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Growth & Development

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14
Sep

बिचड़े का उखाड़ा जाना

1. सही समय (चौथे पत्ते की अवस्था) पर बिचड़े को उखाड़ें ।

2. तीसरे पत्ते की अवस्था में भी इन्हें उखाड़ा जा सकता है।

3. ये बिचड़े अधिक कल्ले दे सकते हैं यदि संस्थापन की अवस्था में पूरी देखभाल की जाए, यानि मुख्य खेत में पानी की पतली परत कायम रखी जाए और उसका समतलीकरण अच्छी तरह किया हुआ हो।

4. पांच या उससे अधिक पत्ते निकल जाने पर ऐसे बिचड़ों से रोपाई करने पर फसल की उपज प्रभावित होती है। ऐसे बिचड़े को अधिक आयु के बिचड़े कहते हैं।

5.अधिक आयु वाले बिचड़े से रोपाई करने की स्थिति में उपज की हानि कम से कम हो, इसके लिए खास पैकेज की आवश्यकता होती है।

File Courtesy: 
http://agritech.tnau.ac.in/agriculture/agri_cropproduction_cereals_rice.html
14
Sep

रोपण का समय

1. कम समय की फसल के लिए बिचड़े का 18-25 दिन, मध्यम समय की फसल के लिए 25-30दिन और लंबे समय की फसल के लिए बिचड़े का 35-40 दिन का होना जरूरी है।

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14
Sep

नर्सरी में खरपतवार प्रबंधन

1.बिड़वा निकलने से पूर्व कोई एक शाकनाशी, जैसे- प्रेटिलाक्लोर+सेफनर 0.3 किग्रा/हे. बुआई के 3रे या 4थे दिन प्रयोग करें ताकि निम्नभूमि नर्सरी में खरपतवार नियंत्रण किया जा सके।

2. पानी की पतली परत रखें और इसे फिर गायब हो जाने दें।

3. पानी की निकासी न करें। पानी जमा रहने से खरपतवार की वृद्धि रुकेगी।

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14
Sep

फर्टिलाइजर के बेसल डोज का इस्तेमाल

1. पूरी तरह सड़े हुए FYM या कम्पोस्ट की 1 टन मात्रा 20सेंट या 800वर्ग मी की नर्सरी के लिए इस्तेमाल करें। खाद को मिट्टी में समान रूप से बिखेरें।

2. कम उपजाऊ जमीन में जहां बुआई के 20-25 दिन बाद बिचड़े उखाड़ने हों वहां बेसल अनुप्रयोग के रूप में डीएपी के व्यवहार की अनुशंसा की जाती है।

3. उस स्थिति में, अंतिम गीली जुताई से पूर्व, 40किग्रा. डीएपी डालें और यदि यह तत्काल उपलब्ध न हो तो सीधे 16 किग्रा. यूरिया और 120 किग्रा. सुपर फॉस्स्फ़ेट डालें।

4. यदि बिचड़ों को 25 दिन के बाद उखड़ना हो तो उखाड़ने से 10 दिन पूर्व डीएपी का प्रयोग करें।

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14
Sep

नर्सरी में ऊर्वरक प्रबंधन

पूरी तरह सड़े हुए FYM या कम्पोस्ट की 1 टन मात्रा 20सेंट या 800वर्ग मी की नर्सरी के लिए इस्तेमाल करें। खाद को मिट्टी में समान रूप से बिखेरें।

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14
Sep

नर्सरी का जल प्रबंधन

1. बुआई के 18-24 घंटे बाद पानी निकाल दें।

2. शैय्या के किसी भी हिस्से में यह ध्यान रखें कि पानी जमने न पाए।

3. बुआई के 3-5 दिनों तक शैय्या की मिट्टी को पर्याप्त जल से संतृप्त रखें। 5वें दिन के बाद, बिड़वे की ऊंचाई के अनुसार जल स्तर को बढ़ाकर 1.5 सेमी कर लें।

4. इसके बाद शैय्या में 2.5 सेमी जलस्तर बनाए रखें।

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14
Sep

नर्सरी में बीज की बुआई

1. अंकुरित बीजों को बीजशैय्या की सतह पर एक समान रूप से बोएं और ध्यान रखें कि पानी की एक बहुत पतली परत शैय्या के ऊपर मौजूद रहे।

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14
Sep

नर्सरी में बीज शैय्या की तैयारी

1. 2.5 मी की चौड़ाई में भूमि को चिह्नित करें जिसके चारों ओर 30सेमी चौड़ी नाली बनी हो।

2. मिट्टी और जमीन की ढाल के अनुसार बीज शैय्या की लंबाई 8-10 मी हो सकती है।

3. नाले से कीचड़ युक्त मिट्टी जमा करें और इसे शैय्या के ऊपर बिखेर दें।

4.या फिर, नाली को किसे भारी पत्थर की मदद से गहरा कर दें ताकि शैय्या हर हाल में नाली से ऊंची रहे।

