRRI
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CRRI
14
Sep

जुताई के पैटर्न

1. जुताई के सही पैटर्न को अपनाने से अनुत्पादक कार्यों पर खर्च होने वाला समय बचता है।

2. जुताई के पैटर्न का एक सबसे महत्वपूर्ण बात है मोड़ों की संख्या को कम करना और जुताई की सीधी दूरी को अधिक से अधिक लंबी रखना।

3. खेत की जुताई के दौरान कई ऐसे पैटर्न हैं जिन्हें अपनाया जा सकता है।

4. चक्करदार, आगे-पीछे या हेडलैंड (सिरे की छूट) और वर्किंग इन लैंड्स।

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CRRI
14
Sep

आर्द्रभूमि में जुताई के उपकरण

आर्द्रभूमि में जुताई के उपकरण हैं:

1. देशी हल

2. बोस हल

3. वेटलैंड पडलर

4. केज़ ह्वील

5. कुंडलीदार ब्लेड वाला पडलर

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RARS, करजत
14
Sep

आर्द्रभूमि में जुताई

1. जलमग्न भूमि में चावल की खेती के लिए खेत की 

तैयारी कीचड़ तैयार कर की जाती है।

2. कीचड़ तैयार करने का अर्थ है खेत की मिट्टी का खेत में लगे पाने के साथ मिश्रण तैयार करना।

3. चिकनी और चिकनी-दोमट प्रकार की मिट्टियों में कीचड़ की उपयुक्त गहराई 15-20 सेमी होती है।

4.अच्छे कीचड़ की तैयारी का अर्थ है मिट्टी और पानी का मिश्रण मुलायम हो, एकसमान रूप से लेवल में हो और साथ ही इसमें खरपतवार या फसल की खूंटियां न हों और जमीन में पानी का रिसाव न्यूनतम हो।

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RARS, करजत
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CRRI
14
Sep

उच्च भूमि में जुताई

1. उच्च भूमि में जुताई ऐसी जगहों पर की जाती है जहां फसलें वातापे

क्षी (aerobic) मृदा की स्थितियों में उगाई जाती हैं। इसका मतलब यह है कि ऐसी मिट्टी कीचड़ वाली गीली मिट्टी नहीं होती और खेत में पानी नहीं लगता।

2. मिट्टी में नमी का स्तर तब महत्वपूर्ण हो जाता है जब जुताई उच्चभूमि-कृषि की परिस्थिति में की जाती है।

3. यदि मिट्टी बहुत अधिक सूखी हो तो जुताई आसान नहीं होती, जुताई में ताकत अधिक लगती है और चिकनी मिट्टी में बड़े-बड़ॆ ढेले बन जाते हैं।

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CRRI
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CRRI
14
Sep

रोटोवेटर

1. रोटोवेटर का इस्तेमाल आमतौर पर द्वितीयक कार्यों और  

खास तौर पर सीडबेड तैयार करने में किया जाता है।

2. इनका इस्तेमाल दो पहियों और चार पहियों वाले ट्रैक्टर के साथ उच्च भूमि और जल से भरे खेतों में किया जाता है।

3. रोटोवेटर का अग्रघर्षण बड़ा तीव्र होता है जो मिट्टी को चूर करता है और खरपतवारों तथा फसल की खूंटियों को मिट्टी में दबाता है।

4. जल भरी कुछ स्थितियों में रोटोवेटर का इस्तेमाल प्राथमिक जुताई के लिए किया जाता है।

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CRRI
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DRR ट्रेनिंग मैनुअल
14
Sep

टाइन्ड कल्टीवेटर

1. टाइन्ड कल्टीवेटर एक अत्यंत बहुपयोगी उपकरण है 

क्योंकि इसे द्वितीयक जुताई के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है और इसे सीड ड्रिल के लिए रूपांतरित किया जा सकता है।

2. टाइन्ड कल्टीवेटर केवल सूखी स्थिति में इस्तेमाल किया जाता है क्योंकि मिट्टी को पलटने की बजाए यह मिट्टी को चीरता है और खरपतवार को काटकर और नोंचकर यह उन्हें सतह पर ला छोड़ता है।

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DRR ट्रेनिंग मैनुअल
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DRR ट्रेनिंग मैनुअल
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