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Growth & Development

Growth & Development
6
Sep

Reproductive phase of rice plant चावल के पौधे की जननीय अवस्था

1. जननीय अवस्था के अंतर्गत आते हैं- पुष्पगुच्छ का निकलना, बूटिंग, हेडिंग और पुष्पण की अवस्थाएं।

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RARS, करजत
6
Sep

Stage 3 - Stem elongation of rice plant अवस्था 3- चावल के पौधे के तने की अभिवृद्धि

1. यह अवस्था पुष्पगुच्छ के निकलने के पूर्व आरंभ होती है अथवा यह कल्ले निकलने की अवस्था के उत्तरवर्ती चरण में होती है। इसतरह, अवस्था 2 और 3 का अतिव्यापन हो सकता है।
2. कल्ले की संख्या और ऊंचाई का बढ़ना जारी रहता है लेकिन पत्तों में किसी प्रकार की शिथिलता नहीं दिखाई पड़ती। पौधे के बड़ॆ होते जाने से जमीन पर आच्छादन और ऊपर चंदोवे का बढ़ना जारी रहता है।

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6
Sep

Stage 2 - Tillering of rice plant अवस्था 2- चावल के पौधे की टिलरिंग (कल्ले फूटना)

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6
Sep

Stage 1 - Seedling of rice plant अवस्था 1- चावल के पौधे का बिड़वा

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6
Sep

Stage 0 - Germination to Emergence of rice plant अवस्था 0 – अंकुरण से लेकर बिड़वा निकलने तक

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6
Sep

Vegetative Growth Phase of rice plant चावल के पौधे का प्ररोही वर्धन

प्ररोही वर्धन के अंतर्गत अंकुरण, बिड़वे का उगना, टिलरिंग और तने की वृद्धि की अवस्थाएं आती हैं।

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6
Sep

Growth Phases of rice plant चावल के पौधे के वर्धन की अवस्थाएं

चावल के पौधे के वर्धन को तीन अवस्थाओं में बांटा गया है :

1. वर्धी(प्ररोही) या Vegetative (अंकुरण से लेकर पुष्पगुच्छ निकलने तक);
2. जननीय या Reproductive (पुष्पगुच्छ निकलने से लेकर पुष्पण तक);
3. पक्वन या Ripening (पुष्पण से लेकर दाने के परिपक्वन तक)

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6
Sep

Fruit or Caryopsis of rice फल या चावल का कैरयोप्सिस

1. चावल का फल परिपक्व अंडाशय की भित्ति, पेरिकार्प के अन्दर बंद एकल बीज होता है।
2. कैरयोप्सिस Lemma और palea द्वारा अवृत रहता है।
3. चावल का दाना lemma, palea, rachilla और sterile lemmas से युक्त परिपक्व अंडाशय है।
4. चावल के दाने को ‘रफ राइस’ भी कहा जाता है।
5. चावल की भूसी अर्थात hull या husk lemma, palea, sterile lemmas, rachilla और awn से बनी होती है।

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Rice - Jata S Nanda & Pawan K Agrawal चावल- जाता एस नन्दा & पवन के. अग्रवाल
6
Sep

Rice flowering चावल का पुष्पण

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6
Sep

Rice Spikelets चावल की शूकिका

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6
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Panicle of Rice – Inflorescence चावल का पुष्पगुच्छ—पुष्पक्रम

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Rice Florets चावल का पुष्पक

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6
Sep

Rice Leaf चावल के पत्ते

1. वयस्क पत्ते के चार भाग होते हैं: पत्रकोष(sheath), पत्र फलक(blade), जिह्विका(ligule) और पालि(auricles)। पत्ते विभिन्न लंबाइयों,रूप,कठोरता वाले होते हैं और ये तने को ढकते हैं।
2. ये वयस्क पत्ते चौरस होते हैं और किस्मों तथा खेती के तरीके के अनुसार इनकी लं. और चौड़ाई असमान होती हैं।
3. पत्रकोष और पत्र फलक की संधि को कालर कहते हैं। पत्रकोष के आधार भाग में नीचे जो फूला हुआ भाग होता है जहां यह नाल के साथ जुड़ता है pulvinus कहलाता है।

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6
Sep

Rice Tiller चावल का टिलर(कल्ला)

1. चावल के टिलर (कल्ले) में जड़, तना(नाल) और पत्ते होते हैं जिनके साथ पुष्पगुच्छ हो भी सकते हैं और नहीं भी।

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6
Sep

Rice Culm चावल का नाल(तना)

1. नाल चावल के जुड़े हुए तने होते हैं जिनका विकास प्ररोहांकुर या plumule (बीज के भ्रूण की मूल कलिका) जुड़े हुए
2. नाल की ऊंचाई पर्यावरण, प्रबंधन के तरीके और किस्मों के अनुसार भिन्न-भिन्न होती है।
3. मौजूदा किस्में 30-46 इंच की ऊंचाई की होती हैं। वर्धन काल की लंबाई पर यह निर्भर करता है कि नाल में कितने पर्व निकलेंगे(आम तौर पर यह 13-16 होती हैं)।
4. प्रायः ऊपरी पर्वांतर (internode) सबसे लंबा होता है और इसी में शीर्ष या पुष्पगुच्छ लगते हैं।

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6
Sep

चावल की जड़ें(मूल)

1. चावल के दानों के अंकुरण के तुरंत बाद पौधे के आधार भाग के बाहर और भीतर की ओर रेशेदार मूल तंत्र विकसित होता है।
2. अंततः तने (नाल) के निचले पर्व से शाखायुक्त उपस्थानिक मूल निकलते हैं।
3. जड़ों की साइज और लंबाई विभिन्न होती हैं। जल निकास की दशा में जड़ों का विकास अच्छा होता है जो कि पौधे के ऊपरी विकास के समानुपाती होता है।
4. जड़ों का अधिकतम विकास टिलरिंग अवस्था में होता है, इसके बाद इसमे कमी आने लगती है और दाने लगने की अवस्था तक आते-आते इनका विकास रुक जाता है।

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6
Sep

चावल के पौधे का परिचय

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