5. बीज शैय्या की सतह को समतल करें ताकि पानी बहकर नाली में चला जाए।

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14
Sep

रोपण के लिए आवश्यक नर्सरी का क्षेत्रफल

1. एक हे. खेत की रोपाई के लिए जल श्रोत के पास लेकिन लैम्पपोस्ट से दूर 800 वर्ग मी. क्षे. की भूमि का चयन करें।

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14
Sep

एजोस्पिरीलियम के द्वारा बीजोपचार

1. एजोस्पिरीलियम के तीन पैकेट(600ग्राम/हे.) और तीन पैकेट(600ग्राम/हे.) फॉस्फोबैक्टीरिया या 6 पैकेट(1200ग्राम/हे.) एजोफोस ।

2. पर्याप्त जल के साथ मिश्रित बायो-इनोक्युलेंट में बीजों को रात भर भिंगोकर तब बुआई करें।

3. बायो कंट्रोल एजेंट बायो फर्टिलाइजर एक दूसरे के अनुकूल होते हैं।

4. इसलिए, बीजों को भिंगोने के लिए बायो फर्टिलाइजर और बायो कंट्रोल एजेंट को मिश्रित किया जा सकता है।

5. कवकनाशी और बायो कंट्रोल एजेंट आपस में मिश्रित होने के लिए अनुकूल नहीं होते।

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14
Sep

Pseudomonas fluorescens के द्वारा बीजोपचार

1. Pseudomonas fluorescens के टाक आधारित सूत्र- 10ग्राम/किग्रा के हिसाब से बीजों को उपचारित करें और 1ली. पानी में रातभर भींगने दें।

2. अतिरिक्त पानी को निकाल दें और बीजों को 24 अंकुराने दें और तब बुआई करें

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14
Sep

बीजोपचार

1. बीजों को कार्बेंडाजाइन या पायरोक्विलोन या ट्राइसायक्लोजोल के 2ग्राम/ली. जल के साथ बने घोल में 1 किग्रा. बीज की दर से उपचारित करें।

2. 10 घंटे तक बीज को घोल में भिंगोएं और इसके बाद बाकी पानी निकाल दें।

3. बीजों का यह गीला उपचार बिड़्वों को 40 दिनों तक ब्लास्ट जैसे रोगों से बचाव करता है और यह उपचार विधि सूखी उपचार विधि की तुलना में बेहतर है।

4. यदि बीजो को तुरंत बोना होतो भींगे बीजों को जूट के बोरे में लपेटकर अन्धेरे में रखकर 24 घंटे तक अंकुर आने के लिए छोड़ें।

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14
Sep

गीली शैय्या वाली नर्सरी के लिए बीज दर

गीली शैय्या वाली नर्सरी के लिए बीज दर:

1. लंबी अवधि (> 140 दिन) वाली किस्मों के लिए 30किग्रा.

2. मध्यम अवधि (121-135 दिन) वाली किस्मों के लिए 40किग्रा.

3.4. अल्प अवधि (105-120 दिन) वाली किस्मों के लिए 60किग्रा.

5. 6. किसी भी अवधि वाली हाइब्रिड किस्मों के लिए 20किग्रा.

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14
Sep

गीली शैय्या

1. गीलीशैय्या प्रकार की नर्सरी ऐसी जगहों पर इस्तेमाल की जाती

है जहां भरपूर पानी हो।

2. पूर्व-अंकुरित बीजों को अच्छी तरह कीचड़ तैयार और समतल भूमि में बिखेरा जाता है। पानी के उचित निकास के लिए नाले जरूर बने होने चाहिए।

3. जैविक खाद और थोड़ी मात्रा में रसायनिक ऊर्वरक बेसल डोज के रूप में देने से बिड़वे अच्छे निकलते हैं और बड़े स्वस्थ होते हैं।

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Image Courtesy: 
ZARS, मंड्या
14
Sep

नर्सरी के प्रकार

1. गीली-शैय्या                                      

2. सूखी शैय्या

3. डैपोग

4. मॉडिफाइड मैट

5. बबल ट्रे

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IRRI
14
Sep

धान के रोपण का समय

1. रोपण का सही समय हाइब्रिड/ऊंची उपजदेने वाली किस्मों की पैदावार के लिए एक महत्वपूर्ण कारक है।

2. यह पाया गया है कि 25 जुलाई की तिथि महत्तम उपज के लिए उपयुक्त होती है।25 जुलाई की तुलना में 5 अगस्त से 15 अगस्त के बीच रोपी गई फसल की उपज में कमी 14 और 13 % पायी गई।

3. 1994 में उपज 83 और 103 किग्रा/दिन जबकि 1995 में 76 और 98 किग्रा/दिन पायी गई।

4. इससे यह जाहिर होता है कि अगात रोपाई से हाइब्रिड किस्मों के उत्पादन में वृद्धि आती है।

File Courtesy: 
DRR ट्रेनिंग मैनुअल
14
Sep

नर्सरी में बीज घनत्व

1. खेती की लागत को कम करने के लिए यह जरूरी है कि उचित बीज दर का व्यवहार किया जाए क्योंकि हाइब्रिड चावल के बीज ऊंची उपज देने वाली अन्य किस्मों से महंगे होते हैं।

2. नर्सरी में तीन बीज दरों (10,20 तथा 30 ग्राम/वर्ग मी.) के साथ AICRIP के तहत विभिन्न स्थानों पर बहुस्थलीय परीक्षण किए गए और 25 दिन के बिचड़ों को मुख्य खेत में 20 x 10 सेमी की दूरी पर एक साथ एक या दो बिचड़ों की दर से रोपा गया।

3. परिणाम यह आया कि 10 या 20 ग्राम/वर्ग मी. बीज दर वाले बिचड़े से सर्वाधिक उपज (4.44-4.49 टन/हे.) हुई जबकि 30ग्राम/वर्ग मी. बीज दर वाले बिचड़े की उपज 4.23 टन/हे. रही।

File Courtesy: 
DRR ट्रेनिंग मैनुअल
14
Sep

नर्सरी प्रबंधन

1. 1000 वर्ग मी. का नर्सरी क्षेत्र एक हे. खेत की रोपाई के लिए पर्याप्त होता है। सूखी स्थिति में नर्सरी की दो बार जुताई करनी चाहिए।

2. जैविक अवशेषों को खेत में सड़ाकर तैयार किए गए खाद की 500 किग्रा. मात्रा को आवश्यकतानुसार 1000वर्ग मी. भूमि में डालें।

3. इसके बाद पांच दिनों के अंतराल पर दो या तीन बार खेत में पानी (2-3 सेमी) लगी स्थिति में कीचड़ तैयार करें।

4. अन्तिम कीचड़ के बाद खेत को समतल कर लें और 1 मी. से 1.5 मी. तक की चौड़ाई की बीजशैय्या तैयार करें। बीजशैय्या के बीच 30 सेमी का रिक्त स्थान छोड़ें।

File Courtesy: 
DRR ट्रेनिंग मैनुअल
14
Sep

ट्रैक्टर की दक्षता

1. शक्ति और हानि दोनों यांत्रिक होते हैं और ट्रैक्टर में कर्षण के उद्देश्य से इंधन की ऊर्जा ड्रॉबार की शक्ति के रूप में परिणत होती है।

2. ज्यादातर ट्रैक्टरों में 50% से कम इंजन की शक्ति ड्रॉबार के रूप में प्रयुक्त होती है। ऐसा इंजन के यांत्रिक और ताप क्षय के कारण एवं ट्रैक्टर के टायरों तथा मिट्टी के बीच पारेषण क्षति के कारण होता है।

3. खेत में काम आने वाले ट्रैक्टर की दक्षता को महत्तम करने के लिए विभिन्न प्रणालियों की आधारभूत जानकारी की जरूरत होती है जो सामूहिक रूप से इन्धन को ड्रॉबार पर उपयोग लायक शक्ति के रूप में परिणत करती हैं।

File Courtesy: 
http://www.knowledgebank.irri.org/landprep/index.php/types-of-farm-power-mainmenu-118/the-use-of-track-laying-tractors-mainmenu 123/96-the-concept-of-tractor-efficiency
14
Sep

फ्रंट ह्वील ड्राइव असिस्ट

1. फ्रंट ह्वील असिस्ट ट्रैक्टर के लीड की जांच। फ्रंट ह्वील असिस्ट ट्रैक्टर के अगले टायरों को पिछले टायरों की तुलना में 2-5% अधिक तेज चलना पड़ता है।

2. चाल में यह अंतर लीड कहलाता है। यदि लीड इससे कम हो तो यांत्रिक और चालन संबंधी समस्याएं आ सकती हैं।

3. गलत लीड के लक्षण:

a) आगे के डिफरेंशियल सील का रिसाव,

b) आगे या पीछे के टायरों में अधिक घिसावट,

c) इन्धन की अधिक खपत,

d) ट्रैक्टर का अधिक उछलना,

e) 2WD मोड में ट्रैक्टर अधिक आसानी से काम करता है।

File Courtesy: 
http://www.knowledgebank.irri.org/landprep/index.php/types-of-farm-power-mainmenu-118/the-use-of-track-laying-tractors-mainmenu-123/95-the-c
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